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ITI रूड़की ने तैयार किया सैटेलाइट मैप, 40 साल बाद रांची में बनेगा नया खतियान

दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल में 1978 में शुरू हुआ था जमीन का सर्वे, अब तक सिर्फ लोहरदगा जिले का ही बन पाया है खतियान।

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 07:18 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

रांची. दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडल के रांची, गुमला, खूंटी और सिमडेगा के 875 गांवों की जमीन का नया खतियान बनेगा। इसके लिए भू-राजस्व विभाग ने आईआईटी रूड़की को सैटेलाइट रेडी मैपिंग का काम दिया है। इनमें से 524 गांवों की जमीन की सैटेलाइट मैपिंग का काम पूरा कर लिया गया है। आईआईटी रूड़की द्वारा तैयार मोबाइल एप से मैपिंग का वेरिफिकेशन भी हो गया है। शेष गांवों की जमीन की मैपिंग का काम भी जल्दी ही शुरू होगा।
मार्च से जीआईएस रेडी मैप के आधार पर गांवों में कैंप लगाकर जमीन की जांच की जाएगी। मोबाइल एप से जमीन का सेंट्रल प्वाइंट तय करके सैटेलाइट मैप से जमीन की चौहद्दी का मिलान होगा। बंदोबस्त कार्यालय की टीम अमीन के साथ हर प्लॉट पर जाएगी और जमीन की मापी करेगी। जमीन पर जिसका दखल-कब्जा है, उसकी जमीन के कागजात की जांच होगी। वंशावली तैयार कर जमीन का रेकर्ड बनेगा। इसके बाद खतियान लेखन और नक्शा बनाया जाएगा। 1932 के खतियान के आधार पर ही नया खतियान बनाया जाएगा। इससे जमीन विवाद में 80% तक कमी आने की उम्मीद है।

डिजिटल इंडिया के तहत बन रहा लैंड रिकॉर्ड

दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के पांच जिलों रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला और लोहरदगा में 1978 में जमीन का सर्वे शुरू हुआ था। 40 साल में सिर्फ लोहरदगा जिले की जमीन का खतियान तैयार हुआ। सिमडेगा में 287, खूंटी में 551, रांची के नामकुम, नगड़ी, कांके, ओरमांझी, रातू, बुढ़मू और खलारी के 37 गांवों और गुमला में जमीन का सर्वे नहीं हुआ। इसके बाद केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मोटेलाइजेशन प्रोग्राम के तहत आईआईटी रूड़की को जीआईएस बेस्ड मैपिंग का काम दिया गया।

नया खतियान बनने से हमें होगा ये फायदा

- जीआईएस रेडी मैप बनने से अगले 100 साल तक जमीन का सर्वे कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जब जमीन की बिक्री और म्युटेशन होगा, पंजी-टू के साथ खतियान में भी बेची गई जमीन घट जाएगी। नक्शा भी अलग कटेगा। इससे एक ही जमीन की बार-बार होने वाली बिक्री पर रोक लगेगी।
- जमीन पर जिसका दखल-कब्जा है, उसके नाम रेवेन्यू रेकर्ड तैयार होगा। आदिवासी या कमजोर तबके कीे जमीन पर अगर माफिया का कब्जा है तो उसे अपने वंशज का कागजात देना होगा। इससे विवाद रुकेगा।

खतियान बनने के बाद सभी अंचल कार्यालयों की जमीन का रेकर्ड बदलेगा। नया पंजी-टू तैयार होगा। पहले पंजी-टू में छेड़छाड़ कर जो गड़बड़ियां हुई हैं, वह दूर होगा। जमीन मालिक के स्वामित्व का निर्धारण होने से पारिवारिक विवाद भी खत्म होगा।

- हजारों आदिवासी परिवारों के पास पुराना खतियान नहीं है, लेकिन वे खेती-बाड़ी कर रहे हैं। ऐसे लोगों को स्वामित्व का कागजात मिलेगा। जमीन के लिए होने वाले अपराध घटेंगे।

कैंप लगाकर हर प्लॉट की होगी मापी

बंदोबस्त कार्यालय की टीम गांवों में कैंप लगाकर सर्वे शुरू करेगी। वहां के मुखिया, सरपंच, वार्ड पार्षद और सीओ को भी सूचना दी जाएगी। अमीन जमीन की मापी करेंगे और कब्जाधारी द्वारा पेश किए जाने वाले कागजात से प्लाॅट का मिलान होगा। जमीन पर विवाद होने की स्थिति में कब्जाधारी को कानूनी दस्तावेज भी देना होगा। जमीन मापी और कागजात से मिलान के बाद अमीन नक्शा तैयार करेगा। प्रारूप प्रकाशन, दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद रेकर्ड तैयार होगा।

जीआईएस रेडी मैप तैयार

आईआईटी रूड़की सर्वे कर रही है। कई गांवों का जीआईएस रेडी मैप तैयार हो गया है। अब सैटेलाइट मैप से उसका मिलान होगा। दखल-कब्जा के आधार पर कागजात की जांच के बाद ड्राफ्ट का प्रकाशन होगा। -सीके मंडल, बंदोबस्त पदाधिकारी, रांची