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कई गांव एकजुट, कहा- हमारे बच्चों को बीमार-अशिक्षित करे, नहीं चाहिए ऐसी पत्थलगड़ी

उपायुक्त सूरज कुमार ने संविधान की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्थलगड़ी कोई मुद्दा नहीं है।

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 01:52 AM IST
पत्थलगड़ी मुद्दे पर खुली बहस में शामिल जिले के सभी वरीय पदाधिकारी। पत्थलगड़ी मुद्दे पर खुली बहस में शामिल जिले के सभी वरीय पदाधिकारी।

खूंटी. पत्थलगड़ी के वर्तमान स्वरूप के विरोध में अब आदिवासी समाज मुखर होने लगा है। सोमवार को ग्रामीणों ने पत्थलगड़ी के माध्यम से संविधान की अलग व्याख्या करने वालों को चुनौती दी और कहा कि यह कौन सी पत्थलगड़ी है जिसमें बच्चों को स्कूल नहीं भेजें, नवजातों को पोलियो की खुराक नहीं दें। ऐसे तो पीढिय़ां ही तबाह हो जाएंगी। शासन के इस विरोध से हमें क्या हासिल होगा। अब ये लोग सरकारी अस्पतालों से दवाइयां भी नहीं लेने दे रहे, पोलियो खुराक लेने जो लोग आ रहे हैं, उन्हें भगा रहे हैं। इसके लिए भी ग्राम सभा से परमिशन लेने की बात कह रहे, क्या यही पत्थलगड़ी है।


ग्रामीणों ने पत्थलगड़ी को असंवैधानिक बताया और इसकी आड़ में समाज को पीछे ले जाने वाल तत्वों से सावधान रहने की बात कही। अड़की, तोरपा, मुरहू, रनिया के लोगों ने पहले ही पत्थलगड़ी का विरोध किया था अब खूंटी के दर्जनों गांव के लोग मुखर होने लगे हैं। पूर्व जिस सदस्य भीम सिंह मुंडा ने कहा कि पत्थलगड़ी की तह में जाएं तो साफ हो जाएगा इसके पीछे कौन सी शक्तियां हैं।

पत्थलगड़ी के खिलाफ खूंटी के कई गांवों के लोग हुए एकमत, कहा-हमें गैर परंपरागत पत्थलगड़ी नहीं चाहिए


गैर परंपरागत व संविधान की गलत व्याख्या कर लोगों को भड़काने और समाज में वैमनस्यता फैला कर पत्थलगड़ी करने वालों के खिलाफ आदिवासी समाज एक बार फिर मुखर हुआ है। अड़की, मुरहू, तोरपा, रनिया व कर्रा के बाद सोमवार को खूंटी के दर्जनों गांवों के ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों ने एक स्वर से ऐसी पत्थलगड़ी को असंवैधानिक करार देते हुए ऐसे तत्वों से सावधान रहने की बातें कहीं। खूंटी नगर भवन में पत्थलगड़ी, बच्चों को स्कूल न भेजने और सरकारी योजनाओं को न लेने के कुछ ग्रामसभाओं के फरमान को लेकर जिला प्रशासन द्वारा जनसंवाद कार्यक्रम किया गया।


ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों और जिले के आला अधिकारियों खुलकर अपनी बातें रखी। विभिन्न गांवों के ग्राम प्रधानों ने कहा कि पत्थलगड़ी आदिवासी समाज की परंपरा है। आदिवासियों में किसी के जन्म लेने, मौत होने, गांव के सीमांकन सहित कुल आठ तरह की पत्थलगड़ी होती है, लेकिन पत्थलगड़ी का जो वर्तमान स्वरूप है, वह पूरी तरह गलत और असंवैधानिक है। अफीम की खेती के दुष्प्रभाव से लेकर अन्य कई मुद्दों पर खुली चर्चा हुई। मौके पर डीसी सूरज कुमार, एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा, एसडीओ प्रणब कुमार पाल, मुख्यालय डीएसपी विकास आनंद लागुरी, प्रोबेशनर डीएसपी वरुण रजक, इंस्पेक्टर अमिताभ राय, प्रमुख रूकमिला देवी, बीस सूत्री प्रखंड अध्यक्ष संजय साहू, नपं अध्यक्ष रानी टूटी, उपाध्यक्ष मदनमोहन मिश्रा आदि थे।

भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाया जा रहा है : डीसी

जन संवाद कार्यक्रम में उपायुक्त सूरज कुमार ने संविधान की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्थलगड़ी कोई मुद्दा नहीं है। लेकिन जिस तरह से संविधान की धाराओं को पत्थलगड़ी के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है वह मुद्धा है और गलत भी। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेदों को आधी अधूरी बताकर भोले भाले आदिवासियों को बरगलाया जा रहा है। भोले भाले आदिवासियों को भड़का कर अपे स्वार्थ सिद्ध करने वाले कायर है। 17 मार्च को इसी जगह जिले के सभी ग्रामप्रधानों को एक साथ बुलाया गया है। हम जानते है कि इसमें वे लोग नहीं आएंगे। क्योंकि वे लोग जानते है कि आने से उसकी पोल खुल जाएगी। उन्होंने पुन: कहा कि खुली बहस तो कर लें। अगर बहस में वर्तमान पत्थलगड़ी का स्वरूप सही निकला तो हम सब मिलकर पत्थलगड़ी करेंगे, और अगर गलत निकला तो किसी को नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि संविधान की धारा में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि भारतीय कौन है। जिसका जन्म भारत की सीमा में हो और यदि विदेशी माता-पिता में कोई भी भारतीय नागरिक हो तो, उसकी संतान भारतीय होगी।

भूखे रहें, लेकिन अफीम की खेती नहीं करें

खूंटी सामाजिक कार्यकर्ता मंगल सिंह मुंडा ने कहा कि जिस परिस्थिति से खूंटी गुजर रहा है, वह किसी से अनजान नहीं है। फिर भी कोई कुछ नहीं बोल रहा है। उन्होंने कहा कि पत्थलगड़ी को लेकर जो विवाद उत्पन्न हुआ है वह विचार-विमर्श से ही दूर हो सकता है। उन्होंने अफीम को लेकर जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अभियान की चर्चा करते हुए अपने आदिवासी भाइयों से कहा कि भूखे रहे, बासी भात खाएं, लेकिन अफीम की खेती न करें। इससे आने वाली पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी।

प्रशासन परंपरा का सम्मान करता है

एसपी खूंटी एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रशासन परंपरा का सम्मान करता है, पर जिस ढंग से संविधान की गलत व्याख्या कर लोंगों को भड़काया जा रहा है। इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अफीम की खेती से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि इससे आने वाली पीढ़ी प्रभावित होगी। इसे समझने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां जहां अफीम की खेती हुई है अमूमन उसी इलाके में अधिक पत्थलगड़ी हुई है। उन्होंने आदिवासियों से किसी के बहकावें में नहीं आने की अपील की। उन्होंने कहा कि आदिवासी काफी बुद्धिमान व दयालू हैं। वे दिग्भ्रमित नहीं होंगे, यदि कोई दिग्भ्रमित हुए भी हैं तो, उन्हें पूरा भरोसा है कि वे लोग बहुत जल्द अपने पुराने स्वरूप में लौट आएंगे। उन्होंने कहा कि भोले भाले आदिवासियों के भावनाओं से खेला जा रहा है। इसे समझे।

तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरियों में स्थानीय लोगों को मिले प्रमुखता

पूर्व जिप सदस्य भीम सिंह मुंडा ने कहा कि पत्थलगड़ी के तह में जाने की जरूरत है। इसके पीछे की शक्तियों को भी जानना होगा। उन्होंने कहा कि मुंडा समाज रूढ़ीवादी है। पत्थलगड़ी हमारी परंपरा है। लेकिन पत्थलगड़ी वर्तमान में जिस स्वरूप के साथ की जा रही है,वह गलत है। मुंडा ने प्रशासन से तृतीय एवं चतुर्थ की नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्रमुखता से बहाल करनेे की मांग की। लोग कामकाज करेंगे तो इस तरह की समस्या नहीं आएगी। दामू मुंडा ने कहा कि आदिवासी महासभा के लोग पांचवीं अनुसूची के नाम पर भोले भाले आदिवासियों को बरगला रहे हैं।

सरकार ही सबकुछ है मानना होगा

जीवरी गांव के ग्राम प्रधान विनसाय मुंडा ने कुछ ग्राम प्रधान द्वारा अपना करेंसी चलाये जाने की बात पर चुटकी लेते हुए कहा सरकार के नोट में तो महात्मा गांधी की फोटो रहती है। लेकिन स्थानीय नोट में किसका फोटो छपेगा। यह भी बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे इस बात से खुश हैं कि ग्राम प्रधान होने के नाते नोट में उसका फोटो छपेगा। देश दुनिया में उसकी भी अलग पहचान बनेगी। विनसाय की यह बात सुन डीसी समेत उपस्थित सभी लोग जोर से हंस पड़े। विनसाय यहीं चुप नहीं रहे। उन्होंने यह भी कहा कि आज कुछ लोग सरकारी लाभ नहीं लेना चाह रहे हैं। सवाल उठता है कि दुर्घटना होने पर हम सदर अस्पताल ही जाएंगे। वह भी तो सरकारी है। उन्होंने वैसे तत्व से जानना चाहा कि ग्रामसभा अस्पताल खोलेंगे क्या। पूर्व से सरकारी लाभ के तहत कुआं, तालाब, डोभा व आवास जो लिए हैं उसे क्या लौटा देंगे। विनसाय के इस तर्क से हर कोई प्रभावित हुए।

आठ पत्थलगड़ी में नौंवा एकदम गलत

खूंटी के उप प्रमुख जितेंद्र कश्यप ने कहा कि पत्थलगड़ी विकास की गति को रोकने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों द्वारा आठ तरह की पत्थलगड़ी की जाती है। लेकिन नौवां व वर्तमान में की जा रही पत्थलगड़ी गलत है। उन्होंने कहा कि जिले में उग्रवाद की समस्याओं में भारी कमी आयी है। इसके लिए जिला पुलिस को बधाई दी है। टकरा गांव के ग्राम प्रधान जोन कच्छप ने कहा कि रोजगार के अभाव में गांव के लोग गलत सलत काम कर रहे है। इस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने ग्राम प्रधानों को मानदेय देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि उनके गांव में पत्थलगड़ी नही की गयी है।

पत्थलगड़ी के पीछे अफीम की खेती है मुख्य कारण : मुखिया

बिरहू पंचायत के मुखिया ने कहा कि मानव जीवन में जनम से मरन तक समस्या रहती है। लेकिन ऐसी कोई समस्या नहीं जिसे बातचीत से हल नहीं किया जा सकता है। उन्होंने पत्थलगड़ी के पीछे अफीम की खेती को मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन पत्थलगड़ी मुद्दे पर संवेदनशील के साथ काम कर रही है, यह सराहनीय है।

पश्चिमी सिंहभूम में भी होगी पत्थलगड़ी, पुलिस से कहा दूर रहे

खूंटी के बाद अब पश्चिमी सिंहभूम जिले के गांवों में पत्थलगड़ी होगी। बंदगांव बाजार परिसर में सोमवार को दो हजार से ज्यादा ग्रामीण जुटे। पत्थलगड़ी पर मानकी-मुंडा संघ के अंचल अध्यक्ष जोहन चांपिया की अध्यक्षता में आमसभा हुई, जिसमें पुलिस-प्रशासन को चेताया गया कि वह कोई हस्तक्षेप नहीं करे। साथ ही राज्यपाल को मांग पत्र सौंपने का भी निर्णय लिया गया।

जनसंवाद में खूंटी जिले के गांवों से शामिल हुए महिलाएं व पुरुष। जनसंवाद में खूंटी जिले के गांवों से शामिल हुए महिलाएं व पुरुष।
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पत्थलगड़ी मुद्दे पर खुली बहस में शामिल जिले के सभी वरीय पदाधिकारी।पत्थलगड़ी मुद्दे पर खुली बहस में शामिल जिले के सभी वरीय पदाधिकारी।
जनसंवाद में खूंटी जिले के गांवों से शामिल हुए महिलाएं व पुरुष।जनसंवाद में खूंटी जिले के गांवों से शामिल हुए महिलाएं व पुरुष।
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