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अब गांवों के विकास के लिए बनेंगी आदिवासी व ग्राम विकास समितियां

4 वर्ष पहले
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झारखंड में ग्रामीण विकास में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम स्तर पर आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति का गठन होगा। छोटे-छोटे विकास कार्यों की जिम्मेदारी इन्हीं विकास समितियों के जिम्मे होगी। ये समितियां पांच लाख रुपए तक के काम कराएंगी।

राज्य में लगभग 30 हजार विकास समितियां बनेंगी। ग्रामीण विकास विभाग (पंचायती राज) के इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। कैबिनेट के प्रधान सचिव एसकेजी रहाटे और विभागीय सचिव विनय कुमार चौबे ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में कुल 16 फैसले लिए गए।

ऐसे जिम्मेदारी निभाएंगी ग्राम समितियां

ग्राम विकास समितियों का प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण प्रखंड विकास पदाधिकारी के जिम्मे होगा। ये समितियां पंचायत स्वशासी परिषद के अंतर्गत काम करेंगी और परिषद का सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत निबंधन कराया जाएगा। विकास योजनाओं में तकनीकी सहायता उन विभागों से ली जाएंगी जिस विभाग से जुड़ी योजनाएं होंगी। पंचायती राज विभाग द्वारा योजनाओं के प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति के अलावा वित्तीय प्रबंधन के लिए अलग से दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।

दोनों ही समितियों की अध्यक्ष महिला होंगी
100 से ज्यादा घर वाले गावों में 11 और 100 से कम घर वाले गावों में 9 सदस्यीय विकास समिति बनेगी। ग्राम विकास समिति में एक अध्यक्ष, एक सचिव और एक कोषाध्यक्ष होंगे। अनुसूचित क्षेत्रों और 50 फीसदी से अधिक एसटी आबादी वाले गावों में आदिवासी विकास समिति और शेष गांवों में ग्राम विकास समितियों का गठन किया जाएगा। आदिवासी विकास समिति में तीनों प्रमुख पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रहेंगे। आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति की अध्यक्ष महिला ही होंगी। समितियों के गठन के लिए पंचायत सेवक गांव के व्यस्क सदस्यों की आमसभा बुलाई जाएगी। कार्यकारी अध्यक्ष आमसभा के माध्यम से समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों का चुनाव आम सहमति से कराएंगे । सभी प्रखंड समन्वयक अपने-अपने प्रखंड में चयन प्रक्रिया का पर्यवेक्षण करेंगे। बैठक के आयोजन के लिए पंचायत स्वयंसेवकों को एक हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

निबंधन व मुद्रांक शुल्क माफ
हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड द्वारा सिंदरी में फर्टिलाइजर, अमोनिया एवं यूरिया प्लांट की स्थापना की जा रही है। इससे जुड़े लीज दस्तावेज पर सरकार ने निबंधन एवं मुद्रांक शुल्क माफ करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने इसके लिए राज्य सरकार से आग्रह किया था।

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