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यहां के मगदा गौड़ कम्युनिटी में 6 रु. में होती है शादी, वह भी वरपक्ष की जिम्मेदारी

रिश्ता होने के बाद वोर-घोर देखा अनुष्ठान किया जाता है। अनुष्ठान के तहत कन्या पक्ष के 10-20 लोग वर पक्ष के घर पहुंचते हैं

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 08:54 AM IST

चाईबासा. एक ओर जहां आज बेटियों की शादी में पिता को दहेज के रूप में मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है, वहीं मगदा गौड़ समाज में मात्र 6 रुपए में शादी हो जाती है। यह 6 रुपए भी वर पक्ष को ही देना पड़ता है। शादी संपन्न कराने में पुरोहित को कम से कम 3 घंटे का समय लगता है। इस दिलचस्प वैवाहिक प्रथा को मगदा गौड़ समाज में पोण के नाम से जाना जाता है। ऐसे में समाज के लोग इसे संभवत: देश का सबसे सस्ता विवाह भी बताते हैं। विभिन्न गोत्र वाले इस समाज में शादी की पहल वर पक्ष के लोगों को ही करनी पड़ती है।


लड़के के साथ उनके दो-चार संबंधी लड़की के घर आते हैं। वहां कन्या पक्ष के लोग एक लोटा पानी के साथ वर पक्ष के लोगों का स्वागत करते हैं। जलपान के बाद अप्रत्यक्ष रूप से देहाती भाषा में मुहावरेदार शब्दों में सवाल पूछे जाते हैं। जवाब भी इसी अंदाज में दिए जाते हैं। अगले दिन सुबह दोनों पक्ष बैठक कर शादी तय करते हैं। शादी तय होने के बाद वर व कन्या पक्ष एक-दूसरे को अपने यहां आमंत्रित करते हैं।

वोर-घोर अनुष्ठान की परंपरा

रिश्ता तय होने के बाद वोर-घोर देखा अनुष्ठान किया जाता है। इस अनुष्ठान के तहत कन्या पक्ष के 10-20 लोग वर पक्ष के घर पहुंचते हैं। यहां पोण देने की रश्म अदा की जाती है। रस्म अदायगी के क्रम में ही वर पक्ष को कन्या पक्ष को थाली में रखकर एक रुपए के 6 सिक्के देने पड़ते हैं। इन छह सिक्कों को पांच से छह बार तक गिना जाता है। जब दोनों पक्ष संतुष्ट हो जाते हैं तब रिश्ता पक्का हो जाता है। मगदा गौड़ समाज में वर पक्ष द्वारा कन्या पक्ष को पोण के दिए गए 6 रुपए में से 3 रुपए लौटाने का भी रिवाज है। इस रिवाज को वाट पूजा के नाम से जाना जाता है।

ऐसे होती है शादी

शादी के लिए कन्या पक्ष के लोग वर पक्ष के घर पर पहुंचते हैं। इस क्रम में नजर दोष से बचने के लिए वर पक्ष को रास्ते में मुर्गे के बच्चे की बलि भी देनी पड़ती है। वहीं शादी के दौरान दूल्हे द्वारा दुल्हन को मुकुट पहनाया जाता है। पुरोहित के मंत्रोचारण के बीच वर-वधु को विवाह मंडप में सात फेरे लेने पड़ते हैं। इस दौरान दोनों पक्ष की ओर से मांगलिक जीवन के लिए गीत गाया जाता है। वहीं रात में विवाह संपन्न होने के बाद वर-वधु एक दूसरे को मूढ़ी व गुड़ से बने लड्‌डू खिलाकर जीवन पर्यंत साथ रहने का संकल्प लेते हैं।

वैवाहिक पद्धति पूरी तरह से पारंपरिक


समाज की वैवाहिक पद्धति अनोखी व पूरी तरह से पारंपरिक है। दूसरे समाज की तरह ही मगदा गौड़ समाज में विवाह जैसी पवित्र संस्कार का बड़ा महत्व है। दहेज जैसी अव्यवहारिक चीज का इस समाज में कोई जगह नहीं है। मगदा गौड़ समाज में दहेज या अन्य सामान लेने सामाजिक अपराध माना जाता है। कोल्हान में मगदा गौड़ समाज के लोगों की 4.5 लाख से भी ज्यादा आबादी है।