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रिम्स में हड़ताल पर गईं नर्सें, महिला गार्डों ने संभाला मोर्चा, कहा- जो होगा करेंगे

रिम्स के करीब 353 जूनियर नर्सों ने रिम्स प्रबंधन के सामने अपनी कई मांगें रखी हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 12, 2018, 07:44 AM IST

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    रांची.रिम्स में काम कर रहीं 353 नर्सें रविवार आधी रात के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गईं। नर्सों के हड़ताल पर जाने के बाद कुछ महिला गार्डों ने उनके काम को अपने हाथों में ले लिया। महिला गार्डों ने कहा कि नर्सों का काम नहीं आता, लेकिन जो मरीजों के लिए कर सकते हैं, उसमें परहेज कैसा?

    बता दें कि सरकार की आेर से हड़ताल को रोकने के लिए रविवार को दिन भर प्रयास हुआ, लेकिन जूनियर नर्सेज एसोसिएशन ने कहा कि जब तक हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, हड़ताल रोकना नामुकिन है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की तैयारी शुरू हुई। रिम्स प्रबंधन ने नौ फरवरी को ही सरकार से 150 नर्सों की मांग की थी। लेकिन, नर्स की व्यवस्था नहीं हुई। रविवार को कुछ नर्स पहुंचीं, लेकिन उन्होंने भी हड़ताल का समर्थन कर दी। इसके बाद विरोध दबाने के लिए रिम्स में 200 फोर्स भर दिए गए। इससे मरीज और उनके परिजन परेशान हो गए। इधर, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सुधीर त्रिपाठी खुद रिम्स आकर विभागाध्यक्षों और सीनियर नर्सों के साथ बैठक की। तैयारियों का जायजा लिया।

    लेखा पदाधिकारी की नियुक्ति अवैध

    जूनियर नर्सेंज एसोसिएशन की अध्यक्ष राम रेखा राय ने कहा कि रिम्स में डॉक्टरों की हर मांग नियम तोड़ कर पूरी की जाती है। पिछले दिनों डॉक्टरों को प्रोन्नति दी गई, जिसमें रिम्स नियमावली का ही उल्लंघन किया गया। राय ने कहा कि लेखा पदाधिकारी की नियुक्ति अवैध रूप से की गई है। उन्हें अवैध रूप से वेतन भुगतान किया जा रहा है। जो डॉक्टर पढ़ाते नहीं हैं, उन्हें पढ़ाने का भत्ता मिलता है। जो रिम्स के डॉक्टर नहीं थे, उनके परिवार को अनुकंपा पर नियुक्त मिलती है। कई नर्स काम के दौरान मर गई। कई को इलाज का खर्च आज तक नहीं दिया गया। कोर्ट के आदेश के बाद भी आठ नर्सों को नियुक्ति पत्र देने में डायरेक्टर आनाकानी कर रहे हैं। यदि रिम्स डॉक्टरों से ही चलता है तो चलाएं, नर्सां मांगें पूरी होने तक हड़ताल पर रहेंगी।

    छावनी में बदल गया रिम्स परिसर

    हड़ताल को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर रिम्स में करीब 200 फोर्स की तैनाती की गई है। रविवार शाम दर्जनों महिला-पुरुष बल ने रिम्स परिसर में फ्लैग मार्च किया। पुलिस कर्मियों को देखकर परिजनों में भी भय का माहौल था। मरीज और परिजनों ने कहा कि सरकार इलाज के लिए नर्सों को तैनात करने की बजाए फोर्स भर दी।

    हड़ताल का असर ऐसे समझें

    - 1427 मरीज अभी रिम्स के विभिन्न वार्डों में भर्ती हैं

    - 437 नर्स इन मरीजों की देखभाल कर रहीं थीं

    - 353 नर्स हड़ताल पर चलीं गईं

    - 84 नर्स अब 1427 मरीजों की देखभाल करेंगी, जिनमें 34 आउटसोर्स, आठ अनुबंध (रिटायर) और 42 सीनियर नर्सें शामिल हैं। रिम्स प्रबंधन ने सभी वार्डों में नर्सिंग छात्राओं को तैनात कर दिया है।

    दो दर्जन मरीजों ने छोड़ा रिम्स

    नर्सों के आंदोलन को देखते हुए रविवार को लगभग दो दर्जन मरीजों ने रिम्स छोड़ दिया। हालांकि, रविवार को अवकाश का दिन था। बावजूद, कई मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। कुछ मरीज के परिजनों का कहना था कि सोमवार से यहां नर्सों का आंदोलन है। ऐसे में रिम्स में इलाज की व्यवस्था क्या होगी, कुछ कहा नहीं जा सकता है।

    लेकिन एक भी नर्स नहीं आई

    सचिव सुधीर त्रिपाठी ने कहा था कि मरीजों को किसी प्रकार की परेशान न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नर्सें मंगाई गईं हैं। लेकिन, देर शाम तक जिला से एक भी नर्स रिम्स नहीं पहुंची थीं। रांची में कार्यरत एएनएम/जीएनएम ने भी आंदोलनकारी नर्सों का समर्थन कर दिया।

    क्या हैं प्रमुख मांगें

    - रिम्स नर्सों की मुख्य मांगों में एम्स की तर्ज पर वेतनमान देना
    - रिम्स में नर्सों के रिक्त पदों को भरना
    - सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 65 करना
    - अनुकंपा के आधार पर नौकरी
    - नवनियुक्त नर्सों को सरकार के कर्मी के अनुरूप व्यय का लाभ दिया जाना

    क्या है पूरा मामला

    रिम्स के करीब 353 जूनियर नर्सों ने रिम्स प्रबंधन के सामने अपनी कई मांगें रखी हैं। नर्सों ने 31 दिसंबर से ही हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी। लेकिन, आठ फरवरी को रिम्स की जीबी की बैठक में मांगों पर निर्णय नहीं होने पर इसी दिन हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी। 9 फरवरी को काला बिल्ला लगाकर विरोध किया। 10 को पेन डाउन और रविवार की रात से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गईं।

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