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जहां बने पाक से लड़ने टैंक से लेकर इसरो के लॉन्च पैड तक, उसे बेचने की तैयारी

Dainik Bhaskar

Feb 08, 2018, 05:19 AM IST

15 नवंबर 1963 में इसकी शुरुआत हुई। तब इसे ‘मदर ऑफ आॅल इंडस्ट्री’ कहा गया।

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रांची. केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते ने बुधवार को रांची के सांसद रामटहल चौधरी को संकेत दिया कि भारी उद्योग निगम (एचईसी) को केंद्र सरकार बेच सकती है। केंद्र ने एचईसी को बेचने की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा दिया है। बता दें चाहे 71 के युद्ध में पैटन टैंकों का जवाब देने के लिए इंडियन माउंटेन टैंक हो या फिर चंद्रयान-जीएसएलवी के लिए लॉन्च पैड बनाने की बात हो, जब-जब देश को जहां भी जरूरत पड़ी, एचईसी हमेशा 100% रिजल्ट के साथ खड़ा रहा।

इसे ‘मदर ऑफ आॅल इंडस्ट्री’ कहा गया

इतिहास को पलटे तो रांची को बसाया ही एचईसी ने है। आजादी के बाद पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जब रूस गए तो वहां की मशीनरी को देख भारत में एचईसी की स्थापना की सोची। इसके लिए रांची को चुना। 1958 में इसकी प्रक्रिया शुरू हुई और 5 साल के अंदर 15 नवंबर 1963 में इसकी शुरुआत हुई। तब इसे ‘मदर ऑफ आॅल इंडस्ट्री’ कहा गया। रांची में देश के अलग-अलग भागों से लोग एचईसी में काम करने आने लगे। इसमें करीब 22 हजार कर्मचाारी थे। इसीलिए अब भी रांची में पूरा देश दिखाई देता है। हर संस्कृति के लोग घुलमिल गए।

जिसे घाटे में बताकर बेच रहे, उसने 7 बार लगातार मुनाफा दिया

तर्क दिया जा रहा कि एचईसी घाटे में है, इसीलिए बेचा जा रहा है। तो पहली बात ये कि क्या कभी घाटे का सौदा करने के लिए कोई प्राइवेट कंपनी आगे आएगी। दूसरी बात ये कि इस बात की पड़ताल होनी चाहिए कि 2012-13 तक मुनाफे में रहने वाली कंपनी साल-दर-साल घाटे में क्यों डूबती गई?

वर्ष मुनाफा

2006-07 2.86

2007-08 4.17

2008-09 18.37

2009-10 44.27

वर्ष मुनाफा

2010-11 38.14

2011-12 8.53

2012-13 12.21

2013-14 299.31

वर्ष मुनाफा

2014-15 241.68

2015-16 180.77

2016-17 82.27

प्लांट भी बिक जाएगा तो जमीन देनेवाले कहां जाएंगे

इस सूचना के बाद सांसद चौधरी ने गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सांसद चौधरी ने कहा है कि गुरुवार को भाजपा के सभी सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते से मिल कर ज्ञापन सौंपेंगे। उनसे किसी भी स्थिति में एचईसी को नहीं बेचने का आग्रह करेंगे। चौधरी ने यह भी कहा कि एचईसी की जमीन बिक ही चुकी है। अब प्लांट भी बिक जाएगा तो जमीन देनेवाले कहां जाएंगे। हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि वह मुख्यमंत्री से भी मिल कर आग्रह करेंगे कि केंद्र सरकार पर दबाव बनाएं कि एचईसी को नहीं बेचा जाए।

सड़क पर उतरेगी यूनियन

हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के महामंत्री राणा संग्राम सिंह ने कहा है कि अब मांगों के लिए नहीं, बल्कि एचईसी को बचाने के लिए संघर्ष होगा। सूचना मिली है कि पीएमओ इसे बेचने की तैयारी कर रहा है। एचईसी हमारी मां के समान है। इससे बहुत से लोगों की रोजी-रोटी चल रही है। एचईसी के मामले को लेकर बैठक हुई है, जिसमें निर्णय लिया गया है कि अब एचईसी को बचाने के िलए सड़क पर उतरना होगा।

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