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चारा घोटाले में राजबाला को भी माना जिम्मेदार, 30 रिमाइंडर...पर जवाब नहीं

अमरेंद्र कुमार | Last Modified - Dec 30, 2017, 09:09 AM IST

फरवरी में है मुख्य सचिव राजबाला वर्मा का रिटायरमेंट, इसके बाद चार साल से पुराने मामले पर विभागीय कार्यवाही नहीं हो सकती।
चारा घोटाले में राजबाला को भी माना जिम्मेदार, 30 रिमाइंडर...पर जवाब नहीं

रांची. सीबीआई ने चारा घोटाले के चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी मामले में राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को मिस कंडक्ट और लापरवाही का जिम्मेदार माना है। मामला 30 अप्रैल 1990 से 30 दिसंबर 1991 के बीच का है, जब राजबाला चाईबासा डीसी थीं। सीबीआई जांच में सामने आया था कि उन्हाेंने न तो ट्रेजरी का निरीक्षण किया, न ही मंथली एकाउंट्स एजी को भेजे। कुछ एकाउंट्स भेजे भी, लेकिन उनपर जूनियर अफसरों के हस्ताक्षर थे। फिर 1998 में सीबीआई ने इनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही चलाने की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी थी। तब अविभाजित बिहार था।
तत्कालीन मुख्य सचिव को सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट और केस फाइंडिंग्स देते हुए कहा था कि सरकार राजबाला पर मेजर पनिशमेंट की कार्यवाही चलाए। लेकिन अब तक सीबीआई के उस निर्देश पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। राज्य सरकार ने कार्रवाई के नाम पर उनसे प्रतिक्रिया मांगी। इसके लिए 30 से अधिक रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। फिर भी सीएस ने अब तक अपना जवाब नहीं दिया। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने ढाई माह पहले भी राज्य से इस मामले में रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने राजबाला वर्मा से फिर प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन उन्होंने अपना स्पष्टीकरण नहीं दिया।

न तो ट्रेजरी का निरीक्षण किया, न ही मंथली एकाउंट्स एजी को भेजा, जो भेजे भी उन पर थे जूनियर अफसरों के हस्ताक्षर
सीबीआई की जांच में पता चला कि राजबाला वर्मा जब पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में डीसी थीं, तो इन्होंने उस दौरान न तो ट्रेजरी का निरीक्षण किया। न ही ट्रेजरी से हुए भुगतान का मासिक लेखा महालेखाकार (एजी) को भेजा। मंथली एकाउंट‌्स डीसी द्वारा एजी को भेजना था, लेकिन कुछ एकाउंट‌्स अपने अधीनस्थ अफसरों से हस्ताक्षर कराकर एजी को भेजती थीं। वह भी काफी विलंब से। सीबीआई को ऐसे कई मामले मिले। सीबीआई रिपोर्ट में ट्रेजरी के कार्यकलापों पर यथोचित निगरानी नहीं करने का भी आरोप है। कहा गया है कि निगरानी नहीं करने के फलस्वरूप भी चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी हो सकी थी।

सीबीआई ने राजबाला को आरोपियों की दूसरी कैटेगरी रखा था

पहली कैटेगरी : वह आरोपी जिनके खिलाफ घोटाला करने के सबूत मिले। अवैध रूप से घोटालबाजों की मदद करने वाले और रिश्वत लेने वाले। ऐसे आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज किया ।

दूसरी कैटेगरी: वैसे आरोपी जिन पर लापरवाही व मिसकंडक्ट के सबूत मिले। उनके खिलाफ सीबीआई ने राज्य सरकार को मेजर पनिशमेंट देने के लिए विभागीय कार्यावाही चलाने को दायित्व सौंपा।

बिहार में सीबीआई की ऐसी ही रिपोर्ट पर 3 अफसरों पर हुई है कार्यवाही
बिहार में सीबीआई की ऐसी ही रिपोर्ट पर कार्रवाई हो गई है। आईएएस अंजनी कुमार, गोरे लाल यादव और एस. विजयराघवन पर विभागीय कार्यवाही चल चुकी है। राजबाला वर्मा 28 फरवरी 2018 को रिटायर होंगी। वहीं, राज्य सरकार भी 15 दिनों की समय सीमा तय रहने के बाद भी 14 वर्षों से केवल रिमाइंडर भेजकर औपचारिकता पूरी कर रही है। नियम है कि रिटायरमेंट के बाद चार वर्ष से पुराने मामले पर विभागीय कार्यवाही नहीं चल सकती है।

भास्कर ने इस खबर पर सीएस का पक्ष जानने के लिए 6 दिनों में उनके नंबर (9431100090) पर 11 बार फोन किया। उन्होंने एक बार भी फोन रिसीव नहीं किया। इस नंबर पर मैसेज और वाट्सएप भी भेजा पर उन्होंने जवाब नहीं दिया। 29 दिसंबर को रिपोर्टर उनके ऑफिस में उनसे मिलने गए। लेकिन वह नहीं मिलीं।

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Web Title: Charaa ghotaale mein raajbaalaa ko bhi maanaa jimmedaar, 30 rimaaindar...par jawab nahi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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