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इंटरनेट पर छाई इनकी आवाज, बचपन में भजन अब भोजपुरी में कर रहीं कमाल

इनकी आवाज की खनक और सुर को देखकर भोजपुरी संगीत के क्षेत्र में अगली शारदा सिन्हा देख रहे हैं।

Dainik Bhaskar

Mar 22, 2014, 12:22 AM IST
chandan tiwari singer from bokaro jharkhand

धनबाद. बोकारो में पली-बढ़ी हैं चंदन तिवारी मूलरूप से बिहार के भोजपुर जिले से संबंध रखती हैं। चंदन संगीत की पहली गुरू अपनी मां रेखा तिवारी को मानती हैं। इन्हों ने बाद में प्रयागराज संगीत समिति इलाहाबाद से शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा ली है। बचपन से ही स्कूल के कार्यक्रमों और मंदिरों में भजन गाया करती थीं। तब यह सब बचपन के शौक की तरह था, लेकिन बाद में संगीत ही जीवन का मकसद बन गया। संगीत के जानकार उनकी आवाज की खनक और सुर को देखकर भोजपुरी संगीत के क्षेत्र में अगली शारदा सिन्हा देख रहे हैं।

महुआ टीवी के सुर संग्राम और जिला टॉप कार्यक्रम में अपनी गायकी का जलवा बिखेरने वाली बोकारो की चंदन तिवारी ने कम समय में ही लोकसंगीत के चाहने वालों के दिलों में अपनी खास जगह बना ली है। इन दिनों चंदन अपने नए प्रोजेक्ट की वजह से भोजपुरी संगीत जगत में सुर्खियों में हैं। चंदन ने पूरबी संगीत के बेताज बादशाह महेंद्र मिसिर के चुनिंदा गीतों को लेकर पुरबिया तान नाम से गायन की ठेठ शैली में एक नया एलबम किया है, जिसका एक गीत होली के एक दिन पहले महेंद्र मिसिर की जयंती पर लोकराग डॉट कॉम और पुरबिया तान डॉट कॉम वेबसाइट पर जारी किया गया। जिसके बाद वे काफी फेमस हो गई। उनके गाने ने इंटरनेट पर धमाल मचा दिया। इस गाने को महज दो दिनों में 38 हजार लोगों ने ऑनलाइन सुना। यह अपने आप में रिकॉर्ड है।

गे की स्लाइड में पढि़ए चंदन तिवारी से सीधी बात...

chandan tiwari singer from bokaro jharkhand

चंदन तिवारी से सीधी बात- आपने गायन के लिए भोजपुरी संगीत ही क्यों चुना?

मुझे सभी तरह के गाने पसंद हैं। लेकिन लोक गायन से विशेषकर भोजपुरी से गहरा जुड़ाव है। एक तो भोजपुरी इलाके से हूं दूसरे अपनी मां से बचपन से ही भोजपुरी गाने सुनती आई हूं। लेकिन सच कहूं तो मुझे खुद भी लोक गायन में ज्यादा मजा आता है। वैसे भी सभी संगीत की जननी लोक संगीत ही है।

अश्लीलता के कारण लोग भोजपुरी गीत सुनते ही नहीं हैं। ऐसे में इस गायन का क्या महत्व है?

सिर्फ भोजपुरी ही नहीं दूसरी भाषाओं के लोकगीतों के साथ भी ऐसी विडंबना जुड़ी है। शुरू से लोकगीतों में दो तरह का गायन होता आ रहा है। लेकिन खराब के साथ हमेशा अच्छे और सार्थक गायन भी होते रहे हैं। अब श्रोताओं को तय करना होता  है कि वे कैसे गायन को ज्यादा महत्व देते हैं। श्रोता अच्छे गीतों की कद्र शुरू करेंगे तो खुद-ब-खुद अच्छे गाने की होड़ मचेगी। और तब यह अश्लीलता की बात खुद ही दूर हो जाएगी।

आगे की स्लाइड में पढ़िए गानों में अश्लीलता के लिए कौन है जिम्मेवार...

chandan tiwari singer from bokaro jharkhand

तो आप मानती हैं कि अश्लीलता के लिए श्रोता ही जिम्मेवार हैं?

मैं ऐसा नहीं कह रही कि सिर्फ श्रोता ही जिम्मेवार हैं। गीतकार, म्यूजिक कंपनियां, गायक-गायिकाएं सभी जिम्मेवार हैं। लेकिन श्रोता की जिम्मेवारी बड़ी है। मैं कह रही हूं कि आप होटल-रेस्टोरेंट में जाते हैं, तो जाने कितने तरह के व्यंजन मेन्यू कार्ड में दर्ज होते हैं। आप अपनी पसंद का कोई व्यंजन चुनते हैं, न कि वेटर की पसंद से। म्यूजिक कंपनियां भी तरह-तरह के मेन्यू आपके सामने रखते हैं, यह आप पर है कि किसे सेलेक्ट करें, किसे रिजेक्ट। श्रोताओं को रिएक्ट करना होगा, श्रोता रिएक्ट करेंगे तो गायकी अपने सही राह पर रहेगी।

इन दिनों नया क्या कर रही हैं?

कलाकारों के जीवन में रोजाना कुछ न कुछ नया होता रहता है, सुनना-सुनाना, लिखना-गाना। वैसे पिछले कुछ माह से महुआ टीवी के दो खास कार्यक्रमों में व्यस्त रही। पहले जिला टॉप में और बाद में सुर संग्राम में। अभी हाल ही में दिल्ली में बिग मैजिक के कार्यक्रम से लौटी हूं। लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान अपने नए म्यूजिक एलबम पर रहा है, जो पुरबिया तान के नाम से उपलब्ध है। यह इसी नाम के वेबसाइट पर भी मौजूद है।

आगे की स्लाइड में पढ़िए आगे क्या है खास...

chandan tiwari singer from bokaro jharkhand

इस प्रोजेक्ट में क्या खास है, बताएं?

यह अपने आप में नया प्रयोग है। इस एलबम में कुल आठ गीत हैं, जिनमें सात गीत पूरबी के बादशाह कहे जानेवाले महेंद्र मिसिर जी के हैं और एक गीत भिखारी ठाकुर जी का लिखा है। सबसे खास बात यह है कि महेंद्र मिसिर के प्रकाशित 1000 गीतों में से सात का चयन किया गया है, जो अलग-अलग रेंज के हैं।

आगे की स्लाइड में पढ़िए वेबसाइट के माध्यम से ही क्यों जारी किया...

chandan tiwari singer from bokaro jharkhand

वेबसाइट के माध्यम से ही क्यों जारी किया? 

भोजपुरी के श्रोता दुनिया के कोने-कोने में हैं। मेरा प्रयास है कि ये गाने उन श्रोताओं तक पहुंचें। वैसे यह जमाना डिजिटल मीडिया का भी है। गांव के भी श्रोता पेन ड्राइव और मेमोरी चिप के माध्यम से गाना सुनते हैं। मैं आपको बताऊं कि लोकराग डॉट कॉम और पुरबिया तान डॉट कॉम पर एक गाना होली के एक दिन पहले महेंद्र मिसिर जी के जन्म दिन पर जारी हुआ। और अगले दो दिनों में ही 38 हजार लोगों ने इस एक गीत को सुना। अब आप समझ सकते हैं, हमने इस माध्यम को क्यों चुना। इस गीत के बाद ही मुझे बेहतर ऑफर मिलने लगे हैं।

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