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पुलिस की बंदूक में लगे छोटा वीडियो कैमरा, निर्दोष बचेंगे

आदिवासियों को पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ में मार गिराने से रोकने के लिए पुलिस के बंदूक पर छोटा वीडियो कैमरा लगाया...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 03:10 AM IST
आदिवासियों को पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ में मार गिराने से रोकने के लिए पुलिस के बंदूक पर छोटा वीडियो कैमरा लगाया जाए। जब भी पुलिस नक्सलियों के विरुद्ध अभियान में निकले उस समय अलग से भी वीडियो कैमरा का उपयोग किया जाए। ऑपरेशन के समय कैमरा ऑन रहना चाहिए। ऐसे में पुलिस फर्जी मुठभेड़ में निर्दोष आदिवासियों को नहीं मार सकेगी। सैकड़ों निर्दोष बचेंगे और उनका परिवार भी बर्बाद होने से बच सकेगा।

झारखंड सरकार को केंद्रीय गृह मंत्रालय से एक पत्र मिला है। उस पत्र के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे गए एक अनुरोध पत्र को संलग्न किया गया है। उसी पत्र में उपरोक्त अनुरोध प्रधानमंत्री कार्यालय से किया गया है। वह पत्र कर्नाटक में रहने वाले दीपक बिरुआ ने लिखा है। बिरुआ मूलतः झारखंड के चाईबासा इलाके के निवासी हैं।

बिरुआ ने प्रधानमंत्री काे लिख गए पत्र में कहा है कि वे प्रधानमंत्री का ध्यान उन गरीब और निर्दोष आदिवासियों की ओर आकृष्ट कराना चाहते हैं जिन्हें निर्दोष होते हुए भी पुलिस की गोली का शिकार बनना पड़ रहा है। पुलिस द्वारा मार गिराने के बाद यह कोई नहीं जान पाता कि वह नक्सली था या नहीं। पूरे देश में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। झारखंड भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में अगर पुलिस के बंदूक पर वीडियो रिकार्डिंग कैमरा लगाया जाए और अभियान के दौरान भी अलग से वीडियो कैमरा ऑन करके पुलिस निकले तब यह पता चल पाएगा कि जिसे मारा गया उसे घर से ले जाया गया या जंगल में भागते हुए मारा गया।

प्रकाशित खबरों की कटिंग भी भेजी

बिरुआ ने देश के अन्य आदिवासी बहुल इलाकों में अखबारों में प्रकाशित उन खबरों की कटिंग भी पीएमओ को भेजी है जिसमें निर्दोष आदिवासी ग्रामीण को पुलिस के मुठभेड़ में मारे जाने की खबर है। इन खबरों में झारखंड के पारसनाथ में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ बताकर मारे गए मोती लाल बास्के का नाम भी शामिल है। बास्के के बारे में अखबारों में खबर छपी थी कि वह निर्दोष था और सत्तू बेचने के अलावा मजदूरी का भी काम करता था। बास्के के मारे जाने के बाद इसका काफी विरोध भी हुआ।

रुक सकेगी फर्जी मुठभेड़

इस संबंध में प्रधानमंत्री काे पत्र लिखने वाले दीपक बिरुआ ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर पुलिसकर्मियों के ऑपरेशन के दौरान बंदूक पर वीडियो कैमरा लगाने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। इससे सही स्थिति का पता चल पाएगा कि पुलिस के अभियान के दौरान क्या हुआ। इससे फर्जी मुठभेड़ में निर्दोष लोग नहीं मारे जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह एक आम नागरिक हैं राजनीतिज्ञ नहीं । इसलिए पूरी तरह से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग पीएमओ को भेजा है। अन्य सामजिक मसलों पर भी वह पत्र भेजते रहे हैं।

गृह मंत्रालय ने कहा-आदिवासी हित का ख्याल रखें

केंद्रीय गृह मंत्रीलय वामपंथी उग्रवाद प्रभाग ने झारखंड के साथ ही आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलगंना, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार को पत्र लिख कर कहा है कि बिरुआ के आदिवाियों के हित में कई सुझाव दिए गए है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। यह सुनिश्चित की जाए कि आदिवासियों के साथ अन्याय न हो। इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।