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एफिलिएटेड संस्थानों को मिले अनुदान के Rs.43 करोड़ लैप्स

वित्तीय वर्ष (2017-18) के अंतिम दिन लास्ट आवर मेंं एफिलिएटेड हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों को अनुदान मद की राशि निर्गत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:15 AM IST

वित्तीय वर्ष (2017-18) के अंतिम दिन लास्ट आवर मेंं एफिलिएटेड हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों को अनुदान मद की राशि निर्गत करने के लिए विभागीय अधिकारियों का प्रयास बेकार हो गया। रात 9 बजे तक अनुदान मद में निर्गत 43 करोड़ सर्वर डाउन होने की वजह से ट्रेजरी से पास नहीं होने के कारण राशि लैप्स हो गई। राज्य में पहली बार स्थापना अनुमति प्राप्त विभिन्न कैटेगरी के शिक्षण संस्थानों के अनुदान मद की राशि लैप्स हुई है। बताते चलें कि सांसद सुनील सिंह के प्रयास से स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में शिक्षण संस्थानों को अनुदान देने की सहमति बनी थी। शाम 6.25 बजे बिल को ट्रेजरी में भेजा गया, लेकिन तकनीकी कारणों से पास नहीं हो सका। इसपर झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त मोर्चा ने कहा कि विभागीय अधिकारियों की गलती के कारण शिक्षकों के समझ भुखमरी की स्थिति आ गई है।

डीईओ ने नहीं ली रुचि, आरडीडीई का नहीं हो पाया काउंटर साइन

हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों को अनुदान मद में दी गई राशि से संबंधित कागजात रात आठ बजे जिला शिक्षा पदाधिकारियों को मिल। मोर्चा के रघुनाथ सिंह और सुरेंद्र झा ने कहा कि शिक्षा पदाधिकारियों द्वारा अनुदान राशि को ट्रेजरी से पास कराने में किसी प्रकार की रुचि नहीं ली गई। वहीं आरडीडीई द्वारा बिल पर काउंटर साइन नहीं किया गया। क्योंकि काउंटर साइन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। इस कारण राशि लैप्स हो गई।

‌साजिश के तहत राशि नहीं देने का मोर्चा ने लगाया आरोप : मोर्चा ने कहा कि अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करने की प्रक्रिया सितंबर में समाप्त हो गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। परिणाम सामने है। राशि लैप्स होने के लिए विभागीय अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेवार हैं। ‌साजिश के तहत एफिलिएटेड स्कूलों को अनुदान राशि से वंचित किया गया है। मोर्चा ने सरकार से इसके लिए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

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