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आजीवन परहेज, उपवास, प्रार्थना का जीवन जीने का प्रतीक है चालीसा काल

चालीसा या लेंट के चालीस दिन की आध्यात्मिक तैयारी प्रत्येक मसीही के लिए अपने जीवन में की गई गलतियों और पापों के लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 03:15 AM IST

आजीवन परहेज, उपवास, प्रार्थना का जीवन जीने का प्रतीक है चालीसा काल
चालीसा या लेंट के चालीस दिन की आध्यात्मिक तैयारी प्रत्येक मसीही के लिए अपने जीवन में की गई गलतियों और पापों के लिए सच्चे दिल से पश्चाताप करने, उपवास, परहेज और प्रार्थना में बढ़ने का अभ्यास है। लेकिन उपवास, प्रार्थना, परहेज और क्रूस रास्ता आराधना आदि के कार्यक्रम को मात्र चालीस दिन की औपचारिकता तक ही सीमित करने का नहीं, पूरे जगत के मसीहियों के लिए यह जीवन पूरे साल अर्थात वर्ष के 365 दिन कहें या अपने जीवन के अंतिम सांस तक अनुसरण करने का है। उक्त बातें कोकर पल्ली के पेरिश प्रिस्ट डॉन बोस्को स्कूल के रेक्टर फादर शिलानंद केरकेट्‌टा ने कही। उन्होंने कहा कि साधारण लोग चालीसा को चालीस दिन का परहेज, त्याग, तपस्या, प्रार्थना और मनन-चिंतन का समय बताते हैं, लेकिन चालीसा महा उपवासकाल इससे उपर और बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर है। चालीसा के अवसर पर ईश्वर और कलीसिया का आह्वान है। हर एक मसीही या विश्वासी प्रभु को अपने जीवन का केंद्र बनाएं। परहेज, उपवास प्रार्थना के भाव को हर दिन अपने दैनिक जीवन के अन्य कार्यों को करते हुए जीएं। पश्चाताप, उपवास, प्रार्थना और दानधर्म में किसी तरह का दिखावा न करें, क्योंकि ईश वचन के अनुसार प्रभु को दिखावा बिल्कुल नापसंद है। दिखावे के साथ की गई चालीसा की आध्यात्मिक तैयारी व्यर्थ है। जो भी करें हृदय की गहराई से और मन की पवित्रता से करें। इस दौरान यदि दान-धर्म भी करते हैं तो वह ऐसा हो कि दाहिने हाथ से दिए गए दान की जानकारी बाएं हाथ को न हो।

धर्म अध्यात्म

कोकर पल्ली के पेरिश प्रिस्ट डॉन बोस्को स्कूल के रेक्टर फादर शिलानंद केरकेट्‌टा ने कहा

जीवन के पहलू से ईश्वर की ओर लौटने का अवसर

ईस्टर से पूर्व चालीस दिन की आध्यात्मिक तैयारी एक मसीही के लिए पूरे हृदय व जीवन के हर पहलुओं से ईश्वर की ओर लौटने का अवसर है। हर साल मसीहियों के जीवन में चालीसा का अवसर इसलिए मिलता है, ताकि मसीही पश्चाताप करें और उपवास प्रार्थना करते हुए मन, हृदय और कर्म से प्रभु की ओर लौटें। पोप फ्रांसिस ने चालीसा के महत्व पर जानकारी देते हुए वाटिकन सिटी में यह कहा कि चालीसा काल प्रत्येक मसीही के लिए प्रभु के क्रूस दु:खभोग, क्रूस मरण, पुनरुत्थान और पुनरागमन का स्मरण कराता है। इस स्मरण के साथ मसीहियों को उसके लिए आध्यात्मिक रुप से तैयार भी रहने को प्रेरित करता है।

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Web Title: आजीवन परहेज, उपवास, प्रार्थना का जीवन जीने का प्रतीक है चालीसा काल
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