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राजबाला वर्मा की नापसंदी अमित खरे दंपती को महंगी पड़ी

मुख्य सचिव पद के लिए पिछले कुछ दिनों में चर्चा तो कई नामों पर हुई लेकिन यह कुर्सी अमित खरे, राजीव कुमार होते हुए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:35 AM IST

राजबाला वर्मा की नापसंदी अमित खरे दंपती को महंगी पड़ी
मुख्य सचिव पद के लिए पिछले कुछ दिनों में चर्चा तो कई नामों पर हुई लेकिन यह कुर्सी अमित खरे, राजीव कुमार होते हुए सुधीर त्रिपाठी तक पहुंच गई। सात महीने के लिए सुधीर त्रिपाठी की किस्मत में राज्य के सबसे बड़े नौकरशाह की पगड़ी बंध गई। सत्ता के गलियारे की मानें तो केंद्र में सचिव पद के लिए सूचीवद्ध अमित खरे को राज्य सरकार इसीलिए दिल्ली जाने के लिए एनओसी नहीं दे रही थी क्योंकि कहीं न कहीं उन्हें सीएस बनाए जाने पर गंभीरता थी। उन्हें सीएम ने इसका संकेत भी दिया गया था। लेकिन अंतिम समय में खरे किनारे कर दिए गए। क्योंकि सरकार पर भारी रही निवर्तमान मुख्य सचिव राजबाला वर्मा की वह नापसंद थे। जैसे ही राजबाला के खिलाफ चल रही फाइल को क्लोज करने का आदेश हुआ, पूरा समीकरण बदल गया।

इसके बाद सीएस के लिए सरकार ने केंद्र में सचिव वित्त सेवा के पद पर तैनात 1984 बैच के आईएएस राजीव कुमार से संपर्क किया गया। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से आने से इंकार कर दिया। फिर वरीयता को आधार बनाकर त्रिपाठी को सीएस बनाने का फैसला किया गया। अमित खरे के कारण उनकी प|ी निधि खरे भी प्रभावित हुई। उन्हें कार्मिक से हटाकर स्वास्थ्य विभाग भेज दिया गया।

सुधीर त्रिपाठी को बधाई देते विकास आयुक्त अमित खरे व निवर्तमान सीएस राजबाला वर्मा।

राजबाला को सम्मानजनक विदाई देने में सफल रही राज्य सरकार

विवादों में घिरी मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को राज्य सरकार अंतत: सम्मानजनक विदाई देने में सफल रही। चारा घोटाले में सीबीआई द्वारा लघु दंड की सिफारिश को लेकर वर्मा जनवरी के पहले सप्ताह से ही विपक्ष के निशाने पर रही। बजट सत्र भी लगातार बाधित रहा। सात फरवरी को समाप्त होनेवाले इस बजट सत्र को मजबूरन सरकार को 30 जनवरी को ही समाप्त करना पड़ा। पहली बार गिलोटिन के माध्यम से आम बजट पास कराना पड़ा। मंत्री सरयू राय ने राजबाला पर कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को कई पत्र लिखे। उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री का पद तक छोड़ दिया। अंतिम तीन कैबिनेट की बैठकों में भी वह नहीं गए। लेकिन सरकार राजबाला के साथ मजबूती से खड़ी रही। चारा घोटाला मामले में चेतावनी देकर उन पर लगे आरोपों की फाइल बंद कर देने से आगे उन पर किसी तरह की कार्रवाई की संभावना समाप्त कर दी। उन्हें सरकार का सलाहकार बनाने की संभावना को भी बने रही।

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