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ये है इंडियन प्रोफेसर की ऑस्ट्रेलिया में डांस क्लास, कई फॉरेनर्स हैं इनके स्टूडेंट

मेलबर्न में भारतीय संस्कृति का देश से बाहर प्रचार-प्रसार पर काम कर रहे हैं प्रोफेसर विक्रांत किशोर।

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 08:32 AM IST
बोकारो जिले के विक्रांत किशोर बोकारो जिले के विक्रांत किशोर

बोकारो. ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में नियमित रूप से छऊ लाेक नृत्य सीखने वालों की क्लास लगती है। करीब 12 ऑस्ट्रेलियाई और 50 से ज्यादा भारतीय मूल के लोग शामिल होते हैं। और इन्हें सिखाने वाले गुरु हैं बोकारो जिले के विक्रांत किशोर। वे मेलबर्न में आरएमआईटी विश्वविद्यालय में मीडिया और संचार विभाग में प्रोफेसर हैं। इसके साथ ही वे फिल्म निर्माता, फोटोग्राफर, लेखक और पत्रकार भी हैं। 25 से अधिक वृत्तचित्र और कॉरपोरेट फिल्म बना चुके हैं। वे नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर छऊ एंड लोक नृत्य के माध्यम से बोकारो और पुरुलिया जिले के छऊ नृत्य का देश-विदेश में प्रसार कर रहे हैं। अब तक वे विदेश में रहते हुए 25 रूसी, 12 आॅस्ट्रेलियाई और फ्रांस के 14 लोगों को छऊ नृत्य सिखा चुके हैं।

इंडियन हिस्टोरिकल कैरेक्टर्स समझाना था मुश्किल
विक्रांत का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में छऊ नृत्य पर काम करना मुश्किल था। सबसे बड़ी समस्या थी भारतीय ऐतिहासिक पात्रों के बारे में वहां के लोगों को समझाना। फिर भी अपनी संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने के लिए इस पर काम करते रहे। वहां रह रहे भारतवंशी खासकर पूर्वी भारत के लोग इस कला की ओर आकर्षित हुए। विक्रांत अभी भी साल में एक बार पश्चिम बंगाल और झारखंड के उन गांवों की यात्रा करते हैं, जहां छऊ नृत्य प्रचलित है। हाल ही में उन्होंने एक डॉक्यूमेंट्री “डांसिंग टू द ट्यून्स ऑफ बॉलीवुड’ बनाई है, जिसे कई फिल्म समारोह में दिखाया गया है।

चाहते हैं भारतीय सिनेमा, सभ्यता और संस्कृति को पहचान दिलाना
विक्रांत सिनेमा और टेलीविजन पर रिसर्च कर रहे हैं। विक्रांत का कहना है कि इस रिसर्च का उद्देश्य विदेशियों के बीच भारतीय सिनेमा, सभ्यता और संस्कृति को पहचान दिलाना है। विक्रांत ने “फ्रॉम रीयल टू रील: फॉल्क डांसेस ऑफ इंडिया इन बॉलीवुड’ किताब लिखी है, जिसका प्रकाशन यूनेस्को-एपनिव से हुआ है।

माता-पिता ने भी किया था 25 देशों में छऊ का प्रदर्शन

विक्रांत की मां मीरा किशोर और पिता विजय किशोर ने छऊ नृत्य के सरायकेला, बोकारो और पुरुलिया शैली के संरक्षण में अपने जीवन को समर्पित कर दिया था। उन्होंने छऊ के प्रख्यात गुरु पद्मश्री नेपाल महतो और गंभीर सिंह मूरा के साथ काम किया और 25 देशों में छऊ का प्रदर्शन किया। माता-पिता से प्रेरणा लेकर किशोर ने गुरु ललित महतो से छऊ सीखना शुरू किया।

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बोकारो जिले के विक्रांत किशोरबोकारो जिले के विक्रांत किशोर
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