आचार्य इंदू प्रकाश बोले-श्राद्ध कर्ता और परिवार को पितृदोष से मिलती है मुक्ति

Ranchi News - रांची टीवी फेम आचार्य इंदू प्रकाश इन दिनों रांची में हैं। वे मखीजा टावर, मेनरोड स्थित अलंकार ज्वेलर्स में 13 से 15...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:56 AM IST
Ranchi News - acharya indu prakash said shraddha and family get liberation from pitridosh
रांची टीवी फेम आचार्य इंदू प्रकाश इन दिनों रांची में हैं। वे मखीजा टावर, मेनरोड स्थित अलंकार ज्वेलर्स में 13 से 15 सितंबर तक सुख, शांति और समृद्धि के उपाय बता रहे हैं। उन्होंने श्राद्ध कर्म पर विशेष बातचीत की। आपके पूर्वजों का स्वर्गवास जिस तिथि को हुआ हो उसी तिथि को श्राद्ध करना उचित है। लेकिन नाना-नानी का श्राद्ध, जिनकी मृत्यु कुंवारेपन में हुई हो उनका श्राद्ध, सुहागिन स्त्रियों का श्राद्ध, जिन्होंने मृत्यु से पूर्व सन्यास ले लिया हो उनका श्राद्ध, कम आयु के बच्चों का श्राद्ध, हथियार से मारे गए लोगों का श्राद्ध या जिन्होंने आत्महत्या की हो उनके श्राद्ध के लिए अलग-अलग तिथियां निर्धारित है।

वहीं, जिनके स्वर्गवास की तिथि ज्ञात न हो उनके लिए भी श्राद्ध का दिन निर्धारित है। उन्होंने कहा कि श्राद्ध कर्म करने से पितरों को तो मोक्ष की प्राप्ति होती ही है साथ ही श्राद्ध कर्ता व उसके परिवार को पितृदोष से मुक्ति भी मिलती है। कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा और मूल नक्षत्र में श्राद्ध करना शुभ फलदायी माना गया है। उन्होंने श्राद्ध पक्ष के प्रत्येक 16 दिनों के दौरान किनका श्राद्ध करना चाहिए और इससे श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को क्या फल मिलता है, इसके बारे में बताया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में पितृदोष को सबसे बड़ा दोष माना गया है। कुंडली का नौंवा घर धर्म का होता है। ये घर पिता का भी माना गया है।

प्रोष्ठपदी पूर्णिमा से शुरू हुए श्राद्ध 29 तक चलेंगे

रांची | प्रोष्ठपदी पूर्णिमा के साथ शुक्रवार से श्राद्ध शुरू हो गए हैं। इस दौरान पितरों के लिए जो कुछ भी श्रद्धापूर्वक अर्पण किया जाएगा, उसे अग्नि देवता उनके पास पहुंचा देते हैं। इस कारण सूर्यास्त के बाद यह अनुष्ठान नहीं किया जाता है। श्राद्ध पक्ष 13 सितंबर से शुरू होकर 28 सितंबर तक चलेगा। ब्रह्म पुराण के श्राद्ध प्रकाश में श्राद्ध पक्ष के महत्व का वर्णन है, जिसमें कहा गया है कि जो उचित काल, पात्र और स्थान के अनुसार शास्त्रोत विधि से पितरों को लक्ष्य करके श्रद्धापूर्वक ब्राह्मणों को दिया जाता है उसे श्राद्ध कहते हैं। आचार्य पंडित श्याम सुंदर भारद्वाज के अनुसार हिंदू ग्रंथ ऋग्वेद में पितृ तीन श्रेणियों के बताए गए हैं। इनमें निम्न, मध्यम और उच्च हैं। इसका तीन तैतरीय ब्राह्मण में उल्लेख है कि पितर लोग जिस लोक में निवास करते हैं, वह भू-लोक और अंतरिक्ष के बाद है। बौधायन धर्मसूत्र में के अनुसार जो व्यक्ति पितृ कर्म करता है, उसे लंबी आयु, स्वर्ग, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है। कई एेसे तीर्थस्थल हैं जहां श्राद्ध, पिंडदान का कार्य किया जाता है, लेकिन उनमें गया को सबसे सर्वश्रेष्ठ कहा गया है।

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