झारखंड / महाराष्ट्र में कांग्रेस ने हॉर्स ट्रेडिंग किया, अस्तबल देकर कुर्सी खरीद लिया: अमित शाह

अमित शाह। (फाइल फोटो) अमित शाह। (फाइल फोटो)
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अमित शाह। (फाइल फोटो)अमित शाह। (फाइल फोटो)

  • शाह ने कहा- हमने रैलियों में कहा था- देवेंद्र फडनवीस मुख्यमंत्री होंगे, शिवसेना ने कभी डिनाय नहीं किया
  • केंद्रीय मंत्री ने गुरुवार को रांची मे एक निजी न्यूज चैनल से साक्षात्कार में कई मुद्दों पर की बात
  • गठबंधन पर भी बोले शाह, कहा- पूर्ण बहुमत होने के बाद भी हमने गठबंधन धर्म निभाया
  • शाह ने कहा- झारखंड में पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी, लेकिन आजसू भी साथ होगी

दैनिक भास्कर

Nov 28, 2019, 07:06 PM IST

रांची. केंद्रीय गृह मंत्री सह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस ने हॉर्स ट्रेडिंग की है। एक दो घोड़े नहीं बल्कि पूरा अस्तबल देकर कुर्सी खरीदा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान हमने कई रैलियों में कहा था कि गठबंधन को बहुमत आया तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ही होंगे। उस वक्त किसी ने इनकार नहीं किया। अमित शाह गुरुवार को रांची में एक निजी न्यूज चैनल से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने महाराष्ट्र के अलावा, झारखंड विधानसभा चुनाव, गठबंधन सहित कई मुद्दों पर बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश...

सवाल- तीन तलाक हो राम मंदिर हो तमाम चुनौतियों को बतौर गृह मंत्री आपने पारित कर दिया, आगे की चुनौतियों को आप कैसे देखते हैं?
जवाब-
चुनौतियां तो हमेशा रहती है, इतने बड़े देश के अंदर। मैं मानता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम हर चुनौती का सामना करने के लिए और देश को आगे ले जाने के लिए सक्षम है। 

सवाल- सरकार भले ही आगे बढ़ती गई हो लेकिन कुछ उतार-चढ़ाव भी आए। हरियाणा के अंदर बीजेपी की वापसी गठबंधन के साथ हुई। महराष्ट्र के अंदर वापसी हुई लेकिन गठबंधन का साथी छूट गया। अब झारखंड का चुनाव है। इसे कैसे देखते हैं आप?
जवाब-
झारखंड का जहां तक सवाल है 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव और 2019 का लोकसभा का चुनाव। झारखंड की जनता मजबूती के साथ भाजपा के साथ खड़ी है। झारखंड में कई सालों से झारखंड की रचना के लिए आंदलोन चला युवा शहीद हुए। भाजपा ने पहले से ही छोटे राज्यों का समर्थन किया। कांग्रेस सत्ता में थी। झारखंड का निर्माण नहीं हुई। जब केंद्र में भाजपा सरकार बनी तो झारखंड बना। भाजपा का झारखंड से रिश्ता इसके जन्म से है। 2014 से 19 तक नरेंद्र मोदी की अगुवाई में रघुवर दास ने संवारने का काम किया। झारखंड में आज जो चुनावी परिस्थिति बनी है, झामुमो जो कि झारखंड आंदोलन के वक्त एक प्रमुख पार्टी रही वो सत्ता प्राप्त करने के लिए झारखंड के युवाओं पर गोली चलाने वालों के साथ खड़ी है। जब ऐसा होता है तो झारखंड की जनता और आदिवासी अपने आप को छला महसूस करती है। केवल और केवल सत्ता प्राप्त करने के लिए ये गठबंधन हुआ है। भाजपा झारखंड के विकास के लिए कटिबद्ध है। नरेंद्र मोदी ने झारखंड के विकास के लिए बहुत प्रयास किया। 10 साल केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही। झारखंड को 55 हजार 200 करोड़ दिया था। नरेंद्र मोदी ने पांच साल के अंदर तीन लाख छह हजार करोड़ रुपए दिया। चार नए एयरपोर्ट, पांच नए मेडिकल कॉलेज दिए हैं। दो बन चुके हैं, तीन बन रहे हैं। सिंदरी खाद कारखाना को फिर से जीवित किया जा रहा है। चार हजार मेगावाट का पावर प्लांट लगाया गया है। बॉक्साइट और एलुमुनियम का कारखाना लगाने का काम किया जा रहा है। झारखंड में 33 लाख घरों में गैस पहुंचाया गया है। 40 लाख घरों के अंदर शौचालय पहुंचाया है। 57 लाख परिवार को पांच लाख रुपए तक का आयुष्मान कार्ड दिया है। पांच साल में झारखंड सरकार ने 22 हजार किलोमीटर रोड बनाया है।  

सवाल- आपका यहां एक गठबंधन था, पुराने सहयोगी थे आजसू। उससे आपका गठबंधन टूट गया। क्या आपको लगता है कि उसका कोई झटका होगा चुनाव में?
जवाब-
मुझे विश्वास है कि चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा और आजसू फिर से एक बार साथ होंगे। मुझे विश्वास है कि बिना किसी के समर्थन के पूर्ण बहुमत की भाजपा की सरकार झारखंड में बनेगी। मगर आजसू भी हमारे साथ होगी। स्वाभाविक रूप से रघुवर दास चेहरा होंगे।

सवाल- पूरे देश की निगाहें महाराष्ट्र पर हैं, महाराष्ट्र में ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी और सेना की सरकार नहीं बनी?
जवाब-
पूरे देश ने महाराष्ट्र में क्या हुआ वो देखा है। महाराष्ट्र के अंदर भाजपा और सेना गठबंधन के तहत विधानसभा चुनाव लड़े। जहां शिवसेना लड़ी वहां हम नहीं लड़े, जहां हम लड़े वहां शिवसेना नहीं लड़ी। चुनाव के नतीजे आए, भाजपा को 105 सीटें जबकि शिवसेना को 56 सीटें मिली। जीत का प्रतिशत भी देखेंगे तो जितनी सीटों पर हम लड़े थे उसमें से 70 प्रतिशत सीटें हम जीते। शिवसेना जीतने पर लड़ी थी उसमें से वो 44 प्रतिशत सीटें जीते। मैंडेट भाजपा के पक्ष में था। भाजपा के नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस के नेतृत्व में हम चुनाव लड़े। जैसे ही परिणाम आया, शिवसेना ने अलग-अलग कंडिशन्स डालने शुरू कर दिया। सार्वजनिक रूप से हमने स्टैंड लिया कि मुख्यमंत्री हमारा होगा। प्रधानमंत्री मोदी और मैंने कई सारे रैलियों में कहा... कई रैलियों में शिवसेना के नेता थे, खुद उद्धव ठाकरे भी थे। हमने कहा कि देवेंद्र फडनवीस के नेतृत्व में हम चुनाव लड़े हैं, नतीजों के बाद गठबंधन का बहुमत आता है तो देवेंद्र फडनवीस मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने कभी डिनाय नहीं किया। उन्हें भी पता था कि डिनाय करके वे लड़ नहीं सकते थे। क्योंकि उनके विधायकों के क्षेत्र में भी उनके नेता से बड़े कटआउट मोदी के लगते थे। वोट तो मोदी के नाम से ही मिला था। तबतक कोई नहीं बोला। नतीजों के बाद उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हमारा होगा। मैं मानता हूं कि ये अनैतिक है और हमने सरेंडर करने से मना कर दिया। 

सवाल- नाम आपका लिया गया कि अमित शाह वादा करके मुकर गए?
जवाब-
मैंने कभी भी ऐसा वादा नहीं किया था। मान लीजिए वादा हुआ.. तो हम इतना गरज-गरज कर बोलते थे... आप एक टेलिफोन तो कर देते। दूसरे दिन सभा में बोल देते कि ऐसा तय हुआ है। 

सवाल- आपको लगता है कि शिवसेना ने तय कर लिया था कि चुनाव के बाद भाजपा के साथ सरकार नहीं बनानी है?
जवाब-
मैं शिवसेना पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि जो तय नहीं हुआ था... डिमांड उन्होंने किया जो हमें मंजूर नहीं था। हमने सरेंडर होने से न बोल दिया। यही कारण है कि आज विचारधारा के विपरीत सरकार बनी है।

सवाल- अजीत पवार के साथ आपने साझा सरकार बनाने का जो अटेम्पट किया...आपको क्या लगता है कि ये एक मिस कैलकुलेशन था?
जवाब-
कई बार सोचकर जो राजनीतिक कदम उठाए जाते हैं, कुछ घटनाएं ऐसी होती है जिसमें वो सोच इम्पलिमेंट नहीं होती है। आप इसे मिसकैल्कुलेशन कहो या जो कहो लेकिन हमने हमारी विचारधारा को अक्षुण रखा। हमने हमारी विचारधारा के साथ समझौता नहीं किया। आज शिवसेना के साथ स्थित है, कांग्रेस कंडिशन लगा रही है। 23 तारीख को उद्धव ठाकरे राम मंदिर दर्शन करने जाने वाले थे, नहीं गए। क्या जवाब देंगे। जो कांग्रेस हमेशा शिवसेना का विरोध करती थी। आज सत्ता प्राप्त करने के लिए उनके साथ बैठे हैं। सोनिया और राहुल क्या जवाब देंगे? कम से कम हमने ऐसा नहीं किया। हमने हमारी पार्टी की विचारधारा को अक्षुण रखने का काम किया। हमने जनता से मिले मैंडेट का शुद्ध रूप से इम्पलिमेंटेशन करने का प्रयास किया है। न हॉर्स ट्रेडिंग की है।

सवाल- आप पर आरोप लगता है कि आपने अजीत पवार को साथ लेकर हॉर्स ट्रेडिंग करने की कोशिश की लेकिन कर नहीं पाए?
जवाब-
हमने हॉर्स ट्रेडिंग नहीं किया है। हॉर्स ट्रेडिंग तो कांग्रेस ने किया है। कांग्रेस ने एक-दो घोड़े नहीं पूरा अस्तबल देकर ही कुर्सी खरीद लिया। कांग्रेस और एनसीपी जो गठबंधन में लड़े थे, उनकी 100 सीटें हैं। आपने शिवसेना का मुख्यमंत्री क्यों स्वीकार किया, किसी को जवाब दे सकते हो। अगर हिम्मत है, ये नैतिकता का गठबंधन है महाराष्ट्र के विकास का गठबंधन है तो कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनाओ... देखता हूं कि शिवसेना मदद करती है या नहीं करती है। कोई कॉमन मिनिमम प्रोग्राम नहीं है। केवल और केवल सत्ता की बागबटांई में समय गया है। किसे कौन सा मंत्रालय मिलेगा, कितने मंत्रालय मिलेंगे, कौन मंत्री बनेगा, कौन मुख्यमंत्री बनेगा, कौन उपमुख्यमंत्री बनेगा... इसी में समय गया है। 

सवाल- आपको नहीं लगता चाचा-भतीजे की लड़ाई में, शरद और अजीत पवार की लड़ाई में नुकसान आपका हो गया?
जवाब-
हमारा नुकसान शरद और अजीत पवार की वजह से नहीं हुआ। वो तो हमारे खिलाफ ही चुनाव लड़े थे। हमारा नुकसान शिवसेना की वजह से हुआ है। हमारे साथी ने चुनाव के बाद मन बदला, इससे हमारा नुकसान हुआ। हमने तो कभी कैंप नहीं लगाया। हमारे साथी तो खुले थे। हमें हमारे एमएल पर भरोसा था, सारे अपने-अपने घर में थे। तीनों पार्टियों ने कैंप लगा दिया, क्यों लगाना पड़ा भाई...क्योंकि वे विचारधारा के खिलाफ जा रहे थे। इसलिए हमारे एमएलए बगावत करेंगे, हमारे एमएलए मानेंगे नहीं वो उनके मन में शंका थी, इसलिए कैंप लगाया गया। 

सवाल- आपने अजीत पवार को डिप्टी सीएम बना दिया, आपने और देवेंद्र फडनवीस ने अपनी रैलियों में अजीत पवार पर काफी आरोप लगाए थे? 
जवाब-
अगर ये सरकार चलती भी तो कही पर भी वो जांचों के अंदर कोई समझौता नहीं होता, न पांच साल हुआ था। वो जांच चलती ही रही। भाजपा ने पांच साल में कोई समझौता नहीं किया। 

सवाल- क्या आपको लगता है कि शिवसेना से आगे कोई बात बन सकती है?
जवाब-
स्वाभाविक रूप से जब इतना बड़ा घटनाक्रम या वादाखिलाफी होती है तो कैडर के अंदर एक रोष और गुस्सा होता है। अभी के स्तर पर मेरे लिए कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। 

सवाल- पहले भी शिवसेना से रिश्ते बनते बिगड़ते रहे, लेकिन इस बार रिश्ते इतने बिगड़ गए कि शिवसेना ने अपने विचारधारा के साथ समझौता कर लिया.. क्या आपको नहीं लगता है कि 30 साल पुराना गठबंधन टूटने का दुख आपको भी होगा?
जवाब-
मेरे दुख करने से क्या हो सकता है, मैंने तो नहीं तोड़ा न। कहीं और का सवाल आप मुझसे पूछ रहे हो।

सवाल- महाराष्ट्र में पहले राष्ट्रपति शासन पर सवाल खड़े हुए, फिर जिस तरह से शपथ दिलाई गई उसके बाद राज्यपाल पर भी सवाल खड़े हुए। सोनिया गांधी ने आज ही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा महाराष्ट्र में एक शर्मनाक प्रयास हुआ?
जवाब-
शर्मनाक प्रयास तो यह है कि उनकी 100 सीट होने के बाद भी मुख्यमंत्री पद का लालच देकर किसी और को मुख्यमंत्री बनाया। हमारा शर्मनाक प्रयास नहीं था, हमारे पास मैंडेट था, सबसे बड़ी पार्टी थे, सबसे ज्यादा वोट मिले थे, सबसे ज्यादा सीट थी हमारी। हमारा कोई शर्मनाक प्रयास नहीं था। कल (बुधवार) मैं संसद के अंदर था। किसी कांग्रेस नेता ने हमारे एमपी कहा कि हम जीत गए। हमने कहा... आप जीते हम जीते हमें मालूम नहीं लेकिन हमने आपसे जयश्रीराम बोला ही नहीं। अब देश की जनता को तय करना है कि कौन जीता है। 

सवाल- 1989 से लेकर 2014 तक यानी करीब-करीब 25 साल तक इस देश ने गठबंधन की सरकार देखी है। 2014 में मोदी सरकार ने ये मिथक तोड़ दिया और 2019 में धमकेदार वापसी हुई। लेकिन हमने जो हरियाणा में देखा... महाराष्ट्र में बड़े गठबंधन को वोट मिले लेकिन पार्टी ने पाला बदल लिया। जिस गठबंधन को वोट मिला, उस गठबंधन से निकल गई। क्या आपको लगता है कि भारत के अंदर गठबंधन की सरकारों की वापसी हो रही है? खासकर राज्यों में।
जवाब-
हमें दो बार बहुमत मिला, फिर भी हमने गठबंधन की सरकार बनाई। हमने कभी गठबंधन धर्म नहीं तोड़ा। पूर्ण बहुमत मिला तो भी शिवसेना हमारे सरकार में सदस्य थी, लोजपा थी, अपना दल थी, नॉर्थ इस्ट के साथियों को भी रखा था। भाजपा ने हमेशा गठबंधन धर्म निभाया है। न केवल केंद्र के अंदर.... यूपी, असाम, त्रिपुरा में पूर्ण बहुमत की सरकार है लेकिन हमने गठबंधन की सरकार बनाई। भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन धर्म निभाने का लंबा इतिहास रहा है। झारखंड और बंगाल में चुनाव की गिनती के बाद सारी अटकलें खत्म हो जाएगी। इन दोनों राज्यों में भी हम जीते हैं। 

सवाल- हरियाणा में आपका पूर्ण बहुमत था लेकिन इस बार दुष्यंत चौटाला को आपको डिप्टी सीएम बनाना पड़ा।
जवाब-
वहां राजनीतिक परिस्थिति बटी थी। सब अलग-अलग लड़े थे, उसमें काफी चीजें जुड़ती गई। लेकिन भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, भाजपा को सबसे ज्यादा वोट मिले हैं तो मुख्यमंत्री भी भाजपा का है।

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