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दो साल से शव वाहन खराब एंबुलेंस से शव पहुंचाने के लिए चालक मांगते हैं रुपए

डीबी स्टार | जमशेदपुर /रांची जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में पिछले दो साल से शव वाहन नहीं हैं। एेसे में इलाज के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:30 AM IST

दो साल से शव वाहन खराब एंबुलेंस से शव पहुंचाने के लिए चालक मांगते हैं रुपए
डीबी स्टार | जमशेदपुर /रांची

जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में पिछले दो साल से शव वाहन नहीं हैं। एेसे में इलाज के दौरान मरीजों की मौत होने पर एंबुलेंस के जरिए शव को पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाना पड़ता है। फिर जरूरत पड़ने पर उसी एंबुलेंस से मरीजों की सेवा की जाती है। सांसद, विधायक या फिर प्रशासनिक अधिकारियों के कहने पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों की जान जोखिम में डालकर एंबुलेंस से शव को पोस्टमार्टम हाउस से लेकर घर तक पहुंचाने का काम किया जाता है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी. भूषण की मानें तो एंबुलेंस में शव लाने ले जाने से इंफेक्शन का खतरा रहता है। लेकिन वीआईपी के कहने पर वे विवश हो जाते हैं। नियम को ताक पर रखकर काम करना पड़ता है। शव को पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का बेजा इस्तेमाल किया जाता है। अस्पताल में अभी छह एंबुलेंस हैं। इसमें से तीन 108 नंबर वाला है, जिसे हाल ही में राज्य सरकार की ओर से मरीजों को घटनास्थल या घर से अस्पताल लाने के लिए तथा मरीजों कोे रांची रेफर होने पर ले जाने के लिए उपयोग किया जाता है। अन्य तीन एंबुलेंस अस्पताल में हैं। अस्पताल में शव लाने ले जाने के लिए अलग से वाहन की व्यवस्था की गई है। लेकिन रखरखाव के अभाव में उक्त वाहन अक्सर खराब ही रहता है। तकरीबन दो साल से बेकार पड़ा है।

अस्पताल का शव वाहन खराब होने का फायदा उठाकर अस्पताल के एंबुलेंस के ड्राइवर पैसे की मांग करते हैं। वहीं बाहरी गाड़ियों के आने पर हंगामा करते हैं। अस्पताल ने मामले की गोपनीय जांच कराई तो यह तथ्य सामने आया है कि अस्पताल के एंबुलेंस चालक शव को लाने ले जाने के लिए आने वाली बाहरी गाड़ियों से कमीशन लेते हैं। हालांकि एक भी मरीज ने अस्पताल अधीक्षक को लिखित शिकायत नहीं की है। अस्पताल प्रबंधन कार्रवाई नहीं कर रहा है।

 वीआईपी के कहने पर एंबुलेंस के जरिए शव को पोस्टमार्टम या फिर घर तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद उसी एंबुलेंस में मरीज को लाने पर संक्रमण का खतरा रहता है, लेकिन परिस्थिति को देखते हुए ऐसा करना पड़ता है।  डॉ. बी. भूषण, अधीक्षक एमजीएम

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