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रामगढ़: तीन दिन से नहीं जला था चूल्हा, बीमार शख्स की भूख से मौत

2 वर्ष पहले
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रामगढ़. जिले के मांडू प्रखंड में जून माह के बाद अब एक बार फिर भूख से मौत का मामला सामने आया है। प्रखंड के नवाडीह पंचायत के जरहिया टोला के राजेंद्र बिरहोर (39) की 24 जुलाई को मौत हो गई। उसकी पत्नी शांति देवी का कहना है कि घर में तीन दिनों से खाना नहीं बना था, पति को एक महीने से पीलिया था मगर दवा खरीदने के भी पैसे नहीं थे। ऐसे में उसके पति की भूख से मौत हो गई।

 

भीख मांगकर गुजारा कर रही थी शांति

शांति देवी के मुताबिक पति कभी-कभी ट्रैक्टर चलाता था, जिससे घर चलता था। बीमारी के कारण ये काम बंद हो गया तो शांति देवी खुद भीख मांगकर लाती तो पति और छह बच्चों को किसी तरह अन्न मिलता था। पति की बीमारी बढ़ने के बाद वह भीख मांगने भी नहीं जा पाती थी, घर में अनाज बिल्कुल खत्म हो गया था। हालांकि मौके पर पहुंचे बीडीओ और सीओ ने न सिर्फ मौत का कारण भूख मानने से इनकार कर दिया, बल्कि मृतक का पोस्टमार्टम तक नहीं करवाया। पारिवारिक लाभ के 10 हजार रुपए दिए और अन्य सुविधाओं का आश्वासन देकर चले गए।

 

एक महीने से बीमार था, पर दवा खरीदने के पैसे नहीं थे
मृतक की पत्नी शांति देवी ने बताया कि उसका पति एक महीने से पीलिया बीमारी ग्रसित था। उसे 15 जून को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मांडू लेकर गए थे। जहां पर डॉक्टर ने एक पर्ची लिख कर थमा दी। पर्ची लेने के बाद वह अपने पति के साथ वापस अपने घर आ गई। पैसे न रहने के कारण बीमारी का इलाज भी नहीं हो पाया।

 

घर में नहीं था अनाज का एक दाना
मृतक राजेंद्र बिरहोर के घर में बर्तन खाली पड़े हुए थे। उनमें अनाज का एक दाना भी नहीं था। बिरहोर की पत्नी शांति ने बताया कि भीख मांगकर लाया हुआ अनाज कुछ दिन पहले ही खत्म हो चुका था।

 

परती है जमीन...आधार के अलावा कोई कार्ड भी नहीं था
पत्नी शांति के अनुसार उसके पति के पास सिर्फ आधार कार्ड था। इसके अलावा राशन कार्ड या अन्य कोई कार्ड नहीं था। राजेंद्र के नाम पर एक एकड़ 80 डिसमिल सरकारी जमीन मिली थी लेकिन वह परती है। वह कभी-कभार ट्रैक्टर चलाकर परिवार का भरण-पोषण करता था। इसके अलावा उसकी पत्नी इधर-उधर से भीख मांग बच्चों को खिलाती थी।

 

बीडीओ और सीओ ने दिए पारिवारिक लाभ के दस हजार
मौत की सूचना पाकर मांडू के सीओ ललन कुमार और बीडीओ मनोज गुप्ता उसके घर पहुंचे और परिजनों से मामले की जानकारी ली। इस दौरान पीड़ित परिवार को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ के तहत तत्काल दस हजार रुपए दिए गए। इसके अलावा दो क्विंटल चावल, पेंशन और बिरसा आवास, राशन कार्ड समेत अन्य सुविधाएं दिलाने का आश्वासन देकर वे दोनों चले गए।

 

अधिकारियों ने पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजा शव
मौके पर गए मांडू के बीडीओ और सीओ ने राजेंद्र बिरहोर का शव पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजा। सीओ ललन कुमार ने मौत का कारण पूछे जाने पर चुप्पी साध ली। मीडिया के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। जाते-जाते उन्होंने कहा कि आपको घटना के बारे में पता है, जैसा बयान मुझ पर सूट करे, वैसा छाप दो।
  
जून में हुई थी चिंतामन बिरहोर की मौत  
जून माह में मांडू के कुजू कुंदरिया में चिंतामन बिरहोर की मौत भी भूख के कारण होने की बात सामने आई तो यह खबर कई दिनों तक सुर्खियों में बनी रहीं। बड़े-बड़े अधिकारी से लेकर नेता परिजनों से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान खूब घोषणाएं की गई और इसे बीमारी से मौत बताने का भी प्रयास होता रहा।

 

राजेंद्र की मौत भूख से नहीं बीमारी से हुई : बीडीओ
मांडू के बीडीओ मनोज गुप्ता ने बताया कि राजेंद्र की मौत भूख से नहीं बल्कि बीमारी के कारण हुई है। पूछताछ में राजेंद्र की पत्नी शांति देवी और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उसे पीलिया हुआ था। वहीं इस मामले में डीसी राजेश्वरी बी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

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