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विदेशी संस्थान से मास्टर कोर्स करने से संभावनाएं बेहतर, जल्द मिलेगी जॉब

रांची

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:25 AM IST

रांची बढ़ती समृद्धि और बढ़ते वैश्वीकरण के साथ उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष भारत से करीब 4 लाख भारतीय छात्र शिक्षा के लिए विदेश गए। हालांकि, हर साल कॉलेज मंे प्रवेश लेने वालों की अपेक्षा यह संख्या बहुत कम है। इनमें से करीब एक तिहाई छात्र मास्टर कोर्स करने के लिए विदेश जाते हैं। लेकिन अक्सर छात्रों के लिए यह फैसला करना मुश्किल होता है कि मास्टर कोर्स के लिए विदेश जाएं या नहीं।

मास्टर डिग्री कोर्स स्पेशलाइज्ड कोर्स होता है। इसे चुनने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि क्या यह कोर्स आपके लिए सही है। यह भी सोच लें कि क्या यह सही समय है। विदेशों में मास्टर प्रोग्राम और खासकर कि एमबीए मंे प्रवेश के लिए कम से कम 2 वर्ष का वर्किंग एक्सपीरियंस जरूरी होता है। यदि आपके पास कुछ वर्ष का वर्क एक्सपीरियंस होगा, तो मास्टर डिग्री प्रोग्राम में यह सहायक होता है। आपको अपने लर्निंग स्टाइल का भी अध्ययन करना होगा। विदेशों में कई कॉलेजों मंे छात्रों को प्री वर्क और सेल्फ स्टडी ज्यादा करनी पड़ती है। इसके अलावा विदेशों मंे पढ़ाई का तरीका भारतीय तरीके के मुकाबले कहीं ज्यादा व्यावहारिक होता है। यदि आप प्रैक्टिकल स्टडी पसंद करते हैं, विदेशी संस्थानों मंे आपको ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

खुद को समझना

सही कोर्स का चुनाव

विदेशों मंे कोर्स या कॉलेज का चुनाव करने से पहले पता कर लें कि टीचिंग फैकल्टी कैसी है, पढ़ाने के तरीके क्या हैं। सिलेबस और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बारे मंे पता कर लें और प्लेसमेंट प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकरी लें। साथ ही यह भी पता कर लें कि प्लेसमेंट के लिए कौन-सी कंपिनयां आती हैं। क्या यह प्रोग्राम भारत में मौजूद है? क्या इससे जुड़ी नौकरियों की संभावनाएं देश में हैं? कॉलेज या संस्थान से पढ़ चुके छात्रों से राय लेना भी अच्छा हो सकता है। खर्च को भी ध्यान में रखें। जहां तक ब्रिटेन की बात है, वहां मास्टर डिग्री का औसत खर्च 20 हजार डॉलर और इस दौरान एक साल का रहने का खर्च 18-20 हजार डॉलर तक आता है। इसी तरह अमेरिका मंे रहने का खर्च 8 हजार से 20 हजार डॉलर तक हो सकता है। इनके मुकाबले जर्मनी में खर्च कम आता है।

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