रांची

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​बंद लाइन पर हर दिन 3 पैसेंजर्स के लिए चल रही है ये ट्रेन, कमाई सिर्फ 40 से 60 रुपए

इस ट्रेन को चलाने रेलवे को हर महीने बतौर सैलरी 2.50 लाख रुपए देने पड़ रहे हैं।

Danik Bhaskar

Jan 16, 2018, 08:17 AM IST
यही है कुसुंडा मेमू ट्रेन जिसक यही है कुसुंडा मेमू ट्रेन जिसक

धनबाद. 8 बोगी...। हर बोगी खाली...। न सवारी और न ही कोई सामान...। पूरे सफर में सिर्फ एक ही आवाज सुनाई पड़ती है... झन-झन-झन (खाली बोगियों की आवाज)। देश की सबसे छोटी दूरी की ट्रेन कुसुंडा मेमू सवारी को बंद धनबाद-चंद्रपुरा रेलवे लाइन पर बिना सवारी दौड़ रही है। 10 नवंबर 2017 को इस ट्रेन का परिचालन धनबाद से कुसुंडा के बीच शुरू हुआ था। तब से अब तक इस ट्रेन को मात्र 257 यात्री मिले। आय के हिसाब से देखें तो हर दिन औसत इस ट्रेन ने करीब 40 से 60 रुपए कमाएं। जबकि इस ट्रेन को चलाने का खर्च देखें तो सिर्फ वेतन मद में ही रेलवे को हर माह 2.50 लाख रुपए देने पड़ रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इतना नुकसान झेल कर भी रेलवे इस ट्रेन को चला क्यों रही है?

बंद रेल लाइन पर बिना सवारी क्यों दौड़ रही ट्रेन?

पहला कारण : जिंदाबाद रहे नेतागीरी - 15 जून 2017... धनबाद-चंद्रपुरा रेलवे लाइन को बंद कर दिया गया। कहा गया कि जमीनी आग और भू-धंसान के खतरे ने रेलवे रेलवे पर परिचालन को खतरनाक बना दिया है। एक झटके में शहर से 19 जोड़ी ट्रेनें छीन गई। जनता आक्रोश सत्ता पक्ष भाजपा के खिलाफ भड़का। क्षेत्र के सांसद और विधायक रेल मंत्री से मिले तो कभी कोयला मंत्री से...। इन्होंने रेलवे बोर्ड से मिलकर तय किया कि कुछ ट्रेनें चला दी जाए।

दूसरा कारण : शुरू हो सके कोयले की ढुलाई -धनबाद-चंद्रपुरा रेलवे लाइन के बंद होते जनता ने ऐलान किया... जब रेलवे लाइन असुरक्षित है तो इस पर कोयला ढुलाई भी नहीं होने देंगे। पहले ट्रेन चलाओ, तब मालगाड़ी। जनता के इस आक्रोश ने बीसीसीएल के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी। सोनारडीह और कुसुंडा में कोयला साइडिंग बनाने के सपने पर पानी फिरता दिखा। एकबार फिर योजना को नया रूप दिया गया।

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