Hindi News »Jharkhand News »Ranchi »News» पहले बीपीएल व आरटीई का देते हैं हवाला, फिर दाखिला के लिए करते हैं सौदेबाजी

पहले बीपीएल व आरटीई का देते हैं हवाला, फिर दाखिला के लिए करते हैं सौदेबाजी

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:30 AM IST

डीबी स्टार
डीबी स्टार जमशेदपुर/रांची

बीपीएल और आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) का हवाला देकर प्राइवेट स्कूलों की नामांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करने वाले राजनेता ही अब पर्दे के पीछे से चहेतों का दाखिला कराने के लिए स्कूल प्रबंधनों पर दबाव बना रहे हैं।

जमशेदपुर जिले के कुछ स्कूलों के प्राचार्यों ने बताया कि पहले तो बीपीएल और आरटीई का हवाला देते हैं और बाद में अपने लोगों का दाखिला कराने को लेकर सौदेबाजी करने लगते हैं। नहीं करने पर धरना-प्रदर्शन करने की धमकी देते हैं। एक महिला प्रिंसिपल ने कहा कि कई बार हम परेशान होकर ऐसे लोगों को दाखिला दे देते हैं क्योंकि वे हर रोज कुछ न कुछ परेशानी क्रिएट करते हैं। उन्होंने बताया कि दुखद बात यह है कि ये नेता बीपीएल बच्चों के नाम पर राजनीति करते हैं। फिर उनके परिजनों से पैसा वूसलकर स्कूलों में दाखिला कराते हैं।

हमारे लिए यह पता करना मुश्किल होता है कि पैरेंट्स से उन्होंने पैसे लिए है या नहीं, क्योंकि कई पैरेंट्स इस बारे में बताना नहीं चाहते। बेल्डीह चर्च स्कूल प्रबंधन के सेक्रेटरी एके सौमैया कहते हैं-हम एक फॉर्म भरवाते हैं और जानने की कोशिश करते हैं कि उस व्यक्ति का सिफारिश करने वाले व्यक्ति से क्या संबंध है। बावजूद ऐसे लोग दाखिला करा लेते हैं।

छुटभैया नेता और पुलिस अधिकारी भी चहेतों का नामांकन कराने के लिए करते हैं खूब सिफारिश

सीएम और सांसद के नाम पर सिफारिश पत्र

सीएम व सांसद के लेटर पैड पर सिफारिश पत्र सबसे ज्यादा

स्कूलों में सबसे ज्यादा सिफारिश पत्र सीएम और सांसद के नाम पर पहुंच रहे हैं। स्कूलों का कहना है कि अभी तो शुरू हुआ है। मई माह तक सिफारिश पत्र आते रहते है। हमारी जितनी सीटें हैं, उससे ज्यादा सिफारिश पत्र आते हैं। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि कितना मुश्किल होता है सिफारिश पत्र के आधार पर दाखिला देना।

लॉटरी के बाद अंडरग्राउंड हो जाते हैं प्रिंसिपल

लॉटरी के बाद अधिकतर प्रिंसिपल अंडरग्राउंड हो जाते हैं। वे बाहर से आने वाले किसी भी तरह के कॉल को रिसीव नहीं करते। एक प्राचार्य ने बताया कि धमकी से लेकर गालियां तक दी जाती है। लोयोला स्कूल के प्रिंसिपल फादर पायस के टेबुल पर एक बार एक नेता ने रिवाल्वर रख दिया था। सबसे ज्यादा दबाव ब्रांडेड स्कूलों के लिए होता है।

स्कूलों ने मैनेजमेंट कोटा के नाम पर सीटें आरक्षित की

इस साल कई स्कूलों ने ऐसे दबाव से निपटने के लिए मैनेजमेंट कोटा के नाम पर सीटें आरक्षित कर रखी है, ताकि नेता और प्रशासन के नाम पर आने वाले दबाव को संभाला जा सके। ऐसे में ये स्कूल अपनी पसंद से भी दाखिला लेते हैं जिसमें पैरेंट्स से नामांकन के नाम पर हेवी फीस वसूला जाता है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Ranchi News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: पहले बीपीएल व आरटीई का देते हैं हवाला, फिर दाखिला के लिए करते हैं सौदेबाजी
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Stories You May be Interested in

      रिजल्ट शेयर करें:

      More From News

        Trending

        Live Hindi News

        0
        ×