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वार्ड कमेटी आेझल, रटा रटाया वादा कर रहे प्रत्याशी

गली-मुहल्ले और सड़कों पर चुनाव के भोंपू बजने लगे हैं। प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए तरह-तरह के वायदे कर रहे...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 03:25 AM IST
गली-मुहल्ले और सड़कों पर चुनाव के भोंपू बजने लगे हैं। प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए तरह-तरह के वायदे कर रहे हैं। मेयर-डिप्टी मेयर से लेकर पार्षद प्रत्याशियों के चुनावी वादों और संकल्प पत्र में एक दशक पुराने एजेंडे और वायदे शामिल हैं। वर्ष 2008 के पहले नगर निगम चुनाव में प्रत्याशियों ने राशन कार्ड, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, पानी, स्ट्रीट लाइट, रोड-नाली, साफ-सफाई और भ्रष्टाचारमुक्त वार्ड बनाने का सपना दिखाया था, इस बार भी ये वायदे ही किए जा रहे हैं। प्रत्याशियों की नजर से वार्ड कमेटियां और सब कमेटियां ओझल हो गई हैं। सरकार ने वार्ड के विकास में आम लोगों की सहभागिता के उद्देश्य से यह प्रावधान किया था। उद्देश्य यह था कि वार्ड के लोगों के शामिल होने से स्थानीय लोगों की जरूरत और मांग के अनुसार विकास की योजना बने और खर्च वाजिब चीजों पर हो सके।

पिछले चुनाव में जीत कर आने वाले मेयर-डिप्टी मेयर और पार्षदों को ही वार्ड कमेटियां बनानी थीं, लेकिन आम लोगों के हस्तक्षेप से बचने के लिए मामले को दबा दिया गया। इस चुनाव में भी कोई इसकी चर्चा नहीं कर रहा है। इससे साफ है कि चुनाव मैदान में उतरे सभी प्रत्याशी किसी तरह कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए रटा-रटाया वायदे लोगों से कर रहे हैं।

वार्ड कमेटी बनने से रुकेगी मनमानी

नगरपालिका अधिनियम के अनुसार, शहर के विकास में आम लोगों की भूमिका बढ़ाने के लिए वार्ड कमेटी और सब कमेटी बननी हैं। एक वार्ड के चार बूथों को मिलाकर एक क्षेत्र बनेगा और एक प्रतिनिधि का चयन होगा। यानी एक वार्ड में 20 बूथ हैं तो कम से कम पांच प्रतिनिधि, सिविल सोसाइटी के लोग कमेटी में शामिल होंगे। पार्षद अध्यक्ष होगा। वार्ड में लोगों की जरूरत के जो भी काम होंगे, उसकी अनुशंसा यह कमेटी ही करेगी। इसके अलावा पांच सब कमेटियां भी बनेंगी। सब कमेटी में वार्ड पार्षद अध्यक्ष होंगे। वहीं वार्ड की आमसभा में मनोनीत 2 लोग, व्यवसायी वर्ग के 2 प्रतिनिधि, अनुसूचित जाति व जनजाति के 2 लोग, महिला वर्ग से 2 और नगर निकाय से मनोनीत एक पदाधिकारी या कर्मचारी सदस्य होंगे। यह कमेटी बन गई तो वार्ड में पार्षदों की मनमानी पर रोक लगेगी।

आप जागें और पूछे सवाल, मिलेगा हक

हमारे वोट से जनप्रतिनिधि राज करते हैं। जैसा चाहते हैं, योजना बनती है और टेंडर भी करीबियों को देते हंै। इससे पैसे की बंदरबांट होती है। इसलिए हर वार्ड के लोग प्रत्याशियों से सीधे सवाल करें- जीतने के कितने दिन बाद कमेटी बन जाएगी? जो प्रत्याशी आम जनता को अधिकार देने के लिए तैयार हो, उसकी पूरी बात की रिकॉर्डिंग होनी चाहिए, ताकि वायदे से मुकरने पर उनके खिलाफ आवाज उठाई जा सके।

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