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BSF जवान थैले में लेकर अाया था शहीद की माटी, परिजनों ने लेने से कर दिया था इनकार

ट्रेजरी में रखी माटी का क्या होगा, बस इसी सवाल पर रुका परमवीर का शौर्यस्थल

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 08:00 AM IST

रांची/ गुमला. गुमला ट्रेजरी में रखी वह माटी परमवीर अलबर्ट एक्का के शौर्यस्थल का रोड़ा बन गई है, जिसे बीएसएफ के एक जवान ने थैले में भर कर लाया था। इस माटी को अपने पति का माटी मानने से वीरांगना बलमदीना ने इनकार कर दिया था। विधायक शिवशंकर उरांव चाहते हैं कि बलमदीना एक्का उसी माटी को अपने शहीद पति की माटी मानें, तो शौर्यस्थल बनवा दिया जाए। जबकि, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बलमदीना की भावना की कद्र करते हुए 2015 में ही एक टीम का गठन कर उसे अगरतला भेज दिया था। टीएसी सदस्य रतन तिर्की के नेतृत्व में गई नौ सदस्यीय टीम अगरतला के उस स्थान से माटी लेकर आई, जहां देश के जांबाज लांस नायक अलबर्ट एक्का को दफन किया गया था। टीम में शामिल बलमदीना शहीद पति की माटी को आंचल में समेट कर अगरतला से गांव ले गई। वह चाहती हैं कि शौर्यस्थल उसी माटी से बने, जिसे वह खुद लेकर आई थी।

कर्नल मल्लिक ने अपने आंगन में दफनाया था पार्थिव शरीर
रतन तिर्की ने कहा कि परमवीर अलबर्ट एक्का गंगासागर में शहीद हुए थे। उनके रेजिमेंट के कर्नल मल्लिक सभी शहीदों का पार्थिव शरीर अपने गांव अगरतला से पांच किलोमीटर दूर धुलिया ले गए थे। अपने घर के आंगन में ही एक्का का शव दफना दिया। इसकी गवाही गांव के लोगों ने दी।

उनकी माटी नहीं ली, इसी बात की सजा मिल रही
बलमदीना कहती हैं कि पति का शौर्यस्थल बन जाए, तो सुकुन से मर सकूंगी। उनके शहीद होने के करीब 45 साल के बाद माटी देखने को मिला, लेकिन उसे भी जबरन विवादों में घसीटा जा रहा है। मेरा शरीर भी अब थक चुका है। न जाने कब आंखें मूंद लूं। मैं चाहती हूं कि मरने से पहले अपने शहीद पति के शौर्यस्थल पर श्रद्धा के दो फूल चढ़ा लूं। रुआंसा होकर कहती हैं, मुझे शायद इस बात की सजा मिल रही है कि जो माटी वे लोग लाए थे, उसे लेने से मैंने इनकार कर दिया था।

तनख्वाह के पैसे से बनवाएंगे शौर्यस्थल

परमवीर के बेटे विंसेंट एक्का कहते हैं कि सरकार शौर्यस्थल नहीं बनवाएगी, तो मैं तनख्वाह के पैसे से शौर्यस्थल बनवाउंगा। हमलोगों को पता भी नहीं था, एकाएक माटी लेकर लाव-लश्कर के साथ कई लोग आए। उस माटी पर हमें भरोसा नहीं था। सीएम से कहा, तो हमें अगरतला भेजा।