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वेजफेड ने ऐसे की मेहरबानी; आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर कराई, फिर जांच की फाइल ही दब गई

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:30 AM IST

सरफराज कुरैशी
सरफराज कुरैशी रांची

रांची के बोड़ेया में वेजफेड का कोल्ड स्टोरेज ढहने होने की जांच थम गई है। 2.60 करोड़ रुपए का यह कोल्ड स्टोरेज 26 जुलाई 2017 को ढहा था। तब वेजफेड के अफसरों ने जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की बड़ी-बड़ी बातें की। आठ लोगों के खिलाफ आनन-फानन में कांके थाना में एफआईआर भी दर्ज कराई गई। मगर हकीकत में यह सब दिखावटी निकला। अब तक न जांच पूरी हुई, न एफआईआर में दर्ज आरोपियों से कोई पूछताछ। और भी कई सारे सवालों के जवाब नहीं मिल रहे हैं, क्योंकि भवन निर्माण के इंजीनियरों ने 4.10.2017 को यह कहते हुए जांच से इंकार कर दिया था कि कोल्ड स्टोरेज का निर्माण अनुमोदित नक्शा, तकनीकी स्वीकृति, प्राक्कलन और अनुमोदित स्ट्रक्चरल डिजाइन के बिना ही कराया गया था। इसी का फायदा उठाते हुए वेजफेड के अधिकारियों ने भी जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस संबंध में वेजफेड के एमडी जयदेव प्रसाद सिंह के मोबाइल पर कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।

पुलिस दो कदम भी नहीं चल पाई

कोल्ड स्टोरेज ढहने के बाद वेजफेड के एमडी जयदेव प्रसाद सिंह ने कांके थाना में जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसमें कहा था कि घटिया निर्माण और अत्याधिक बारिश के कारण 2400 और 200 यानि कुल 2600 एमटी क्षमता का कोल्ड स्टोरेज पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। एफआईआर में निर्माण करने वाली कंपनी सहित इंजीनियर और तत्कालीन एमडी के नाम भी दर्ज है। इस संबंध में कांके थाना प्रभारी राजीव रंजन का कहना था कि ये टेक्निकल मामला है, इसलिए जब इंजीनियरों की टीम जांच करके रिपोर्ट देगी और थाना को कागजात उपलब्ध हो जाएगा तब कार्रवाई हो पाएगी। इधर, भवन निर्माण की जांच टीम में शामिल भवन प्रमंडल-1 रांची के ईई अजय प्रसाद गुप्ता, भवन अवर प्रमंडल-2 के सहायक अभियंता रणधीर कुमार और राजभवन प्रशाखा-1 के कनीय अभियंता कमलेश कुमार अपनी रिपोर्ट में जांच को ही असंभव करार दे दिया है। इस कारण पुलिस भी जांच रिपोर्ट के इंतजार में बैठी है।

कोल्ड स्टोरेज गिरते ही शुरू हो गया था दोषियों को बचाने का खेल, इसलिए पूरी नहीं हो रही जांच

हर कोई मामले को दबाने की कोशिश में जुटा हुआ

यह है बोड़ेया में ढह चुका कोल्ड स्टोरेज भवन। इसी की जांच में सारे खेल किए जा रहे हैं।

देखिए, खानापूर्ति की एफआईआर में ये नाम हैं दर्ज, मगर एक से भी नहीं हुई पूछताछ

निर्माता कंपनी : एयरटेक कूलिंग प्रोसेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, न्यू दिल्ली।

कंसलटेंट : प्राइम वर्क, न्यू दिल्ली

तकनीकी पर्यवेक्षण : जावेद इकबाल (जेई), नंदन (प्रभारी, ईई), रामजी बरई (कार्यपालक अभियंता)।

तत्कालीन एमडी : र|ेश चतुर्वेदी, अनिल कुमार सिन्हा और इरफान उज्जैर।

2400 एमटी क्षमता कोल्ड स्टोरेज का काम बंद

वेजफेड ने वर्ष 2007 में ही 5000 मीट्रिक टन कुल क्षमता के तीन कोल्ड स्टोरेज बनाने की योजना बनाई थी। इसमें 2400 एमटी के दो और 200 एमटी वाले एक कोल्ड स्टोरेज बनाना था। निर्माण की जिम्मेदारी दिल्ली की एयरटेक कूलिंग प्रोसेस प्रालि को दी गई। कंपनी ने काम की शुरुआत समय पर की, लेकिन बाद में समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण काम बंद कर दिया था। निर्माण कार्य नौ महीने में पूरा हो जाना था, लेकिन नौ साल बाद भी पूरा नहीं हुआ। इधर, 2400 और 200 एमटी क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज के ध्वस्त होने के बाद 2400 एमटी क्षमता वाले एक कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कार्य भी बंद हो गया।

कोल्ड स्टोरेज ढहने से आलू तो सड़ गया, पर मकई को छांट-छांटकर निकाला गया है।

ढाई महीने में ही ध्वस्त हो गया था

ध्वस्त हुए कोल्ड स्टोरेज की शुरुआत मई 2017 में हुई थी। 5 साल तक 8 लाख सालाना की दर पर कोल्ड स्टोरेज के संचालन की जिम्मेदारी नेशनल फॉर्मर क्लब को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (एनएएफसीसीओएल) को दी गई थी। एनएएफसीसीओएल ने इसमें आलू-मकई रखना शुरू किया ही था कि कोल्ड स्टोरेज की छत और तीन पिलर के बीच एक फीट का गैप हो गया। 26 जुलाई की रात कोल्ड स्टोरेज भवन ढह गया।

नहीं आया कोई खरीदार

एनएएफसीसीओएल के चेयरमैन पवन कुमार के अनुसार इसमें रखे आलू पूरी तरह से खराब हो गए। मकई को छांटा जा रहा है। मकई की बिक्री के लिए अखबारों में विज्ञापन भी निकाला, लेकिन कोई खरीदार नहीं आया। लगभग पांच करोड़ के आलू और मकई कोल्ड स्टोरेज में रखने की बात सामने आई थी। 20 जुलाई को ही लोडिंग खत्म हुई और 26 जुलाई को भवन ढह गया। माल का इंश्योरेंस कराने का मौका भी नहीं मिला। इसमें दो कंपनियों सहित कई किसानों का आलू-मकई रखा गया था।

जांच रिपोर्ट आई ही नहीं है, इसलिए मामले में कुछ भी नहीं हो पा रहा है।  राजीव रंजन, प्रभारी, नामकुम थाना

सीधी बात: विजय कुमार सिंह, रजिस्ट्रार, झारखंड को-ऑपरेटिव सोसाइटी

कोल्ड स्टोरेज मामले की जांच से भवन निर्माण विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं, ऐसे में अब क्या हो रहा है?

- भवन क्यों गिरा, इसकी जांच टेक्निकल डिपार्टमेंट ही कर सकता है। जो भी कारण हो, वह बताए, तब तो एफआईआर भी आगे बढ़ेगी।

जांच पर वेजफेड के अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं?

- देखिए, जांच तो होनी ही है। जांच के बाद ही तो दोषियों पर कोई कार्रवाई होगी।

अगर भवन निर्माण ने फिर हाथ खड़े कर दिए तो क्या उपाय है?

- वेजफेड एमडी की तबीयत खराब होने से वे छुट्‌टी पर हैं। उम्मीद है सोमवार को ज्वाइन करेंगे। तब फाइल मंगाकर रिव्यू करेंगे। इसके बाद सचिव से बात करके कोई न कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा।

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