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लीडरशिप संतों के हाथ में था, इसलिए विश्वगुरु बना भारत : प्रो. राकेश सिन्हा

दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर सह इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के मानद निदेशक प्रो. राकेश...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:10 AM IST

दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर सह इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के मानद निदेशक प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा कि लोगों में राजनीति के प्रति अनास्था और नास्तिकता का भाव बढ़ रहा है। अच्छे लोग सार्वजनिक जीवन में आने से कतरा रहे हैं। वे रविवार को रांची यूनिवर्सिटी के पीजी योगा विभाग में व्याख्यान दे रहे थे। विषय योग व राष्ट्र उत्थान था। उन्होंने स्टूडेंट्स की योग क्रिया की तारीफ की। वीसी डॉ. रमेश कुमार पांडेय ने उनका स्वागत किया।

प्रो. राकेश ने कहा कि भारत का लीडरशिप संतों के हाथ में था। इसलिए, भारत विश्वगुरु था। कहा कि शिक्षकों को पाणिनी बना होगा। क्योंकि, एक बार पाणिनी अपने शिष्यों को शब्दों की उत्पति के बारे में बता रहे थे, तभी एक बाघ शिष्यों को दिखाई दिया। इसके बाद शिष्य बाघ-बाघ कहकर भागने लगे। पाणिनी व्याघ्र शब्द बताने लगे, तभी वे बाघ के शिकार हो गए। इसलिए, विश्वगुरु बनने के लिए शिक्षकों को पाणिनी बनना होगा। मौके पर सीमा सिंह, डॉ. आनंद ठाकुर, डॉ. शिव शंकर प्रसाद आदि मौजूद थे।

गांव, वनवासी और आदिवासियों की लड़ाई को इतिहास के पन्नों में जगह ही नहीं दी गई

रांची | आरएसएस विचारक प्रो. राकेश सिन्हा ने रविवार को कहा कि वर्तमान समय में राम और रोटी की लड़ाई साथ-साथ चले। हमारे समाज का एक बड़ा दलित और आदिवासी वर्ग अब भी सही अवसरों और संसाधनों से वंचित है। हमें उन्हें वह सब कुछ उपलब्ध कराना है, जिसके वे हकदार हैं। हमारे देश का इतिहास गलत रूप से लिखा गया है। इसका पुनर्मूल्यांकन व पुनर्लेखन हो। सत्ता से वंचित होने के बाद कुछ राजनीतिक ताकतें भारत में गृह युद्ध की साजिश कर रही हैं। राकेश सिन्हा रविवार को विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की रांची शाखा की ओर से रिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित राष्ट्रवाद पर आसन्न संकट विषय पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। मौके पर विनोद गड़ियान, अमित और अराधना तिवारी उपस्थित थे।

रिम्स ऑडिटोरियम में विचार रखते प्रो. राकेश सिन्हा।

भारत को सर्वशक्तिमान बनाना लक्ष्य : राज्यपाल

कार्यक्रम में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारत को सर्वशक्तिमान बनाना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। हमारे वीर सपूतों ने संघर्ष का परिचय देते हुए अपना सर्वस्व न्योछावर कर हमें ब्रिटिश चंगुल से मुक्त कराया। उनके प्रति कृतज्ञता का भाव रखते हुए हमें अपने अंदर उनके जज्बे को जीवित रखना है। भारत माता को विकसित, सुरक्षित और सर्वशक्तिमान बनाने के लिए काम करना होगा।

अंग्रेज-मुगलों के बाद भी हमारी संस्कृति जीवित है

उन्होंने कहा कि वे नहीं मानते वर्तमान में राष्ट्रवाद पर बड़ा संकट है। पानी के बुलबुले नदी की धाराओं को नहीं मोड़ सकते। अंग्रेज और मुगलों के बाद भी हमारी लोक संस्कृति जीवित है। राष्ट्रवाद यहां के लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। सत्ता की राजनीति करने वाले इसे नहीं मिटा सकते। 1947 में सिर्फ भौगोलिक रूप से हमें आजादी मिली। विचारों के स्वराज की लड़ाई अभी बाकी है। आज का आईएसआई पुराने खिलजी का एक नया संस्करण है। ये अहिंसा से मानेंगे, तो अहिंसा से मनाएंगे और हिंसा से मानेंगे तो उन्हें हिंसा से मनाएंगे। पर, आज के समय में भारत न एक इंच अपनी भूमि खोएगा और न ही सम्मान। राकेश सिन्हा ने कहा कि गांव, वनवासी और आदिवासियों की लड़ाई को इतिहास के पन्नों में जगह नहीं दी गई। इतिहास सिर्फ राजाओं के नाम याद करने का विषय नहीं है। यह हमारा गौरवशाली अतीत है, जिसमें हमें सही लोगों को जगह देनी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शिवशंकर प्रसाद ने की।

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