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देश का सबसे बीमार जिला, यहां एंबुलेंस लाने के लिए पहाड़ काट रहे हैं लोग

पश्चिमी सिंहभूम जिले में दो हजार फीट की ऊंचाई पर बसे गांव लांजी तक जाने के लिए सिर्फ एक पगडंडी है।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 22, 2018, 11:43 AM IST

देश का सबसे बीमार जिला, यहां एंबुलेंस लाने के लिए पहाड़ काट रहे हैं लोग

रांची. देश का सबसे बीमार जिला झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम। पोड़ाहाट, सारंड और कोल्हान इसके तीन वन प्रमंडल हैं। यहां जंगल इतना घना है कि सूर्य की किरणें भी जमीं छू नहीं पाती। करीब 16 लाख लोग इन्हीं जंगलों में रह रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाआें के अभाव का ही नतीजा है कि यहां दो लाख कुपोषित बच्चे हैं, जिनमें से 33 हजार की जान खतरे में है। डेढ़ दशक से हावी नक्सलियों की वजह से ये गांव सरकारी मशीनरी की पहुंच से बाहर हैं। दुर्गम पहाड़ियों पर बसे गांवों में हालात ये हैं कि अगर कोई बीमार होता है तो खटिया ही एंबुलेंस है, लेकिन अब यहां के लोग खुद पहाड़ों को काटकर रास्ते बना रहे हैं, ताकि उनके गांव तक भी एंबुलेंस पहुंच सके और कोई बिना इलाज के ना रहे।

गांव में बाइक तक नहीं पहुंच सकती

- पोड़ाहाट जंगल के झरझरा इलाके में सिंहभूम की सबसे ऊंची चोटी पर लांजी गांव है। नक्सल इलाके में 2000 फीट ऊंचाई पर बसे इस गांव के 7 टोलों में 725 लोग रहते हैं। लांजी के लोग सप्ताह में एक बार सोमवार को पहाड़ी से उतरकर बाजार (झरझरा) आते हैं। यहां से अनाज आदि लेकर पहाड़ों में लौट जाते हैं। मैदानी भाग से गांव तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक दुर्गम पगडंडी है। लोगों को यहां आने-जाने में चार-चार घंटे का समय लग जाता है।

गांव वालों को सबसे बड़ा मलाल यह है कि गांव में बाइक तक नहीं पहुंच सकती तो किसी अन्य वाहन के पहुंचने की कल्पना भी नहीं कर सकते। इस वजह से 80% से ज्यादा मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। लेकिन अब इसी गांव के आदिवासी पिछले तीन महीने से खुद सड़क बना रहे हैं।

पहले भी 22 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी यहां

- चक्रधरपुर से 30 किमी दूर होयोहातु पंचायत के लांजी गांव में जब भास्कर टीम पहुंची तो यहां रहने वाली जगन हांसदा ने बताया कि लोग अब सीधी चढ़ाई में 5 किमी लंबी सड़क बना रहे हैं, ताकि एंबुलेंस गांव में आ सके। कुछ ऐसी ही कहानी सारंडा के धरनादिरी गांव की भी है। जहां 3 माह पहले हुई एक वृद्धा की मौत ने पूरे गांव को बदलाव के लिए प्रेरित कर दिया है। यहां भी लोग करीब 6 किमी की सड़क बनाने में जुटे हैं।

- मुंडा लाखों ने बताया कि 3 माह पहले गांव के श्रीराम कश्यप की मां बीमार थीं। चार-पांच युवक उन्हें खटिया में लादकर किरीबुरू स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना हुए लेकिन बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया। श्रीराम कहते हैं कि उनसे पहले भी 22 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी। इसके बाद गांव वालों ने सड़क बनाने का फैसला किया ताकि यहां तक एंबुलेंस पहुंच सके।

(प. सिंहभूम से देवेंद्र सिंह व ऋषिकेश की रिपोर्ट...)

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Web Title: desh ka sabse bimaar jilaa, yaha enbulens laane ke liye phaaड़ kat rahe hain loga
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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