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साथ हादसे में गंवाई जान और साथ ही जलीं चिताएं, 226 घरों में नहीं जले चूल्हे

मृतकों के अंतिम दर्शन के लिए आसपास के गांवों के लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 08:51 AM IST
nine dead bodied funeral togeather

गुमला(झारखंड). हादसे में 13 लोगों की मौत से आहत जतरगड़ी के 226 घरों में सोमवार को चूल्हे नहीं जले। घटना की रात घरों में बना भोजन पड़ा रहा। किसी ने कुछ नहीं खाया। गांव की अधिकांश महिलाएं और पुरुषों ने अपने-अपने घरों के बाहर बैठकर रात बिताई। -रांची-गुमला एनएच-43 पर पारस नदी पुल के समीप रविवार रात करीब पौने नौ बजे अवैध बालू लदे तेज रफ्तार ट्रक और ऑटो में टक्कर से ये हादसा हुआ था।

एक ही खानदान के आठ घरों की चौखट पर चिता की कतार

- सुबह से गांव में सन्नाटा पसरा था, लेकिन दोपहर बाद करीब 3.30 बजे जैसे हुए एंबुलेंस से एक साथ 11 शव पहुंचे तो चीत्कार मच गया। परिजन शवों से लिपट कर रोने लगे।

- मृतकों के अंतिम दर्शन के लिए जतरगड़ी समेत आसपास के गांवों के लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि खुशियों में शामिल होकर लौटने के दौरान हादसे ने एक ही खानदान के आठ घरों की चौखट पर चिता की कतार लगा दी है।

रोते हुए दिव्यांग बोला- अब मुझे खाना कौन खिलाएगा मां

घटना के बाद सबसे बुरा हाल दुर्घटना में मृत गागो देवी के विकलांग पुत्र परमेश्वर गोप का था। वह बार-बार मुझे अब कौन खाना खिलाएगा मां... कहते हुए बेसुध हो जा रहा था। उसके चेहरे पर पानी का छिंटा मार कर होश में लाया जा रहा था। लगभगी यही हाल अन्य परिवार के लोगों का भी था।

- हादसे में मारे गए लोगों के 9 शवों रोहित उरांव, मुन्नी देवी, उसका नाती राहुल गोप, जानकी देवी, लोदरों देवी, उसका नाती अमन महतो, गांगो देवी, ऑटो चालक कृष्णा महतो, रूपन देवी का एक साथ रात 7.30 बजे अंतिम संस्कार किया गया। जबकि, रोहित उरांव को दफनाया गया।

- वहीं सतमी देवी और उसकी बेटी सरस्वती कुमारी का करौंदाजोर गांव (बसिया) में अंतिम संस्कार किया गया। सुमित्रा देवी और उसके बेटे अक्षय गोप का अंतिम संस्कार बसिया के टंगरजरिया गांव में हुआ।

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