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राम-रहीम खेले होली

होकर फारिग नमाजों से चल तनिक रगों से खेला जाए हो कोई मजहब या मजहब की दीवार कोई हो कोई आस्था या किसी आस्थे...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:45 AM IST
होकर फारिग नमाजों से

चल तनिक रगों से खेला जाए

हो कोई मजहब

या मजहब की दीवार कोई

हो कोई आस्था

या किसी आस्थे से जुड़ा परिवार कोई

जब तलक मिले न सुर सबों के

तब तलक यहां की रीत सूनी है

यहां की रीत गंगा-जमुनी है

तो राम लपक जा

रगों की पिचकारी लेकर

देख जब रहीम अकेला जाए

चल तनिक रगों से खेला जाए

यहां जब अजानों के बाद

भजन व कीर्तन गूंजे हैं

यूं लगे केसरिया आसमान

हरियाली धरती को आ चूमे है

तो चल हरा भी लेले

चल केसरिया भी ले ले

घोल दे बाल्टी गुलालों की

सरों पे सबके उड़ेला जाए

चल तनिक रगों से खेला जाए

होकर फारिग नमाजों से।