• Hindi News
  • Local
  • Jharkhand
  • Ranchi
  • At the meeting of legislative party leaders, the speaker called CP Singh instead of Babulal, inviting Pradeep Yadav as the leader of JVM

झारखंड / विधायक दल के नेताओं की बैठक में स्पीकर ने बाबूलाल के बजाय सीपी सिंह को बुलाया, झाविमो के नेता के तौर पर प्रदीप यादव को दिया न्यौता

बाबूलाल मरांडी- फाइल फोटो। बाबूलाल मरांडी- फाइल फोटो।
X
बाबूलाल मरांडी- फाइल फोटो।बाबूलाल मरांडी- फाइल फोटो।

  • झाविमो के मर्जर और प्रदीप-बंधु के निष्कासन पर स्पीकर का फैसला आना अभी बाकी
  • निष्कासन के बावजूद झाविमो के ही माने जाएंगे प्रदीप और बंधु
  • अब झाविमो के दोनों धड़ों के विलय की तारीख पर फंस सकता है पेंच

दैनिक भास्कर

Feb 26, 2020, 09:23 AM IST

रांची. नई विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अब तक तय नहीं हो पाया है...और मौजूदा तस्वीर यही इशारा करती है कि अभी इसमें और समय लग सकता है। दरअसल, सबसे बड़े विपक्षी दल यानी भाजपा ने भले ही बाबूलाल मरांडी को विधायक दल का नेता चुन लिया है, मगर अब तक पार्टी के इस निर्णय या फिर मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के विभाजन और अलग-अलग दलों में विलय पर स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने कोई भी निर्णय नहीं लिया है। वे पहले ही कह चुके हैं कि वे इस मामले में विधिक राय लेंगे और हड़बड़ी में कोई निर्णय नहीं लेंगे। उनके इस कथन की पुष्टि करते हुए ही बजट सत्र को लेकर 27 फरवरी को विभिन्न पार्टियों के विधायक दल नेताओं की बैठक के लिए भाजपा से बाबूलाल मरांडी को नहीं, सीपी सिंह को आमंत्रण दिया गया है। यानी विधानसभा में अभी बाबूलाल मरांडी को बतौर भाजपा के विधायक दल के नेता, मान्यता नहीं मिली है। यही नहीं, प्रदीप यादव को बतौर झाविमो विधायक दल नेता न्यौता दिया गया है। यानी स्पीकर ने झाविमो के विभाजन और विलय को भी स्वीकृति नहीं दी है।

दो सवाल...जिन्होंने उलझा रखी है दल-बदल की गुत्थी
झाविमो के तीन विधायकों के बीच पार्टी के विभाजन और दोनों धड़ों के अलग-अलग मर्जर को लेकर दो सवाल राजनीतिक गलियारों में उठते रहे हैं। पहला सवाल कि क्या प्रदीप यादव और बंधु तिर्की के अलग-अलग निष्कासन के बाद बाबूलाल मरांडी पार्टी की केंद्रीय कमेटी में भाजपा में विलय का निर्णय ले सकते हैं? और दूसरा सवाल ये कि यदि झाविमो के दोनों ही धड़ों ने अलग-अलग पार्टियों में विलय का निर्णय ले लिया तो दल-बदल नियम किस धड़े पर लागू होगा? हमने इस पर संविधान विशेषज्ञ अाैर लाेकसभा के पूर्व महासचिव, जीसी मल्हाेत्रा से बात की। 

विधायकों का विभाजन ही मूल...इससे इतर केंद्रीय कमेटी के बाकी फैसलों से विधानसभा को मतलब नहीं

बाबूलाल मरांडी ने प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को अलग-अलग तारीखों पर पार्टी से निष्कासित किया। इसके बाद 11 फरवरी पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में भाजपा मे विलय का निर्णय लिया। मरांडी के समर्थकों के मुताबिक उस समय मरांडी ही पार्टी के अकेले विधायक थे, अत: निर्णय बहुमत का था। संविधान विशेषज्ञ जीसी मल्होत्रा कहते हैं कि निष्कासन के बावजूद दाेनाें ही झाविमाे के ही विधायक कहे जाएंगे। इसलिए तीन विधायकाें वाली पार्टी में वे अगर एक साथ हाे गए ताे वह दाे तिहाई विधायक कहे जाएंगे। विधायकाें का विभाजन ही मूल है। इससे अलग पार्टी की कमेटी के फैसले से विधानसभा काे मतलब नहीं है।

दो विधायकों वाले धड़े का कांग्रेस में विलय पहले हुआ माना जाए तो किसी पर नहीं लागू होता दल-बदल कानून

बाबूलाल ने 13 फरवरी को निर्वाचन आयोग व 16 फरवरी को स्पीकर को भाजपा में विलय के निर्णय की जानकारी दी। 17 को घोषणा की और 24 फरवरी को भाजपा ने स्पीकर को विलय व बाबूलाल को विधायक दल का नेता चुने जाने संबंधी पत्र सौंपा। जबकि प्रदीप-बंधु ने 16 फरवरी को कांग्रेस में विलय की घोषणा की और 17 को दोनों विधायकों व कांग्रेस ने स्पीकर को जानकारी दी। जीसी मल्होत्रा कहते हैं कि यदि स्पीकर को जानकारी देने के बजाय दोनों पक्षों द्वारा प्रक्रिया पूरी करने को विलय की तिथि माना गया तो दो विधायकों वाले धड़े यानी दो-तिहाई विधायकों का मर्जर पहले होगा। तब दल-बदल कानून लागू नहीं होगा। बचे हुए विधायक का बाद में भाजपा में मर्जर भी मान्य होगा।

एक विधायक वाले गुट का विलय पहले माना तब फंस सकता है पेंच

झाविमाे के दाेनाें गुटाें ने अगर एक ही दिन या एक साथ विलय का निर्णय लिया है ताे वह सही है। एेसे में एक गुट के दाे तिहाई विधायकाें ने कांग्रेस में विलय किया। अगर एक विधायक वाले गुट का विलय पहले हाे जाता है तब इस गुट का मामला दल-बदल के दायरे में आ सकता है।- जीसी मल्हाेत्रा, संविधान विशेषज्ञ और लाेकसभा के पूर्व महासचिव

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना