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हाथ में बम लेकर पाक में घुस उड़ाए थे 3 बंकर, 40 साल बाद उनकी मिट्टी की ये है दास्तां

स्मारक समाधि-शौर्य स्थल बनाने की घोषणा के बाद की फिर बेअदबी।

Dainik Bhaskar

Jan 26, 2018, 08:13 AM IST
यहां रखी गई है 16 जनवरी 2016 को दोबारा लाई गई शहीद अलबर्ट एक्का की मिट्‌टी यहां रखी गई है 16 जनवरी 2016 को दोबारा लाई गई शहीद अलबर्ट एक्का की मिट्‌टी

रांची. रांची से करीब 160 किमी दूर गुमला जिले के जारी गांव में है परमवीर चक्र से सम्मानित लांस नायक अलबर्ट एक्का का गांव-घर। 3 दिसंबर 2015 को यहां सरकार ने स्मारक समाधि-शौर्य स्थल बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए अगरतला जाकर अलबर्ट एक्का की समाधि से मिट्टी भी लाई गई। सीएम समेत अन्य वीआईपी की उपस्थिति में भव्य कार्यक्रम हुआ और अलबर्ट एक्का के घर के बगल में ही स्मारक समाधि-शौर्य स्थल बनाने के लिए शिलान्यास किया गया। मगर ये सब दिखावा साबित हुआ। दो साल में इसमें एक ईंट भी नहीं जोड़ी गई।

ऐसे हुए थे शहीद

- सन् 1971 में पाक के नापाक इरादों ने एकाएक जंग की शक्ल अख्तियार की। घमासान युद्ध छिड़ गया। मशीन गनों और तोपों की गड़गड़ाहट से धरती का हृदय कांप उठा। सेना के जवान शत्रुओं पर टूट पड़े। अल्बर्ट एक्का (नंबर 22397461/एन.के.) पूर्वी अग्रभाग में गंगा सागर के पास 14 गार्डस के बाईं ओर पूरे जोशो खरोश के साथ दुश्मनों को रौंदते हुए आगे बढ़ रहे थे। उधर, दुश्मन भी अपनी पूरी शक्ति लगा चुका था। शत्रुओं की गोलियों की निरंतर हो रही बारिश की परवाह न करते हुए अल्बर्ट अपने दल बल के साथ आगे बढ़ते चले गए।

एक के बाद एक बंकरों को तबाह करते हुए वे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते गए
अंत में हाथापाई एवं राइफल के बायनेट का इस्तेमाल करने की नौबत आ गई। अचानक अल्बर्ट की निगाह दुश्मनों के एक लाइट मशीनगन की ओर गई। जो भारतीय सैन्य दल को काफी क्षति पहुंचा रहा था। साथ ही भारतीय सैन्य दल दुश्मन द्वारा बुरी तरह से घिरा हुआ था। अल्बर्ट एक्का ने दुश्मनों के बंकर पर एकाएक आक्रमण कर दिया। दो पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारकर दुश्मनों के दो लाइट मशीनगनों का मुंह बराबर के लिए बंद कर दिया। इस दौरान अल्बर्ट भी गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। फिर भी एक के बाद एक बंकरों को तबाह करते हुए वे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते गए।

दो मंजिला मकान से लगातार हो रही थी फायरिंग
-इनके लक्ष्य के उत्तरी छोर पर पाक शत्रु दल द्वारा एक दो मंजिला मकान से एक लाइट मशीनगन से लगातार धुंआधार गोलियों की बौछार हो रही थी, लेकिन वो धीरे-धीरे रेंगते हुए दुश्मन के उक्त दो मंजिले मकान तक पहुंचकर एका-एक उक्त बंकर के एक छेद से दुश्मनों पर एक हैंड ग्रेनेड फेंक दिया। हैंड ग्रेनेड फटते ही दुश्मनों के बंकर के अंदर खलबली मच गई। इसमें दुश्मन के कई सैनिक मारे गए। पर उक्त लाइट मशीनगन चलती ही रही ।जिससे भारतीय सैन्य दल को खतरा बना रहा। अल्बर्ट उक्त बंकर में घुसकर दुश्मन के पास पहुंचे और अपने बंदूक के बायनेट से वार कर दुश्मन सैनिक को मौत के घाट उतार दिया। इससे दुश्मन एवं उसके लाइट मशीनगन की आवाज एक साथ बंद हो गई। मगर इस दौरान गंभीर रूप से घायल होने के कारण कुछ ही पलों में अल्बर्ट एक्का शहीद हो गए।

माटी की फिर बेअदबी

अलबर्ट एक्का के घर के बगल में ही स्मारक समाधि-शौर्य स्थल बनाने की घोषणा के बाद सरकार के स्तर से न तो इस योजना के लिए फंड आवंटित हुआ और न ही विधायक शिवशंकर उरांव द्वारा शहीद स्मारक निर्माण की अनुशंसा जिला प्रशासन से की गई है। जबकि विधायक फंड से ही स्मारक बनना है। अब विधायक कहते हैं कि जिला प्रशासन को बजट बनाने को कहा गया है। वहीं दूसरी ओर डीसी श्रवण साय ने कहा कि शायद कोई प्रस्ताव स्टेट में गया है। मतलब साफ है कि स्मारक समाधि बनाने की घोषणा बिना प्रस्ताव तैयार किए ही आनन-फानन में कर दी गई थी। अब हालत यह है कि प्रस्तावित स्मारक समाधि पर मवेशी गंदगी फैला रहे हैं।

बलमदीना एक्का बोलीं

परमवीर की पत्नी बलमदीना कहती हैं कि-कहलैं जुन सरकार की बनवाए देब, लेकिन पता नहीं बनवाए ना की नी बनवाए उकर पता नहीं। छवा तो कहत रहे नी बनाबैं तो मोंय ही बनाबो।
(सरकार ने कहा था कि बनवा देेंगे, लेकिन पता नहीं बनाएगी भी या नहीं। बेटे ने कहा है सरकार नहीं बनाएगी, तो मैं बनाऊंगा।)

सम्मान में बटालियन का नाम ही अलबर्ट एक्का के नाम पर

अलबर्ट एक्का जिस बटालियन में थे, उसका नाम 14वीं बटालियन ऑफ द गार्ड्स था। भारत सरकार ने परमवीर के सम्मान में बटालियन का नाम अलबर्ट एक्का पीवीसी बटालियन रख दिया। बटालियन की स्थापना 13 जनवरी 1968 को हुई थी। गोल्डन जुबली कार्यक्रम कानपुर में 11-14 जनवरी को हुआ।

उस बटालियन के प्रोग्राम के लिए अनुदान भी न दे सके

बटालियन ने अगस्त 2017 में ही झारखंड सरकार से गोल्डन जुबली कार्यक्रम के लिए 10 लाख रुपए अनुदान मांगा था। 10 जनवरी को सरकार ने 10 लाख मंजूर किया। लेकिन राशि अभी तक नहीं दी, जबकि कार्यक्रम खत्म हो चुका है। निदेशालय के निदेशक ब्रिगेडियर बीजी पाठक ने बताया कि कुछ औपचारिकताएं बाकी हैं।

सीएम जब मिट्‌टी लेकर गए, तो उनकी पत्नी ने इनकार कर दिया, इस परिस्थिति से काम रुका

विधायक शिवशंकर उरांव के मुताबिक, सीएम जब मिट्टी देने गए थे तो उनकी पत्नी ने लेने से इनकार कर दिया। उस परिस्थिति में मामला रुक गया। जहां शिलापट लगा है वहीं स्मारक बनाना तय हुआ था। मिट्टी का कलश जिला प्रशासन के पास ही है। जिला प्रशासन को बजट बनाने कहा गया है। इसके बाद राशि हम अपने फंड से देंगे।

गुमला डीडीसी्र नागेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि गुमला विधायक ने नहीं की है स्मारक की अनुशंसा : सरकार के स्तर से कोई निर्देश नहीं मिला है और न ही इस योजना के लिए फंड आवंटित हुआ। स्थानीय विधायक द्वारा भी शहीद स्मारक निर्माण के लिए अनुशंसा जिला प्रशासन से नहीं की गई है। -

परमवीर की पत्नी बलमदीना। परमवीर की पत्नी बलमदीना।
परमवीर चक्र से सम्मानित लांस नायक अलबर्ट एक्का। परमवीर चक्र से सम्मानित लांस नायक अलबर्ट एक्का।
परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर मार्ल्यापण करतीं उनकी पत्नी बलमदीना एक्का। परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर मार्ल्यापण करतीं उनकी पत्नी बलमदीना एक्का।
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यहां रखी गई है 16 जनवरी 2016 को दोबारा लाई गई शहीद अलबर्ट एक्का की मिट्‌टीयहां रखी गई है 16 जनवरी 2016 को दोबारा लाई गई शहीद अलबर्ट एक्का की मिट्‌टी
परमवीर की पत्नी बलमदीना।परमवीर की पत्नी बलमदीना।
परमवीर चक्र से सम्मानित लांस नायक अलबर्ट एक्का।परमवीर चक्र से सम्मानित लांस नायक अलबर्ट एक्का।
परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर मार्ल्यापण करतीं उनकी पत्नी बलमदीना एक्का।परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा पर मार्ल्यापण करतीं उनकी पत्नी बलमदीना एक्का।
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