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सरकारी स्कूल में तीसरी कक्षा के 80% बच्चों को नहीं आता है सामान्य गणित

एक वर्ष पहले
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सिम्बॉलिक इमेज। - Dainik Bhaskar
सिम्बॉलिक इमेज।
  • 24 राज्यों के 26 जिलों में किए गए सर्वे रिपोर्ट में रामगढ़ भी शामिल
  • देशभर में प्री-प्राइमरी से तीसरी कक्षा के बच्चों पर किया गया सर्वे

रांची. जिम्मेदार भले राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लाख दावे करते हों, लेकिन हकीकत बेहद चिंताजनक है। शिक्षा के गिरते स्तर का खुलासा देश के 24 राज्यों के 26 जिलों में आयोजित सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है। 26 जिलों में झारखंड का रामगढ़ जिला भी सर्वे में शामिल था, जहां 60 गांवों के 1189 घरों के 1456 बच्चों को शामिल किया गया। 


एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) 2019 ने सर्वे में बताया है कि तीसरी कक्षा में पढ़ रहे 80 फीसदी बच्चों को दहाई (दो अंकों की संख्याएं) को घटाना नहीं आता, जबकि दूसरी कक्षा में ऐसे बच्चों का आंकड़ा 12.8 फीसदी है। जब रामगढ़ में यह हालत है, तो प्रदेश के दुर्गम इलाकों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इस साल असर ने अपने पुराने मानकों को बदल कर यह रिपोर्ट तैयार की। सर्वे में नई शिक्षा नीति के मूल सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए निजी और सरकारी दोनों स्कूलों के चार से आठ साल के बच्चों को ही शामिल किया गया। असर के रिसर्च मैनेजर संतोष कुमार ने बताया कि इस साल संज्ञानात्मक विकास, प्रारंभिक भाषा, गणित, सामाजिक और भावनात्मक विकास को ध्यान में रखते हुए सर्वे किया गया। रिपोर्ट में सामने आए तथ्य संतुष्ट करने वाले कतई नहीं हैं।

प्राइवेट स्कूलों में लड़कों का नामांकन अधिक
लड़कों और लड़कियों के नामांकन में भी अभिभावक भेदभाव करते हैं। छह से आठ वर्ष के बच्चों में सरकारी स्कूल में पढ़ने वालों में 61.1 प्रतिशत लड़कियां हैं, जबकि 52.1 फीसदी लड़के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। उम्र के साथ यह अंतराल और बढ़ता जाता है। आज भी लोग यह सोचते हैं कि लड़के ही कुछ कर सकते हैं, जबकि लड़कियां चूल्हे-चौके करेंगी।

74% नहीं पढ़ पाए भाषा की किताब
कक्षा तीसरी के 70 प्रतिशत बच्चों को पहली कक्षा की किताबें पढ़ने नहीं आतीं। वहीं, दूसरी कक्षा के 74 फीसदी बच्चे पहली की किताबें पढ़ने में असमर्थ हैं। छात्र छात्राओं में भेदभाव भी देखा गया।

गणित में अधिकतर विद्यार्थी फिसड्डी
गणित का डर आज भी बच्चों में बरकरार है। यही कारण है कि साधारण जोड़-घटाव भी बच्चों के लिए महाभारत बना हुआ है। सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि कक्षा तीसरी के 80 फीसदी बच्चे दहाई का घटाव करना भी नहीं जानते। वहीं, 70 फीसदी बच्चे सर्वे में दहाई का जोड़ नहीं कर पाए। दूसरी कक्षा में यह आंकड़ा 71 फीसदी है।

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