झारखंड / दल-बदल में सदस्यता गई तो दुमका से चुनाव लड़ सकते हैं बाबूलाल मरांडी

पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी। - फाइल फोटो। पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी। - फाइल फोटो।
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पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी। - फाइल फोटो।पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी। - फाइल फोटो।

  • राज्यसभा चुनाव तक एक बार फिर परवान चढ़ेगी झारखंड की राजनीति
  • राज्यसभा के साथ विधानसभा उपचुनाव पर सत्ता पक्ष व विपक्षी दल की नजर 
  • भाजपा के दो से तीन विधायक भी, जो राज्यसभा चुनाव में बदल सकते हैं पाला

दैनिक भास्कर

Feb 29, 2020, 08:52 AM IST

रांची (जीतेंद्र कुमार). झारखंड की राजनीति एक बार फिर परवान चढ़ने जा रही है। राज्यसभा चुनाव में इसका क्लाइमेक्स देखने को मिल सकता है। झाविमो का भाजपा में विलय होने के बाद पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी की सदस्यता पर आंच आयी तो वह विधायिकी से इस्तीफा दे सकते हैं। अवसर रहा तो दुमका विधानसभा उप चुनाव में ताल ठोक सकते हैं। इधर राज्यसभा की दोनों सीटों पर कब्जे की कोशिश में सत्ता पक्ष हर तरह की रणनीतिक चाल को अंजाम दे सकता है। इसकी पटकथा लिखी जा रही है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ही इसे पर्दे पर भी उकेरने की कोशिश शुरू कर दी गयी है।

2016 के रास चुनाव में बसंत सोरेन की हार का बदला लेना चाहेगा झामुमो
बाबूलाल मरांडी प्रकरण अब राज्यसभा चुनाव से भी जुड़ने जा रहा है। राज्यसभा के चुनाव में इस बार झामुमो 2016 में बसंत सोरेन की हार का बदला लेगा। इसके लिए बन रही रणनीति के अनुसार सत्ता पक्ष दोनों सीटों पर कब्जे की कोशिश करेगा। इसी क्रम में दल बदल को लेकर बाबूलाल मरांडी की सदस्यता भी लेने की कोशिश की जा सकती है। भाजपा के दूसरे विधायक ढुल्लू महतो भी इसी टारगेट पर होंगे। मामला यहीं नहीं रुकेगा। भाजपा के दो से तीन ऐसे विधायक भी हैं जो राज्यसभा चुनाव में पाला बदल सकते हैं। वे सदस्यता देने तक की बाजी लगा सकते हैं। आजसू पार्टी से सत्ता पक्ष को मिल रहे भरोसे की बदौलत यह सारा खेल हो सकता है।

सदस्य संख्या का गणित  

दो सीटों के लिए राज्यसभा का चुनाव मार्च में होना है। प्रथम वरीयता के आधार पर जीत के लिए 27 मत जरूरी हैं। विधानसभा के कुल 80 में भाजपा के 25 विधायक हैं। इसके अलावा एक बाबूलाल मरांडी हैं। इसमें अगर एक-दो विधायक इधर-उधर हुए तो भाजपा के प्रथम वरीयता के वोट 22-23 पर रुक जाएंगे और यहीं से झामुमो दूसरी सीट पर दावं लगाने का खेल शुरू करेगा।

2016 में... दो ने की थी क्रॉस वोटिंग
2016 के राज्यसभा चुनाव में झामुमो गठबंधन के पास 30 विधायक थे। लेकिन चमरा लिंडा व बिट्टू सिंह वोट देने नहीं अाये। गठबंधन के दो विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी। इस तरह झामुमो के बसंत सोरेन को प्रथम वरीयता के 26 व भाजपा के दूसरे प्रत्याशी महेश पोद्दार को 24 वोट मिले। लेकिन भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी को 29 मत मिले थे। 27 मत होने से वे जीत गए और उनके 2 मत महेश पोद्दार में शिफ्ट कर गए। दो मतों की गणना में .66 मत पोद्दार में जुट जाने से वह चुनाव जीत गए। 

दुमका फिर बनेगी हॉट सीट
संकेत के अनुसार स्पीकर बाबूलाल मरांडी के भाजपा में विलय पर जल्द कोई फैसला लेने नहीं जा रहे। मरांडी की सदस्यता पर भी अांच आ सकती है। उस स्थिति में भाजपा बाबूलाल से इस्तीफा दिलवा कर दुमका से उप चुनाव लड़ा सकती है। भाजपा की इस रणनीति की काट में झामुमो भी बाबूलाल को भगोड़ा (धनवार से चुनाव नहीं लड़ने) बता कर दुमका में उनका मजबूती से सामना करने की रणनीति पर काम करने लगा है।

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