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ओझा ने कहा था-बच्चा जिंदा हो जाएगा इसलिए तीन दिन घर में रखा शव

सिमडेगा में शुक्रवार को बीमारी से हुई थी 15 साल के बच्चे की मौत।

तबरेज आलम। | Last Modified - Nov 06, 2017, 07:25 AM IST

  • ओझा ने कहा था-बच्चा जिंदा हो जाएगा इसलिए तीन दिन घर में रखा शव
    सिमडेगा(रांची)।झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अभी भी अंधविश्वास की जकड़न से मुक्त नहीं हो पाए हैं। डायन-बिसाही, ओझा-गुणी और भूत-प्रेत का डर उन पर किस कदर हावी है, इसका ताजा उदाहरण सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड के भंडारटोली गांव में दिखा।
    - परिवारवालों ने अपने 15 साल के मृत बच्चे का शव तीन दिन तक घर में रखा, क्योंकि ओझा ने कहा था कि वह जिंदा हो जाएगा। रविवार को जब केरेया के मुखिया शिवराज बड़ाईक को इसकी सूचना मिली तो वे गांव पहुंचे। परिजनों को समझाया। फिर वे बच्चे के शव को दफन करने को तैयार हुआ। दोपहर बाद शव दफनाया गया।
    - केरेया पाहनटोली स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र 15 साल का पृथ्वीराज कुमार नायक अपनी दादी शांति देवी के साथ भंडारटोली गांव में रहता था। मां नीरावती देवी दिल्ली में नौकरी करती हैं। पिता नहीं हैं। कुछ दिन पहले पृथ्वीराज ने दादी से पेट दर्द की शिकायत की।
    - दादी उसे अस्पताल की बजाय ओझा अंधेरियस लुगुन के पास डांगटोली ले गया। ओझा ने बच्चे के गले में ताबीज पहना दी। बुधवार को पृथ्वीराज के पेट में फिर तेज दर्द हुआ। इस बार भी उसे ओझा के पास ले गए और झाड़-फूंक कराते रहे।
    - ओझा ने कहा कि बच्चे को भूतों ने पकड़ लिया है। उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। पर चाचा राजेश नायक और मुकेश नायक सहित किसी भी ग्रामीणों ने उसे डॉक्टर के पास ले जाने की सलाह नहीं दी। क्योंकि सभी को आेझा की कही बातों पर पूरा भरोसा था।
    - गुरुवार को उल्टी-दस्त हुई और शुक्रवार सुबह चार बजे उसने दम तोड़ दिया। परिवार वालों ने फिर उस ओझा को बुलाया। दादी के मुताबिक ओझा अंधेरियस ने उससे कहा कि बच्चे पर चार भूत हावी हैं। ताजा फल लाओ। भूतों को खिलाएंगे और उसे भगाएंगे।
    - ओझा बार-बार कहता रहा कि इंतजार करो, बच्चे की जान वापस आ जाएगी। इसी इंतजार में शव घर में पड़ा था। परिजन ही नहीं, गांव के ज्यादातर लोगों को उम्मीद थी कि बच्चा जिंदा हो जाएगा।
    मां बोलीं-गरीबी के कारण अस्पताल नहीं ले जा सके
    - बेटे की मौत की सूचना मिलने पर मां नीरावती शनिवार को गांव पहुंचीं। उन्होंने कहा-पति की मौत के बाद गरीबी के कारण मैं दिल्ली में मजदूरी करती हूं। मेरे चार छोटे-छोटे बच्चे हैं।
    - 15 साल का पृथ्वी, 13 साल की चांदनी, 10 साल की सपना और आठ साल का बादल। इन्हें घर में दादी ही पाल रही हैं। गरीबी के कारण मेरी सास पृथ्वी को इलाज के लिए शहर नहीं ले जा पाई। इसी कारण गांव में ओझा अंधेरियस लुगुन से इलाज करा रही थीं।
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