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होली का बेसब्री से इंतजार करते हैं ये कपल्स, क्योंकि इसी दिन मिली थीं इनकी नजरें और दे बैठे थे दिल

संतोष कुमार ने बताया कि 2003 मैं अपने दोस्तों के साथ होली के लिए सासाराम गया था। वह होली आज तक नहीं भूल पाया हूं,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:50 AM IST

होली का बेसब्री से इंतजार करते हैं ये कपल्स, क्योंकि इसी दिन मिली थीं इनकी नजरें और दे बैठे थे दिल
संतोष कुमार ने बताया कि 2003 मैं अपने दोस्तों के साथ होली के लिए सासाराम गया था। वह होली आज तक नहीं भूल पाया हूं, क्योंकि उसी दिन मुझे मेरी लाइफ पार्टनर रंजना सिंह मिली। होलिका दहन की रात मैंने मेरी बेटर हाफ रंजना को पहली बार देखा था। वह लाल चूड़ीदार सूट पहने पूजा करने आई थी। मैं उनको देखता ही रह गया। नजर नहीं हट रही थी उनकी मुस्कुराहट से। मैं उनको बिना नजर हटाए देख ही रह था कि उन्होंने भी मुझे देख लिया। एक बार के लिए तो मैं डर ही गया था, कि कही वो मुझे गलत न समझ लें। दूसरे दिन होली खेलने मोहल्ले में निकला ही था, कि फिर से रंजना दिख गई। हम दोनों ने एक-दूसरेक देख स्माइल की। इसके बाद मैंने तुरंत अपने दोस्त बिट्टू से सारी डिटेल ली और अपनी फैमिली को बताया। मेरी फैमिली होली के पांचवें दिन ही इनकी फैमिली से मिली। 2004 में होली के पांचवें दिन 6 मार्च को हमारी लव कम अरेंज मैरिज हुई।

होली का क्रश

रांची. रंगों का त्योहार होली वैसे तो सबके लिए खास होता है, पर रांची के इन कपल्स को होली एक अलग सेलिब्रेशन का मौका भी देती है। क्योंकि इसी त्योहार पर ये पहली बार मिले और एक-दूसरे को दिल दे बैठे। इनमें से एक ने होली पर ही शादी भी की। सिटी भास्कर के साथ खासतौर पर इन्होंने शेयर की अपनी जिंदगी की प्यारभरी कहानी।

होली पर ही अपनी बेटर हाफ को पहली बार देखा

होली पर हुआ लव एट फर्स्ट साइट, फिर शादी इसलिए इनकी जिंदगी में होली ही सबसे खास

खाना देने स्टेशन आई, नजरें मिलीं और फिर शादी

प्रीति दुबे ने बताया कि 2002 में होली आने वाली थी। तब हम मुगलसराय में रहते थे। होली के एक दिन पापा बोले कि आज दिल्ली से मित्र का बेटा कुंदन अपने घर रांची जा रहा है, उसे खाना पहुंचाने स्टेशन जाना है। पापा बोले-तुम भी हमारे साथ स्टेशन चलो। मैं अनमने मन से स्टेशन पहुंची। ट्रेन आई तो मम्मी-पापा आरक्षित डिब्बे की ओर गए। कुंदन उतरे और मम्मी-पापा को प्रणाम किया। पापा ने मुझसे परिचय कराया। उन्होंने मुझे देखा और हल्की-सी मुस्कान बिखेरी। वे पापा से बातें कर रहे थे, लेकिन नजरें मेरी ओर ही थीं। पता नहीं क्यों मुझे उनका इस तरह देखना अच्छा लग रहा था। 15 मिनट बाद वे ट्रेन पर चढ़े और मुझे बाय किया। दूसरे दिन हम होली खेलने में मगन थे, तभी फोन आया, पापा बहुत खुश दिख रहे थे। मम्मी मेरे पास आकर बोलीं तुम्हारी शादी फिक्स हो गई है। मैंने आश्चर्य से पूछा, किससे? वे बोलीं-कल जिससे स्टेशन में मिली थी। मैं शरमा गई, लेकिन खुश थी कि मेरा पहला क्रश ही मेरा जीवन साथी बन रहा है।

2011 में होली पर मिले, 2017 में होली पर शादी

आशीष तिवारी और प्रीति के प्यार की शुरुआत भी होली पर हुई। आशीष ने बताया कि 2011 में होली मनाने के लिए डाल्टनगंज से रांची में चाचा घर रातू रोड आया था। प्रीति का घर पास में ही था। होली के दिन मैं घर की छत पर सबके साथ होली खेल रहा था, तभी एक लड़की (प्रीति) हाथ में कुछ लिए मेरे घर पर आई। मैं उसे देखता ही रह गया। फिर जब तक मैं चाचा के घर था, अक्सर उसे देखने उसके घर आसपास घूमता रहता था। जब मैं वापस चला गया तो फिर उससे मिलने का दिल किया। मैं फिर चाचा के घर आया। प्रीति को फेसबुक में ढूंढा। तब शुरू हुआ हमारी दोस्ती और प्यार का सिलसिला। फिर शुरू हुआ फैमिली के सामने मिन्नतें करना। मम्मी-पापा को अपनी फीलिंग्स समझाने में हमें काफी टाइम नहीं लगा। लेकिन प्रीति चाहती थी की हमारी शादी होली के आसपास ही हो। तब हम लोगों ने ऐसा ही तय किया और 9 मार्च 2017 को होली के दिन ही हमारी शादी हुई।

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