सम्मेलन / रांची से दिल्ली तक हुई मुझे समाप्त करने की कोशिश, पर ये आसान नहीं: बाबूलाल मरांडी



झाविमो द्वारा प्रभात तारा मैदान में जनादेश समागम सह कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया है। झाविमो द्वारा प्रभात तारा मैदान में जनादेश समागम सह कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया है।
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झाविमो द्वारा प्रभात तारा मैदान में जनादेश समागम सह कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया है।झाविमो द्वारा प्रभात तारा मैदान में जनादेश समागम सह कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया है।

  • झाविमो के जनादेश समागम सह कार्यकर्ता सम्मेलन में बाबूलाल मरांडी ने किया चुनावी शंखनाद
  • 2019 के चुनावी मुद्दे एवं रोड मैप को किया प्रस्तुत, कार्यकर्ताओं को चुनाव तक शांत नहीं बैठने का आह्वान

Dainik Bhaskar

Sep 25, 2019, 06:29 PM IST

रांची.  झारखंड विकास मोर्चा का जनादेश समागम सह कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन बुधवार को प्रभात तारा मैदान में हुआ। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम में बाबूलाल मरांडी को पुन: पार्टी केंद्रीय अध्यक्ष निर्वाचित होने की घोषणा की गई। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भाजपा से अलग होने के बाद से ही उन्हें रांची से दिल्ली तक समाप्त करने के कई प्रयास किए गए। मगर वे दिवार में नहीं, झारखंड के जनता के दिलों में बसते हैं। इसलिए उन्हें समाप्त करना आसान नहीं है। जितनी ताकत उन्हें एवं उनकी पार्टी को समाप्त करने में भाजपा के लोग लगाए और उसकी आधी ताकत भी जनता के कल्याण पर लगाते तो आज झारखंड कहां से कहां पहुंच जाता।

 

उन्होंने कहा कि वे भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जो रोड मैप झारखंड के विकास का तैयार किया था। अगर बाद में उसे उतारा जाता तो नया झारखंड बन गया होता। उन्होंने कहा कि 2006 के सेवाटांड से जिस यात्रा की शुरुआत उन्होंने किया था वह मुद्दे भय, भूख एवं भ्रष्टाचार मुक्त झारखंड का सवाल अब भी जस के तस है। उन्होंने कहा कि आज झारखंड की पहचान मॉब लिचिंग के तौर पर बन गई है। अपराधियों के मन में कानून का डर समाप्त हो चुका है। महिलाएं अब अपने बच्चों को भी बाहर लेकर निकलने से डरती हैं कि कहीं बच्चा चोर कह के उन्हें पीटना शुरू नहीं कर दिया जाए। किसान आज भैंस, गाय एवं बैल खरीदने से डरते हैं कि कहीं कोई उन्हें पीटना शुरू नहीं कर दें। कानून का राज समाप्त हो चुका है।

 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार विकास-विकास चिल्ला रही है। मगर जमीनी सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। पूरे देश में दो दर्जन से अधिक मौतें भूख से हो चुकी हैं। किसानों को पेंशन एवं खैरात बांटी जा रही है। किसानों को खैरात नहीं उनके खेतों तक पानी चाहिए, वे अपना विकास खुद करने में सक्षम हैं। राज्य सरकार सीएनटी-एसपीटी तो भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन का प्रयास किया ताकि कॉरपोरेट घरानों को जमीन दे सके। उनके जमाने में हर प्रखंड में स्कूल खोले गए, अब सरकार स्कूल बंद कर रही है।

 

उन्होंने कहा- राज्य में 30 लाख एकड़ से अधिक जमीन का अधिग्रहण हुआ मगर किसी को उनका हक नहीं मिला। आज भी लोग आंदोलित हैं। खनिज संपदा की लूट जारी है। यह सरकार फ्रांडजिम पर उतर आयी है। जो जमीन कारखाने के लिए लिए गए, उन्हें सरकार या तो बेच रही है या फिर खुद इस्तेमाल कर रही है। जबकि यह जमीन रैयतों को वापस मिलना चाहिए या फिर उसके विकास में रैयतों को हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। पांच वर्षों में सरकार हाथी उड़ाने के नाम पर 900 करोड़ खर्च किए मगर कितने उद्योग लगे और कितने बंद हुए, कितने को रोजगार दिया गया, इस पर सरकार खामोश है। रघुवर सरकार बनने के पहले राज्य में अपना बिजली उत्पादन 500 मेगावाट के करीब था। मगर आज 200 पर सिमट गया है। जीरो कट बिजली का सपना केवल मुख्यमंत्री दिखाते रहे। मगर लोग बिजली के बिना तरसते रहे। अपनी जेबे भरने के लिए नया मोटर कानून लाया गया।

 

अर्जुन की तरह कार्यकर्ता रखें बूथों पर कंघी पर नजर
बाबूलाल मरांडी ने कार्यकर्ताओं को आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान रघुवर सरकार के रहते किसी चीज की उम्मीद न पालें। कार्यकर्ता यहां से जाने के बाद शांति से न बैठें। चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। वे अर्जुन की तरह अपनी नजर बूथों पर कंघी (झाविमो चुनाव चिन्ह) पर रखें।

 

2019 के चुनाव के मद्देनजर अहम घोषणाएं

  • सभी बंद स्कूल एवं नए स्कूल खोले जाएंगे
  • किसानों के खेतों पर पानी पहुंचाने के लिए सिंचाई योजनाएं विकसित की जाएंगी
  • हर गरीब के बच्चों को सरकार नि:शुल्क शिक्षा दिलवाएगी
  • गरीब के बच्चे सरकारी के साथ-साथ निजी विद्यालय में भी पढ़ेंगे
  • छोटे-छोटे उद्वोगों का जाल बिछाकर लोगों को रोजगार दी जाएगी
  • लघु खनिज गांव वालों के नाम से बंदोबस्त किए जाएंगे
  • कोयला खनन में रैयतों को हिस्सेदारी दी जाएगी
  • विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग का गठन होगा
  • झारखंड के कोयले एवं पानी से बिजली उत्पादन करके सस्ती बिजली लोगों को दी जाएगी
  • भूख से मौत को रोकने के लिए पंचायत स्तर पर अनाजों का भंडारण करके गरीबों के बीच वितरित की जाएगी
  • स्थानीय लोगों के लिए नियोजन एवं स्थानीय नीति बनायी जाएगी।

 

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