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परहेज, प्रार्थना व दान चालीसा के मूल स्तंभ : बिशप मसकरेन्हस

2 वर्ष पहले
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सीबीसीआई के जनरल सेक्रेटरी बिशप थियोडोर मसकरेन्हस ने बताया कि चालीसा उपवास काल सभी मसीहियों के लिए पास्का पर्व की आध्यात्मिक तैयारी है। यह आध्यात्मिक तैयारी में उपवास का तात्पर्य अन्न व जल का परित्याग करना नहीं बल्कि अपने में जो बुराईयां व दोष हैं, उसका परित्याग कर मन, वचन और कर्म की पवित्रता में बढ़ना है। चालीसा उपवासकाल का मूल स्तंभ पश्चाताप, परहेज, उपवास-प्रार्थना व दीनहीन, लाचार व निसहाय की सेवा में उदारतापूर्वक दान है।

पास्का या ईस्टर मसीहियों का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। चालीसा महाउपवास काल के चालीस दिन की त्याग-तपस्या, प्रार्थना-उपवास के आध्यात्मिक नवीकरण की अभ्यास की अवधि पास्का पर्व के साथ समाप्त होती है, जबकि चालीस दिन की आध्यात्मिक तैयारी वाला यह चालीसा राख बुध या ऐश वेडनेसडे के साथ शुरू होता है। उन्होंने कहा यह समय मंथन करने का समय है

गौरतलब है कि पास्का आनंद और संतोष का पर्व है, लेकिन इसकी शुरुआत राख बुध के साथ होना भी मसीहियों को विशेष संदेश देता है। इस चालीसा में उपवास, प्रार्थना व दान इन तीनों का विशेष मतलब है। प्रार्थना का तात्पर्य सच्चे मन और हृदय से प्रभु की संगति करना है। इससे मनुष्य का संबंध प्रभु के साथ रिश्तों को बनाता है और उसे मजबूती प्रदान करता है।

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