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होली का अर्थ है कटु स्मृतियों को जलाना : प्रो. पांडेय

रांची | होली जलाने का अर्थ पिछले वर्ष की कटु स्मृतियों को जलाना और हंसते-खेलते नववर्ष का आह्वान करना है।...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 03:15 AM IST
रांची | होली जलाने का अर्थ पिछले वर्ष की कटु स्मृतियों को जलाना और हंसते-खेलते नववर्ष का आह्वान करना है। सृष्टिकर्ता परमात्मा अत्याचार रूपी हिरण्यकश्यप और दुख, अशांति और भय रूपी होलिका के चंगुल से प्रह्लाद अर्थात प्रभु संतान समस्त आत्माओं को मुक्त करते हैं। ये बातें हरमू रोड चौधरी बागान स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान में रांची विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. जंगबहादुर पांडेय ने कही। वह यहां होली मिलन समारोह में बोल रहे थे। समाजसेवी सुशीला सरावगी ने कहा कि जैसे भुना हुआ बीज नए फल की उत्पति नहीं कर सकता, वैसे ही ज्ञान योग युक्त अवस्था में किया गया कर्म विकर्म का रूप नहीं ले सकता। केेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि इस संसार में दो ही रंग है। एक माया और दूसरा ईश्वर का। इस अवसर पर रंगों के साथ श्रीकृष्ण-राधा रास रचाकर होली मनाई गई। गरबा नृत्य भी किया गया। कार्यक्रम में गाइडेल मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया। गुलाल से तिलक लगाकर और फूलों से गुलाब जल छिड़ककर होली मनाई।