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झारखंड राज्यसभा चुनाव में एक दूसरे की कमजोर कड़ी पर एनडीए और यूपीए की नजर

भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार सोंथालिया मूलरूप से राजधनवार के हैं जहां से माले विधायक राजकुमार यादव हैं।

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2018, 02:48 AM IST
NDA and UPA strategy in Jharkhand Rajya Sabha elections

रांची. झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए तीन प्रत्याशियों के मैदान में कूदने के साथ ही जीत के लिए साम, दाम, दंड भेद की कोशिशें शुरू हो गई हैं। यूपीए और एनडीए के नेता एक-दूसरे के घर में सेंधमारी की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। भाजपा अपने दूसरे प्रत्याशी प्रदीप कुमार सोंथालिया तो कांग्रेस-झामुमो अपने उम्मीदवार धीरज प्रसाद साहू की जीत सुनिश्चित करने के लिए एक-दूसरे की कमजोर कड़ी को टटोल रहे हैं।

यूपीए के आठ और एनडीए के तीन विधायकों को सॉफ्ट टार्गेट माना जा रहा है। अपने-अपने दलों से नाराज और अगले विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने की संभावना वाले विधायकों पर दूसरे दल की नजर टिकी है। कुछ ऐसे भी विधायक हैं जो विभिन्न मुकदमों में फंसे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सत्ता पक्ष के साथ जाने पर उनकी परेशानी कम हो सकती हैं।

सोंथालिया की माले व मासस से फायदा उठा सकते हैं

भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार सोंथालिया मूलरूप से राजधनवार के हैं जहां से माले विधायक राजकुमार यादव हैं। मासस विधायक अरूप चटर्जी का राजनीतिक क्षेत्र धनबाद है, जो संथोलिया का कार्य क्षेत्र है। इन दोनों से अपने संबंधों का फायदा उठाने की कोशिश संथोलिया करेंगे। आजसू और झाविमो के साथ भी उनके पुराने रिश्ते रहे हैं। पांकी से कांग्रेस विधायक देवेंद्र सिंह उर्फ बिट्टू सिंह, लोहरदगा से विधायक सुखदेव भगत, बरही से विधायक मनोज यादव पर भी एनडीए की नजर है। एनडीए झामुमो विधायक दशरथ गगराई और शशिभूषण सामद को भी साधने की तैयारी में जुटी है।

यूपीए की नजर एनडीए की कमजोर कड़ी पर

यूपीए की भी एनडीए की कमजोर कड़ी पर नजर है। खतरे के संकेत एनडीए में भी मिल रहे हैं। राज्यसभा के लिए नामांकन के दिन विधायक सह प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ताला मरांडी गायब रहे। वह भाजपा के किसी प्रत्याशी के प्रस्तावक नहीं बने। भाजपा विधायकों में झाविमो से आनेवाले गणेश गंझू भी उस दिन नहीं आए।

दो तरह से विधायक कर सकते हैं गेम चेंजर का काम

विधायक दो तरह से गेम चेंजर का काम कर सकते हैं। पहला क्रास वोटिंग कर और दूसरा मतदान से अलग रह कर। क्रास वोटिंग के बाद मत अवैध नहीं हो, इसके लिए उन्हें पार्टी के चुनाव एजेंट को विश्वास में लेना होगा। अन्यथा नियम के अनुसार अगर कोई विधायक अपने पार्टी एजेंट को मतपत्र नहीं दिखाता है तो एजेंट इसकी शिकायत रिटर्निंग अफसर को कर सकता है। उस आधार पर निर्वाचन आयोग की स्वीकृति लेकर उस विधायक का मत पत्र अवैध घोषित हो सकता है। लेकिन निर्दलीयों के मामले में यह फार्मूला लागू नहीं होता है

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