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यहां दिन में भी जाने में लगता है डर, पुलिसवाले का पीट-पीट कर किया ये हाल

प. सिंहभूम में जुटे तीन जिलों के ग्राम प्रधान 25 को 6 गांवों में करेंगे पत्थलगड़ी चुनौती दी- रोक सको तो रोक लो।

अमित सिंह | Last Modified - Feb 23, 2018, 07:10 PM IST

    • 10 जनवरी की डराने वाली तस्वीर : पत्थलगड़ी करने वालों ने वीडियो जारी कर पुलिस प्रशासन को दी चुनौती।

      रांची.पत्थलगड़ी मामले में लगातार हो रही ग्राम प्रधानों की गिरफ्तारी के विरोध में गुरुवार को पश्चिम सिंहभूम के चिटूंग गांव में तीन जिलों के ग्राम प्रधान जुटे। खूंटी, सरायकेला-खरसावां और पश्चिम सिंहभूम जिले के ग्राम प्रधानों ने प्रशासन को खुली चुनौती दी। कहा-25 फरवरी को छह गांवों कोचांग, बांबा, सेंजरी, साके, तुसूंगा और तोरकोरा में पारंपरिक रीति-रिवाज से पत्थलगड़ी की जाएगी। प्रशासन रोक सके तो रोक ले। चेताया भी कि अगर प्रशासन ने पत्थलगड़ी कार्यक्रम पर रोक लगाने की कोशिश की तो अंजाम बेहतर नहीं होगा।

      क्या है पत्थलगड़ी?

      पत्थलगड़ी आदिवासी समाज की परंपरा है, जिसके जरिए से गांव का सीमांकन किया जाता है, लेकिन अब इसी की आड़ में गांव के बाहर अवैध ढंग से पत्थलगड़ी की जा रही है। पत्थर पर ग्राम सभा का अधिकार दिलाने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों (आर्टिकल) की गलत व्याख्या करते हुए ग्रामीणों को आंदोलन के लिए उकसाया जा रहा है।

      कहा- घटना पुलिस के लिए सबक, ग्राम सभा सर्वशक्तिमान
      ग्राम प्रधान पतरस हरसा की अध्यक्षता में हुई ग्राम सभा में कुरुंगा के ग्राम प्रधान सागर मुंडा को अड़की पुलिस द्वारा घर से जबरन उठाने की निंदा की गई। ग्राम प्रधानों ने कहा कि पुलिस बिना वारंट, बिना किसी गुनाह के गिरफ्तारी कर रही है। यह सहन नहीं किया जाएगा। कुरुंगा की घटना पुलिस के लिए सबक है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा सर्वशक्तिमान है। किसी भी कार्यक्रम के लिए ग्राम सभा को सरकार या प्रशासन से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। ग्राम सभा में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय ही सर्वमान्य हैं। प्रशासन इसे प्रभावित करने की असफल कोशिश कर रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

      सामने आई तस्वीर ने पुलिस प्रशासन के झूठ को बेनकाब किया

      कुरुंगा गांव में ग्रामीणों ने बुधवार को दारोगा सहित 25 जवानों को बंधक बना लिया था। हालांकि, अफसर बंधक बनाने की बात से इनकार करते हैं, पर मामले में सामने आई तस्वीर ने पुलिस प्रशासन के झूठ को बेनकाब कर रहा है। इसका वीडियो भास्कर के पास है। इसमें जवान फोन पर किसी से कह रहे हैं-चारों ओर से तीर-धनुष और भाला-फरसा लेकर घेरे हुए हैं। कह रहे हैं कि जब तक आदमी नहीं आएगा, तब तक नहीं छोड़ेंगे। बड़ा बाबू ले गया है प्रधान को। कहिए-उन्हें लेकर आएं।


      गिरफ्तार ग्राम प्रधानों को नहीं छोड़ा तो आंदोलन
      ग्राम सभा ने अब तक गिरफ्तार किए गए सभी ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों को छोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन्हें मुक्त कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति, राज्यपाल और जिला प्रशासन को पत्र लिखा जाएगा। अगर पुलिस ने गिरफ्तार ग्राम प्रधानों को नहीं छोड़ा तो रणनीति तैयार कर ग्रामीण आंदोलन करेंगे।


      फिर फरमान : ग्राम सभा के तहत आने वाले गांवों में पुलिस के प्रवेश पर रोक
      तीनों जिलों में पुलिस की कार्रवाई से ग्रामीण भड़क गए हैं। उन्होंने ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाले सभी गांवों में पुलिस-प्रशासन के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगाने का फरमान जारी किया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस अगर किसी को गिरफ्तार करना चाहती है तो पहले ग्राम सभा को कारण बताना होगा। ग्राम सभा फैसला लेगी कि उस व्यक्ति को पुलिस को सौंपा जाए या नहीं। गिरफ्तारी से संबंधित वारंट भी दिखाना होगा। तभी पुलिस किसी को गांव में आकर पकड़ सकेगी।

      हुटार से पहुंच रहा है शिलापट्‌ट, राष्ट्रपति राज्यपाल को देते हैं पत्थलगड़ी का न्योता

      खूंटी के गांव-गांव में हुटार से शिलापट्‌ट पहुंच रहे है। हुटार रांची-खूंटी मुख्य सड़क के किनारे एक गांव है। जहां के पत्थर ज्यादा सफेद और मजबूत होते है। कुरुंगा के ग्रामीणों ने बताया कि 7 हजार रुपए में शिलापट्‌ट मिल जाता है। संविधान में लिखे मूल अधिकार अनुच्छेद 13(3)(क) प्राकृतिक ग्राम सभा पारंपरिक रूढ़ि प्रथा से संबंधित अनुच्छेद खुदवाने में 7 से 10 हजार रुपए लगते हैं। खर्च होने वाली पूरी राशि का हिसाब ग्राम सभा रखती है। ग्राम सभा में ही तय होता है कि पत्थलगड़ी के लिए गांव के प्रत्येक घर से कितनी राशि ली जाएगी। समारोह में किसे आमंत्रित करना है, वह भी ग्राम सभा द्वारा ही तय किया जाता है। ऐसे आयोजनों में विधायक, सांसद या प्रशासन के किसी अफसर को नहीं बुलाया जाता है। जिस ग्राम सभा के तहत पत्थलगड़ी होनी होती है, उस ग्राम सभा द्वारा पत्र और पंपलेट जारी कर आसपास ग्राम सभा के माइनन हातु मुंडा, मानकी, परगना, पड़हा, डोकलो, सोहोर व हाजोर आदि को आमंत्रित किया जाता है। आदिवासी परंपरा के अनुसार पत्थरगड़ी सह उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाता है। इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित ग्राम सभा द्वारा पत्र के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति, राज्यपाल व उपायुक्त को दिया जाता है।

      खौफ इतना कि अंधेरा होते ही अड़की थाने के गेट पर भी लटक जाता है ताला

      खूंटी जिले के ज्यादातर गांव पहाड़ के ऊपर और घने जंगलों से घिरे हुए हैं। कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां सड़क तक नहीं है। कुरुंगा गांव जहां दैनिक भास्कर टीम पहुंची। जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर स्थित यह गांव चारों तरफ से जंगलों से घिरा हुआ है। घोर नक्सली एरिया होने के कारण इसे रेड कॉरिडोर भी कहा जाता है। रात तो दूर, दिन में भी यहां कोई बाहरी आदमी जाने की हिम्मत नहीं करता। गांव आने वाले हर आदमी पर नजर रखी जाती है। जरा सा शक होने पर ग्रामीण घेर लेते हैं। खूंटी-तमाड़ मुख्य सड़क से यह गांव 18 किमी अंदर है। नक्सली क्षेत्र होने के कारण गांव के चारों तरफ चार सीआरपीएफ/जैप कैंप है। बावजूद इसके अंधेरा होने पर पुलिस भी इन रास्तों से नहीं गुजरती। खौफ इतना है कि रात में अड़की थाने के मुख्य द्वार में भी ताला लग जाता है।

      ग्राम प्रधान​ की पत्नी बोली, अफसरों ने लिखित में दिया है, ऐसी गलती नहीं करेंगे

      ग्राम प्रधान सागर मुंडा की पत्नी रनिया नाग ने कहा, मुंडा सुबह 11 बजे खाना खाकर हाथ धोने निकले थे। तभी पुलिस आ गई। अड़की थाना प्रभारी हरदेव प्रसाद पूरी टीम के साथ उन्हें खूंटी ले गए। यह सुनकर गांव वाले जुट गए। दिन के 11.30 बजे पुलिस जवान गुजर रहे थे। उनको गांव वालों ने रोक लिया। फिर लोगों ने खूंटी एसपी अश्विनी सिन्हा से मोबाइल पर बात की। एसपी से कहा, जबतक ग्राम प्रधान को नहीं छोड़िएगा, तब तक पुलिस को भी नहीं छोड़ेंगे। उसको भेजिए, नहीं तो जवान यही बैठे रहेंगे। बात होने के करीब तीन घंटे के बाद ग्राम प्रधान को अड़की के रास्ते लाया। जबकि दूसरे रास्ते से ले गया था। गांव के मुहाने पर ग्राम प्रधान को लेकर डीसी, एसपी, बीडीओ सभी खड़े थे। शाम छह बजे ग्राम प्रधान को छोड़ा, तब गांव वालों ने जवानों को जाने दिया। अफसरों ने लिख कर दिया कि अब ऐसी गलती नहीं करेंगे। ग्राम प्रधान को गिरफ्तार नहीं करेंगे।

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      दारोगा के आगे-पीछे चल रहे ग्रामीणों के हाथ में देसी हथियार दिखाई दे रहे हैं और वे पुलिस के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।
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      10 जनवरी का वीडियो सरायकेला-खरसावां के कुचाई गांव का है। इसमें दो ग्रामीणों को गिरफ्तार करने पर गांव वाले दारोगा की पिटाई कर रहे हैं।
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      ये तस्वीर पुलिस प्रशासन के झूठ की है, जिन्होंने कहा कि हमारे जवानों काे बंधक नहीं बनाया गया।
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      ग्राम प्रधान सागर मुंडा की पत्नी रनिया नाग ने कहा कि अफसरों ने लिखित में दिया है, ऐसी गलती नहीं करेंगे।
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      कुरुंगा में ग्राम प्रधान सागर मुंडा का घर। घोर नक्सली एरिया होने के कारण इसे रेड कॉरिडोर भी कहा जाता है।
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