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ये है 11 साल का गोल्ड मेडलिस्ट, साइकिल से दूध बेचता है फिर देर रात तक पढ़ाई

आमिर अहमद चितरपुर का रहने वाला है। वह चितरपुर जवाहर रोड स्थित माउंट एवरेस्ट स्कूल के कक्षा चार का छात्र है।

Danik Bhaskar | Feb 12, 2018, 08:23 AM IST

रजरप्पा (झारखंड). बारिश के बाद बीते शाम बढ़ी कनकनी देने वाली ठंड के बीच माउंट एवरेस्ट स्कूल चितरपुर के डायरेक्टर साजिद हुसैन कुछ दोस्तों के साथ अपने मोहल्ले में बैठे हैं। बातचीत में सब मशगूल हैं। रात के करीब नौ बज रहे होंगे। रात के अंधेरे और ठंड के एहसास के बीच एक साइकिल पर प्लास्टिक की बोरी में भरी बोतलें लटकाए, कैरियर पर छोटी बच्ची काे बैठाए 11 साल का बच्चा घंटी बजाता गुजर रहा था। एकाएक स्कूल के डायरेक्टर की नजर उस बच्चे पर पड़ी।

माथे पर पुरानी ऊनी टोपी, ठंड से बचने के लिए शर्ट का उपर से लेकर नीचे तक का बटन बंद (शायद स्वेटर ना होने के कारण ठंड से बचने का एक यही उपाय हो)। डायरेक्टर ने जब करीब से उस बच्चे को देखा तो बरबस ही मुंह से सवाल निकलने लगा, आमिर तुम? इतनी रात, क्या कर रहे हो? जी हां, यह 11 वर्ष का आमिर ही है। पढ़ाई के लिए हर रात देर तक दूध बेचता है, फिर देर रात तक पढ़ाई करता है। 11 वर्षीय आमिर नेशनल मैथ ओलंपियाड का गोल्ड मेडलिस्ट है।

घर चलाने में आमिर करता है मां-बाप की मदद


आमिर अहमद चितरपुर का रहने वाला है। वह चितरपुर जवाहर रोड स्थित माउंट एवरेस्ट स्कूल के कक्षा चार का छात्र है। उसकी मां मेहरुन निशा स्कूल में दाई का काम करती है, जबकि पिता फिलहाल कुछ नहीं कर रहे है। घर में सात भाई बहनों में आमिर सबसे बड़ा है। परिवार चलाने के लिए सब मिलकर काम करते हैं। घर में चार गाय है। अाय का यही सबसे बढ़ा जरिया है। आमिर इतना कम उम्र में घर गृहस्थी के साथ संभालने के साथ परिवार भी चलता है। यह अपने आप में प्रेरणादायक है।

वर्ष 2017-18 में आईएमओ के लेबल वन में जीत चुका है गोल्ड मेडल, लेबल टू के लिए दी है परीक्षा


आमिर अपने क्लास में हमेशा अव्वल आता है। वह वर्ष 2017-18 के इंटरनेशनल मैथ ओलंपियाड गोल्ड मेडल हासिल कर चुका है। रविवार को रांची में इंटरनेशनल मैथ ओलंपियाड लेबल दो की परीक्षा भी दी है। आमिर ने बताया, इंटरनेशनल मैथ ओलंपियाड लेबल दो की परीक्षा पूरी तैयारी के साथ दी है। सफलता निश्चित मिलेगी यह विश्वास है। आमिर आगे बताता है कि वह साइंटिस्ट बनकर देश के लिए कुछ करना चाहता है।

संघर्ष की जीती-जागती पटकथा है बालक आमिर


माउंट एवरेस्ट स्कूल के डायरेक्टर साजिद हुसैन ने बताया कि उस रात आमिर को देखकर ऐसा लगा, मानो वह संघर्ष की जीती जागती पटकथा है। शुरु से ही वह मेधावी छात्र रहा है, परंतु वह पढ़ाई के लिए इतना संघर्ष करता है, यह मैंने खुद देखा। देखकर दंग भी रह गया।