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राज्य स्थापना दिवस 2016 : आयोजन खर्च पर सवाल, लाखों के चॉकलेट का कोई हिसाब नहीं

कुडू फेर्विक्स कंपनी से बिना टेंडर निकाले 4.93 लाख टी-शर्ट 4.62 करोड़ रु. में खरीदी गई। इसका पता लुधियाना का बताया है।

Dainik Bhaskar

Dec 23, 2017, 06:52 AM IST
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धनबाद. राज्य स्थापना दिवस 2016 के समारोह में सरकारी अफसरों ने 4.62 करोड़ रुपए के टी-शर्ट और 33.61 लाख रु. के चॉकलेट बांट दिए। लेकिन कहां बांटे, किसे बांटे...किसी को पता नहीं। न स्टॉक में हिसाब है और न ही डिस्पैच का। बिना टेंडर निकाले ही टी-शर्ट और चॉकलेट की खरीदारी की गई। करीब एक साल पहले टी-शर्ट और चॉकलेट खरीद की आड़ में हुई यह अनियमितता अब धीरे-धीरे सामने आ रही है।

आयोजन व्यय के हिसाब-किताब मूल्यांकन में कई जगहों पर त्रुटियां मिल रही हैं। सरकार ने खरीदारी करने में टेंडर प्रक्रिया की अनदेखी की है। स्टॉक रजिस्टर में न टी-शर्ट और चॉकलेट आने की एंट्री है और न ही डिस्पैच रजिस्टर में निकासी की एंट्री की गई है। टी-शर्ट और चॉकलेट की विवादास्पद खरीद और वितरण को लेकर रांची मुख्यालय में खलबली मची हुई है। जल्द ही इस मामले में सरकार उच्च स्तरीय जांच करवा सकती है।

ऐसे हुई बिना टेंडर के खरीद

टी-शर्ट : 1 कंपनी से 13 खेप में की 4.62 करोड़ की खरीदारी

कुडू फेर्विक्स कंपनी से बिना टेंडर निकाले 4.93 लाख टी-शर्ट 4.62 करोड़ रु. में खरीदी गई। इसका पता लुधियाना का बताया गया है। कंपनी ने 13 खेप में सप्लाई दी है। सबसे अधिक खरीदारी 11 नवंबर 2016 को हुई है। इस दिन सरकार ने कंपनी से 63,400 टी-शर्ट खरीदी है। इस खरीद के लिए कंपनी को 58.96 लाख रु. दिए गए।

चॉकलेट: समारोह के बाद खरीदे 5 लाख चॉकलेट पैकेट

चॉकलेट की खरीद भी बिना टेंडर के हुई। चॉकलेट की खरीद जमशेदपुर की कंपनी लल्ला इंटरप्राइजेज से हुई। 21 नवंबर 2016 यानी स्थापना दिवस के बाद 5 लाख चॉकलेट पैकेज खरीद की बात कही गई है। 5 लाख चॉकलेट पॉकेट के लिए कंपनी को 33.61 लाख रुपए का भुगतान किया गया।

ये हैं तीन गड़बड़ियां

बिना टेंडर खरीद : टी -शर्ट और चॉकलेट की खरीद नियमतः नहीं हुई। खरीद के लिए सरकार ने कोई टेंडर नहीं निकाला। बिना टेंडर ही 4 करोड़ रु. से अधिक की खरीदी की।

स्टॉक- डिस्पैच नहीं दिखाई : नियम कहता है कि टी-शर्ट खरीद के बाद स्टॉक बुक में इसकी एंट्री और निकासी का डिस्पैच बुक में जिक्र होना चाहिए था।

कहां और किसे बंटे...पता नहीं : नियमत: टी-शर्ट और चॉकलेट बांटने का हिसाब-किताब होगा। कहां बंटे, किसे और कितने बंटे... इसका लेखा-जोखा भी नहीं रखा गया।

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