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बच्चों से 10 की जगह 20 किताबें न मंगाएं, जरूरत हो तो तीन साल बाद ही बदलें बुक्स

निजी स्कूलों से कहा कि बच्चों पर किताबों का अनावश्यक बोझ न डालें।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 13, 2017, 08:51 AM IST

बच्चों से 10 की जगह 20 किताबें न मंगाएं, जरूरत हो तो तीन साल बाद ही बदलें बुक्स

रांची.रांची के प्रमंडलीय आयुक्त दिनेश चंद्र मिश्र ने निजी स्कूलों से कहा कि बच्चों पर किताबों का अनावश्यक बोझ न डालें। कोर्स में 10 की जगह 20 किताबें शामिल करने से बस्ते का बोझ बढ़ जाता है। बहुत जरूरी होने पर तीन साल पर ही किताबों में बदलाव करें। क्योंकि एक-दो टॉपिक बदल देने से अभिभावकों को नई किताबें खरीदने में परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि न तो स्कूल में किताब-कॉपियों की बिक्री करें और न ही अभिभावकों पर किसी खास दुकानों से इसे खरीदने का दबाव डाले। साथ ही कोर्स में एनसीईआरटी की किताबें ही शामिल करें। वे मंगलवार को कलेक्ट्रेट में निजी स्कूलों के प्रिंसिपल और सचिवों के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक में डीसी, एसडीओ, एडीएम (ला एंड आर्डर), जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक मौजूद थे।

30 जनवरी तक वेबसाइट पर डालें किताबों की सूची

बैठक में डीसी मनोज कुमार ने कहा कि स्कूल प्रबंधन अगले साल 30 जनवरी तक हर हाल में अपनी वेबसाइट पर किताबों की लिस्ट डाल दें। ताकि अभिभावक किसी भी दुकान से खरीद सकें। जिला शिक्षा अधीक्षक शवेंद्र कुमार ने तीन प्रतिशत सीटों पर दिव्यांग कैटेगरी के बच्चों का एडमिशन लेने और उनके लिए विशेष शिक्षक की नियुक्ति करें। 25% सीटों पर बीपीएल कैटेगरी के बच्चों का एडमिशन लेना है।

यह भी निर्देश

- तय मानक के मुताबिक ही एडमिशन फीस बढ़ाएं

- स्कूल परिसर और क्लास में सीसीटीवी कैमरे हर हाल में लगाएं

- बच्चों और स्कूल में आने-जाने वालों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था हो

- नर्सरी में एडमिशन के लिए किसी प्रकार की परीक्षा नहीं लें

- एनसीसी कैडेट्स से कैंप समेत अन्य शुल्क सरकारी स्कूलों की तरह नहीं लिया जाए

- स्कूल कैंपस के 200 मीटर के दायरे में पान-तंबाकू की दुकान नहीं होनी चाहिए

- स्कूल के सामने सड़क पर जेब्रा क्रासिंग बनवाएं

- स्कूल के समीप नो हॉर्न जोन बनाएं, छुट्टी के समय ट्रैफिक पुलिस तैनात रहे।

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Web Title: bachcho se 10 ki jgah 20 kitaaben n mngaaaen, jrurt ho to teen saal baad hi bdlen buks
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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