झारखंड / 2006 में अस्तित्व में आई थी झारखंड विकास मोर्चा, 2009 के विस चुनाव में जीती थी 11 सीटें

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी 14 साल बाद भाजपा में शामिल हुए। बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी 14 साल बाद भाजपा में शामिल हुए।
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बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी 14 साल बाद भाजपा में शामिल हुए।बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी 14 साल बाद भाजपा में शामिल हुए।

  • बाबूलाल मरांडी रहे हैं झारखंड के पहले मुख्यमंत्री, हार से हुई थी राजनीतिक करियर की शुरुआत
  • 2007 में नक्सली हमले में एक बेटे की हो चुकी है मौत, बड़ा बाबू ने मांगी थी रिश्वत तो छोड़ी थी नौकरी

दैनिक भास्कर

Feb 17, 2020, 03:07 PM IST
रांची. झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी ने सितंबर 2006 में झारखंड विकास मोर्चा का गठन किया था। 14 साल के बाद बाबूलाल मरांडी झाविमो का भाजपा में विलय कर दोबारा भाजपा में शामिल हो गए हैं। पार्टी गठन के बाद झाविमो पहली बार 2009 के लोकसभा चुनाव में उतरी और कोडरमा से एक सीट जीतकर झारखंड की राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज की। 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 25 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ा और 11 सीटें जीतकर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई। बाबूलाल ने इस चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था।
  • कॉलेज में पढ़ाई के दौरान संघ से जुड़े मरांडी

    कॉलेज में पढ़ाई के दौरान संघ से जुड़े मरांडी

    बाबूलाल मरांडी। (फाइल फोटो)

    11 जनवरी 1958 में गिरिडीह के कोडिया बैंग गांव में जन्मे बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं। इसके अलावा वे 1998,1999 में दुमका, 2004 और 2009 में कोडरमा से सांसद रहे हैं। अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव से पूरी करने के बाद उन्होंने गिरिडीह कॉलेज में दाखिला लिया। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मरांडी संघ परिवार से जुड़े। काफी समय तक संघ और आरएसएस में काम करने के बाद उन्हें विश्व हिन्दू परिषद का सचिव बनाया गया। संघ और आएसएस से जुड़ने से पहले मरांडी एक स्कूल टीचर थे। 1989 में उनकी शादी शांतिदेवी से हुई थी, दोनों का एक बेटा अनूप मरांडी भी था, जिसकी 2007 में नक्सली हमले में मौत हो गई थी।

  • 1991 में पहली बार लड़ा लोस चुनाव, हारे

    1991 में पहली बार लड़ा लोस चुनाव, हारे

    बाबूलाल मरांडी। (फाइल फोटो)

    कई सालों से दुमका में काम कर रहे मरांडी को भाजपा ने 1991 में यहां से लोकसभा चुनाव का टिकट दिया लेकिन वे हार गए। 1996 में एक बार फिर वे शिबू सोरेन से इस सीट पर मात खा गए। इसके बावजूद 1998 के विधानसभा चुनाव के लिए मरांडी को भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था। इसी साल हुए आम चुनाव में वे शिबू सोरेन को दुमका से हराने में कामयाब रहे। 1999 में अटल सरकार में उन्हें वन पर्यावरण राज्य मंत्री बनाया गया। एनडीए की सरकार में बिहार के 4 सांसदों को कैबिनेट में जगह दी गई। इनमें से एक बाबूलाल मरांडी थे। 1999 में लोकसभा भंग हो गई। दुमका सीट पर मरांडी ने फिर से चुनाव लड़ा और शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन को 5000 वोटों से हरा दिया। 2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद एनडीए सरकार में बाबूलाल ने राज्य में सरकार बनाई।

  • 2003 में नेतृत्व परिवर्तन के बाद छोड़ी मुख्यमंत्री पद की कुर्सी

    2003 में नेतृत्व परिवर्तन के बाद छोड़ी मुख्यमंत्री पद की कुर्सी

    बाबूलाल मरांडी। (फाइल फोटो)

    2003 में राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बाद सत्ता अर्जुन मुंडा को सौंप दी गई। इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी ने कोडरमा सीट से चुनाव जीता। मरांडी ने 2006 में कोडरमा सीट सहित भाजपा की सदस्‍यता से भी इस्तीफा देकर 'झारखंड विकास मोर्चा' नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाई। इसके बाद कोडरमा लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बाबूलाल मरांडी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता। फिर 2009 में भी उन्होंने कोडरमा सीट से लोकसभा का चुनाव जीता। इसके बाद झारखंड में 2014 में विधानसभा चुनाव में बाबूलाल ने दो सीटों से चुनाव लड़ा लेकिन दोनों सीटों से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा की अन्नपूर्णा देवी से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कोडरमा विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की।

  • बड़ा बाबू ने रिश्वत मांगी तो गुस्साए बाबूलाल ने छोड़ दी नौकरी

    बड़ा बाबू ने रिश्वत मांगी तो गुस्साए बाबूलाल ने छोड़ दी नौकरी

    बाबूलाल मरांडी। (फाइल फोटो)

    बाबूलाल मरांडी जब शिक्षक थे तब एक बार उन्‍हें शिक्षा विभाग में काम पड़ गया। जब वह काम कराने विभाग के कार्यालय में गए तो वहां के बड़े बाबू ने काम के एवज में उनसे रिश्वत देने की मांग की। इस बात को लेकर दोनों में काफी कहासुनी हुई और इसके बाद गुस्‍साए बाबूलाल ने शिक्षक की नौकरी से इस्‍तीफा दे दिया।

  • ऐसा रहा है झारखंड विकास मोर्चा का इतिहास

    ऐसा रहा है झारखंड विकास मोर्चा का इतिहास

    बाबूलाल मरांडी। (फाइल फोटो)

    झारखंड विकास मोर्चा का भाजपा में विलय होने के बाद पार्टी अब इतिहास बन चुकी है। साल 2006 में अस्तित्व में आई पार्टी ने 2009 के लोकसभा चुनाव में अपना भाग्य आजमाया। इस चुनाव में बाबूलाल मरांडी कोडरमा सीट से उपचुनाव जीते। फिर 2011 में जमशेदपुर संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में झाविमो के डॉक्टर अजय कुमार जीते। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी के किसी भी प्रत्याशी को जीत हासिल नहीं हुई।।

    • 2009 के विधानसभा चुनाव में झाविमो 25 सीट पर लड़ी, 11 जीती थी। पार्टी का वोट शेयर 9.1 प्रतिशत रहा था।
    • 2014 के विधानसभा चुनाव में झाविमो 73 सीट पर लड़ी, 8 जीती थी। पार्टी का वोट शेयर 10.16% रहा था। हालांकि 2014 में बीजेपी ने उसके 6 विधायकों को तोड़ लिया था और सरकार बनाई थी।
    • 2019 के विधानसभा चुनाव में झाविमो 81 सीटों पर लड़ी। इस चुनाव में खुद बाबूलाल और दो दूसरे विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की चुनाव जीते। पार्टी का वोट शेयर 5.45% रहा था।

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