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सरकारी संस्थानों पर चार करोड़ वाटर टैक्स बकाया, वसूली के लिए सिर्फ होता है पत्राचार

राजधानी में आम लोगों से टैक्स वसूलने से लेकर कार्रवाई करने में नगर निगम के अधिकारी काफी आगे हैं। लेकिन सरकारी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:15 AM IST

राजधानी में आम लोगों से टैक्स वसूलने से लेकर कार्रवाई करने में नगर निगम के अधिकारी काफी आगे हैं। लेकिन सरकारी संस्थानों पर करोड़ों रुपए बकाया होने के बावजूद पत्राचार का खेल चलता रहता है। इन दिनों निगम की आउटसोर्स कंपनी स्पैरो सॉफ्ट के कर्मचारी वाटर टैक्स के बकायेदारों को फोन करके टैक्स जमा करने के लिए बोल रहे हैं।

टैक्स नहीं देने पर वाटर कनेक्शन काटने की चेतावनी दी जा रही है। जबकि करीब एक दर्जन सरकारी भवनों पर 4.78 करोड़ रुपए बकाया है। लेकिन निगम द्वारा संस्थान के प्रबंधन को पत्र भेजकर पैसा जमा करने का आग्रह किया जा रहा है। कनेक्शन काटने की चेतावनी या कार्रवाई नहीं की गई है। एक ओर शहर में बोरवेल कराने का निगम के पास फंड नहीं है। सरकार से 12 करोड़ रुपए की मांग की गई है। दूसरी ओर सरकारी संस्थानों पर निगम के अफसर मेहरबानी कर रहे हैं। सरकारी भवनों पर बकाया टैक्स मिलने से बोरवेल कराने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं पड़ती।

रिम्स पर सबसे अधिक बकाया

सीएमपीडीआई, कांके 17,77,506

बिरसा मुंडा एयरपोर्ट 1,87,100

रिम्स अस्पताल, बरियातू 37,62,480

रिम्स कॉलेज और कॉलोनी 2,41,12,829

राजेंद्र नगर कॉलोनी 3,20,062

गांधी नगर कॉलोनी, कांके 20,31,990

जवाहर नगर कॉलोनी 65,10,334

रिनपास कांके 61,72,253

सीआईपी कांके 45,36,020

आईआईसीएम कांक 4,66,153

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