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यहां छिड़ी है पुलिस की नक्सलियों से अंतिम लड़ाई : सरेंडर करें या गोली खाएं

पहाड़ पर नक्सलियों की रसद बंद, चारों तरफ बिछीहैंलैंड माइंस, गांव खाली कराए

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2018, 08:42 AM IST
नक्सलियों से लड़ाई के लिए पूरे क्षेत्र में इस तरह जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है। नक्सलियों से लड़ाई के लिए पूरे क्षेत्र में इस तरह जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है।

गढ़वा(झारखंढ). गढ़वा जिला के बड़गड़ थाना क्षेत्र के बूढ़ा पहाड़ पर नक्सलियों को घेरने के लिए पुलिस ने नई योजना पर कार्य शुरू कर दिया है। पुलिस नक्सलियों को उनकी मांद में ही घेरने की तैयारी में है। पुलिस ने ग्रामीणों को पहाड़ से सुरक्षित निकालने के बाद बूढ़ा पहाड़ पर खाद्य सामग्री की आपूर्ति बंद करा दी है। अब वहां केवल पीने के पानी के अलावा नक्सलियों को कुछ भी नहीं मिलने वाला है।

तराई में चारों ओर लैंड माइंस लगाए गए हैं

अभी तक नक्सली पहले से भंडारण कर रखे हुए खाद्य पदार्थ से काम चला रहे हैं। लेकिन जैसे ही उनके पास खाने-पीने के सामान की कमी होगी वे इसके लिए आगे की कार्रवाई शुरू करेंगे। इसी का लाभ उठाते हुए पुलिस नक्सलियों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। वैसे नक्सली अपने बचाव के लिए बूढ़ा पहाड़ को पूरी तरह से विस्फोटक पहाड़ बना लिए हैं। इसकी तराई में चारों ओर लैंड माइंस लगाए गए हैं। जबकि पुलिस से बचने के लिए पूरे पहाड़ी क्षेत्र को बड़े-बड़े चट्टानों से घेर रखा है। इस घेराबंदी का मकसद खुद की सुरक्षा व पुलिस को नुकसान पहुंचाना है। बूढ़ा पहाड़ पर कितने लैंड माइंस लगाए गए हैं इसका किसी को कोई अनुमान नहीं है।

पुलिस की योजना नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराने की है

जबतक नक्सलियों को पुलिस प्रशासन की इस योजना का पता चलता तब तक पुलिस ने बूढ़ा पहाड़ पर फंसे 53 परिवार को सुरक्षित बूढ़ा पहाड़ से निकालकर पास के गांव मदगड़ी में स्थित कैम्प में पहुंचा दिया। साथ ही बूढ़ा पहाड़ से आसपास के राज्यों में पलायन कर चुके ग्रामीणों को भी कैम्प में ले लाया गया। यहां प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को सभी तरह की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। सरकार के निर्देश के अनुसार पुलिस की योजना बूढ़ा पहाड़ पर रह रहे सभी नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराने की है।

पहाड़ पर कई नक्सली छिपे हुए है

नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के कई शीर्ष नेता पिछले कई माह से इस पहाड़ी पर छुपे हुए हैं। इनमें अरविंद जी, सुधाकरण जी, बेंगु दा सहित कई एरिया कमांडर व जोनल कमांडर भी यहां पनाह लिए हुए हैं। ग्रामीणों की माने तो इन नक्सलियों की सुरक्षा में हर समय 20 से 30 की संख्या में अत्याधुनिक हथियार से लैस दस्ता के सदस्य पहरेदारी करते रहते हैं।

इस क्षेत्र में छह पुलिस पिकेट बनाए गए

भंडरिया व बड़गड़ के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र को नक्सलियों से मुक्त कराने के लिए छह पुलिस पिकेट की स्थापना की गई है। इसमें भंडरिया थाना क्षेत्र के बरकोल, मदगड़ी, संगाली, कुल्ही गांव में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल का स्थाई पिकेट शामिल है। जबकि भंडरिया व बड़गड़ थाना भी स्थापित है। साथ ही बुढ़ा पहाड़ से नक्सलियों को खदेड़ने के लिए समय– समय पर आईजी, डीआईजी दौरा करते रहते हैं।

इसी बूढ़ा पहाड़ पर छिपे हुए हैं माओवादियों के शीर्ष नेता। इसी बूढ़ा पहाड़ पर छिपे हुए हैं माओवादियों के शीर्ष नेता।
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नक्सलियों से लड़ाई के लिए पूरे क्षेत्र में इस तरह जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है।नक्सलियों से लड़ाई के लिए पूरे क्षेत्र में इस तरह जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है।
इसी बूढ़ा पहाड़ पर छिपे हुए हैं माओवादियों के शीर्ष नेता।इसी बूढ़ा पहाड़ पर छिपे हुए हैं माओवादियों के शीर्ष नेता।
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