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शहादत के कई साल बाद लाई गई थी शहीद की मिट्टी, इस काम में खर्च हुए थे 10 लाख

अगरतला से परमवीर के गांव तक लाव-लश्कर और सजावट में 5 लाख से ज्यादा खर्च।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 28, 2018, 08:46 AM IST

शहादत के कई साल बाद लाई गई थी शहीद की मिट्टी, इस काम में खर्च हुए थे 10 लाख

रांची.परमवीर अलबर्ट एक्का की माटी को अगरतला से गुमला के जारी गांव तक लाने की शौर्यगाथा में वर्ष 2015-16 में सरकार, सेना और विभिन्न संगठनों ने मिलकर करीब 10 लाख रुपए से अधिक खर्च कर दिए। अगर इतना ही रुपया स्मारक पर खर्च कर देते तो अब तक जारी गांव में अलबर्ट एक्का का शौर्यस्थल बन जाता। मगर शहीद की माटी लाने के बाद सब किनारे हो गए। खासकर स्थानीय विधायक शिवशंकर उरांव और गुमला का स्थानीय प्रशासन। सबने हाथ खींच लिए। यही वजह है कि दो साल बाद भी शौर्य स्थल में एक ईंट तक नहीं जोड़ी जा सकी।

आयोजन बस दिखावा बनकर रह गया

दरअसल, अगरतला स्थित परमवीर के समाधि स्थल से माटी लाने के लिए गए रांची से गए 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के जाने-आने में सरकार ने करीब पांच लाख रुपए खर्च किए। फिर अगरतला से लेकर परमवीर के गांव तक वाहनों का लाव-लश्कर और सजावट में सेना और अन्य समाजसेवी संगठनों ने पांच लाख से ज्यादा खर्च किए। लेकिन आयोजन बस दिखावा बनकर रह गया। क्योंकि, परमवीर अलबर्ट एक्का की विधवा बलमदीना को आज भी अपने बहादुर पति के शौर्यस्थल के निर्माण का इंतजार है।

जो आता है,बस आश्वासन दे जाता है, करता कोई कुछ नहीं

जिस तरह परमवीर अलबर्ट एक्का के शौर्यस्थल को जिम्मेदार बनाना भूल गए, उसी तरह उनके पैतृक आवास की जर्जर स्थिति पर भी ध्यान नहीं दे रहे। परमवीर के घर की चहारदीवारी टूट रही है। आज तक आंगन पक्का नहीं हो पाया। करीब 20 साल पहले सीसीएल की ओर से दो कमरे बनाए गए थे, मगर उनकी हालत भी जर्जर हो गई है। बलमदीना एक्का कई बार अफसरों से घर और चहारदीवारी बनाने के लिए कह चुकी है। सब आश्वासन देते हैं, पर कोई कुछ नहीं करता। बलमदीना कहती हैं कि सिर्फ खास मौके पर ही अधिकारी गांव की तरफ आते हैं और वापस जाकर भूल जाते हैं।

परमवीर एक्का पर सवालों से भागते रहे विधायक

अलबर्ट एक्का की जन्मस्थली जारी गांव में मुख्यमंत्री से शौर्य स्थल निर्माण का शिलान्यास कराने के बाद गुमला विधायक शिवशंकर उरांव की ओर से कोई पहल नहीं की गई। शनिवार को भी वह सवालों से भागते रहे। उनसे बात करने के लिए करीब एक दर्जन कॉल किए गए, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उनके घर पर भी जानकारी दी गई कि वह वहां नहीं है। डीडीसी नागेन्द्र कुमार सिन्हा ने बताया कि शनिवार को भी परमवीर एक्का के शौर्यस्थल को लेकर किसी ने कोई पहल नहीं की। विधायक की ओर से भी कोई प्रस्ताव नहीं आया।

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Web Title: shhaadt ke kee saal baad laaee gayi thi Shahid ki mitti, is kam mein khrch hue the 10 laakh
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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