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जवान ने खोली सजायाफ्ता पूर्व MLA की सच्चाई, जांच में सबसे पहले वही सस्पेंड

जो जेल अफसर जिम्मेदार, उन्हीं को जांच, इसीलिए सच बाेलने वाले जवान ही सबसे पहले कार्रवाई।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 17, 2017, 07:33 AM IST

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    जून 2015 को कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के कुछ दिन बाद ही रिम्स में दिल में दर्द की शिकायत लेकर भर्ती हो गया। वहीं इलाज कराता रहा। नर्स से प्रेम हुआ तो शादी कर ली। पत्नी को लोहरदगा उपचुनाव में चुनाव लड़वाया। वह हार गई। 18 मार्च 2016 को उसे रिम्स से एम्स रेफर कर दिया गया।

    रांची. हत्या के प्रयास में सजायाफ्ता पूर्व विधायक कमल किशोर भगत इलाज के बहाने 19 महीने तक दिल्ली में आराम फरमाता रहा। इसका जिम्मेदार कौन है? इस पर शासन-प्रशासन खामोश है। जेल और पुलिस प्रशासन एक-दूसरे जिम्मेदारी का पल्ला झाड़ रहे हैं। गृह विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे बोल रहे हैं कि उन्होंने जेल आईजी हर्ष मंगला से जांच कर इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने के बाद ही तय कर पाएंगे कि जिम्मेदार कौन है? उधर, पुलिस प्रवक्ता एडीजी आरके मल्लिक ने कहा कि इसमें पुलिस की भूमिका कहां है? यह बेहतर जेल आईजी ही बता पाएंगे। उन्हीं से बात कर लें। पढ़िए...कौन किस पर टाल रहा जिम्मेदारी...

    पहले छोटी मछली का शिकार- सुरक्षा में लगे जवानों को किया सस्पेंड

    - पुलिस प्रशासन ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए कैदी कमल किशोर भगत की सुरक्षा में लगे हवलदार मुक्तेश्वर सिंह, सिपाही विपिन तिर्की, बुद्धदेव उरांव और सुरेश कुमार महतो को शनिवार शाम निलंबित कर दिया गया। उनपर कर्तव्यहीनता और लापरवाही के आरोप में कार्रवाई की गई।

    - रांची एसएसपी कुलदीप द्विवेदी द्वारा की गई इस कार्रवाई की पुष्टि सार्जेंट मेजर तुषार कांत झा ने की। जबकि निलंबित पुलिसकर्मियों ने सिर्फ इतना ही कहा कि वे तो बहुत छोटे मुलाजिम हैं, उनकी क्या गलती है। जो आदेश मिलता रहा और जो मिला, वैसा ही किया।

    - जब पुलिस को दैनिक भास्कर की पड़ताल की भनक लगी तो रांची पुलिस लाइन के मुंशी अनूप ने कमल किशोर भगत की सुरक्षा में तैनात चारों पुलिसकर्मियों को फोन कर अविलंब सजायाफ्ता कैदी कमल किशोर को रांची लाने का फरमान जारी किया।

    - इन पुलिसकर्मियों को 14 दिसंबर को तीन बार फोन किया गया। 15 दिसंबर की दोपहर चारों पुलिसकर्मी बिना टिकट गरीबरथ से कैदी को लेकर रांची पहुंच गये। फिर चारों पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन में योगदान करने को बुलाया गया। शाम में चारों को निलंबित कर दिया गया।

    - अब पुलिसकर्मी यह पूछ रहे हैं कि यह कहां का न्याय है। सच बाेलने की ऐसी सजा मिली है कि भरोसा नहीं हो रहा है। हमारी कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल उठ गया है। जबकि हम पूरे समय विभाग के निर्देशों का ही पालन करते रहे।

    निलंबित पुलिसकर्मी बोला -छोटे मुलाजिम हैं, बचा लीजिए, मैंने तो वहीं कहा जो सच है

    कमल किशोर की सुरक्षा में लगे हवलदार मुक्तेश्वर सिंह ने बताया कि मेरी क्या गलती है हुजूर, बताया जाए। हम तो बहुत छोटे मुलाजिम हैं, जैसा आदेश मिलता रहा, करते गए। दो दिन पहले दिल्ली से तुरंत कैदी के साथ लौटने का आदेश मिला, चला आया। हुक्म का पालन किया। अब पता चला है कि मुझे और मेरे साथ रहे तीनों सिपाही विपिन, बुद्धदेव और सुरेश को निलंबित कर दिया गया है। हुजूर किसी तरह बचा लीजिए। मेरा परिवार है। तीन साल नौकरी बची है। निलंबन मुक्त नहीं हुआ तो मुसीबत आ जाएगी। सिंह के नेतृत्व में ही चार सिपाहियों को पूर्व विधायक कमल किशोर भगत के साथ एम्स (दिल्ली) जाने के लिए भेजा गया था। हवलदार ने बताया कि दिल्ली में ही उन्हें लकवा का अटैक आया। शरीर का दाहिने हिस्से में लकवा मार गया। एम्स में ही डॉ. पदमा की इलाज में था। बाएं आंख की रोशनी भी कम हो गई है। ठीक से दिखाई भी नहीं देता। काफी तनाव में हूं। मैंने तो सिर्फ वहीं कहा जो सच है। इसमें मेरा क्या कसूर है।

    जेल आईजी को जांच का आदेश

    गृह विभाग के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे ने बताया कि उन्होंने जेल आईजी हर्ष मंगला को जांच करने का आदेश दिया है। साथ ही इस मामले में जांच के बाद रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। जेल आईजी को कहा गया है कि भगत इलाज के लिए कब दिल्ली गए। वहां से कब-कब एम्स में इलाज कराने गए। वहां पर चिकित्सक की सलाह क्या थी। अगर अस्पताल में रहे तो डिस्चार्ज कब हुए। डिस्चार्ज होने के बाद कहां गए। नियम के अनुसार डिस्चार्ज के बाद भी अगर डॉक्टर देखने के लिए बुलाता है तो लोकल पुलिस स्टेशन को जानकारी में देना आवश्यक होता है। हॉस्पिटल का रजिस्टर भी देखने के लिए कहा गया है। उनका क्या इलाज हुआ है। यह भी देखना है।

    जेल अधीक्षक ने कहा - शनिवार-रविवार छुट्टी है, सोमवार को फाइल देखकर ही कुछ बता पाऊंगा

    रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल के अधीक्षक अशोक चौधरी ने कहा कि शनिवार और रविवार को तो छुट्टी है। सोमवार को फाइल देखने के बाद ही कुछ बता पाएंगे। बोले फाइल देखने के बाद बता सकते हैं कि क्या कर सकते हैं इस मामले में। कमल किशोर भगत से संबंधित फाइल अभी देख नहीं पाए हैं। देखने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। वो कब-कहां रहा, इससे संबंधित सारी जानकारी जुटाने के बाद ही इस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है कि जिम्मेदार कौन है। वैसे सुना है कि उसकी सुरक्षा में लगे चारों पुलिसकर्मी सस्पेंड हो गए हैं। आप इसी से समझ लीजिए...। कमल किशोर को रांची बुलाने के लिए आठ दिसंबर से पहले मैंने कोई भी पत्र रांची पुलिस को नहीं लिखा। रांची एसएसपी को 8 दिसंबर को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि चारों पुलिसकर्मियों को कैदी के साथ वापस बुला लिया जाए।

    चंदा देने से मना करने पर पीटा था डॉ. केके सिन्हा को, चलाई थी गोली, 21 साल बाद मिली थी सजा

    28 सितंबर 1993 की शाम 5.10 बजे आजसू नेता कमल किशोर भगत दो साथियों सुदर्शन भगत और एलेस्टर बोदरा के साथ डॉक्टर केके सिन्हा के क्लिनिक पहुंचे। भगत ने डॉक्टर सिन्हा से चंदा मांगा। डॉ. ने चंदा देने से मना कर दिया। इसपर केके भगत और सुदर्शन भगत ने गुस्से में डॉक्टर की पिटाई कर दी। मौके पर मौजूद कंपाउंडर नवल और मरीजों ने डॉ. सिन्हा को बचाया और सटे हुए आवास में ले गए। तभी कमल किशोर ने रिवॉल्वर निकाल कर गोली चला दी। फिर डॉ. सिन्हा के बेटे हेमंत सिन्हा और मौजूद लोगों ने तीनों को पकड़ लिया। जमकर पिटाई की। सुदर्शन भगत की मौके पर ही मौत हो गई। जख्मी कमल किशोर भगत और बोदरा को रिम्स में भर्ती करवाया गया। 21 साल बाद दोनों को सजा मिली।

    जेल आईजी बोले - कागजात देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी : आईजी जेल हर्ष मंगला ने कहा है कि कमल किशोर भगत के प्रकरण में संबंधित कागजातों की मांग की गई है। उसे देखने के बाद ही सारी स्थिति सामने आएगी।

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