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रांची. बजट सत्र के दौरान गुरुवार को भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने भाजपा विधायकाें के हंगामे अाैर शाेर गुल काे राेकते हुए स्पीकर से कहा कि अभी आप दबाव में हैं तो सत्ता पक्ष से ही किसी को विपक्ष का नेता चुन लें और सीट पर बैठा दें। लेकिन इस मुद्दे को लेकर अब कोई हंगामा नहीं होगा। उन्हाेंने कहा कि 28 फरवरी काे यह बजट सत्र शुरू हुआ है। उसी दिन से प्रतिपक्ष के नेता की मांग हो रही है।
11 फरवरी को सर्वसम्मति से विलय का निर्णय हुआ। 17 फरवरी काे विलय कर दिया गया। इसकी सूचना चुनाव आयोग का दे दी गई। जब विलय हुआ तो भाजपा विधायक दल की बैठक में दल का उन्हें नेता चुना गया। उसकी सूचना भी विधानसभा को दी गई। चुनाव आयोग ने गत 06 मार्च को इस विलय की स्वीकृति भी दे दी। अब निर्णय स्पीकर के हाथ में है। जब निर्णय लेना हों, लें। लेकिन इस मुद्दे को लेकर अब कोई भी भाजपा का सदस्य वेल में नहीं आएगा।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पूरे प्रदेश से पक्ष और विपक्ष के नेता चुनकर आए हैं। क्षेत्र की कई समस्याएं होती हैं। विधानसभा में उन मुद्दों को उठाना रहता है। सदन बार-बार बाधित हो रहा है तो विधायक अपने मुद्दों को उठाने से वंचित हो जा रहे हैं। सदन चले यह सभी की जिम्मेवारी हाेती है। समाज में कई समस्याएं हैं और कई घटनाएं हुई हैं, उनपर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि अध्यक्ष निर्णय लेने में अब ज्यादा देर नहीं लगाएंगे।
इधर, स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि न्याय होगा इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं है। प्रतिपक्ष के नेता के मामले में हम विधिक राय लेकर ही कोई निर्णय लेना चाहते हैं। हंगामा अच्छा नहीं लग रहा है। विधिक राय आने के बाद तनिक भी देर नहीं होगी। थोड़ा वक्त लग रहा है लेकिन न्याय होगा।
छह जिलों में बिजली सप्लाई में कटौती का मुद्दा उठा
इसके पूर्व गुरुवार काे सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई पक्ष और विपक्ष ने मिलकर पहले तो डीवीसी के कमांड एरिया के छह जिलाें में बिजली सप्लाई में कटौती किये जाने का मुद्दा उठाया। इसको लेकर काफी शोरगुल हुआ। इसके बाद भाजपा विधायक अमित मंडल ने प्रतिपक्ष के नेता की मान्यता का मुद्दा एक बार फिर उठाया । कहा कि बिना कैप्टन के टीम कैसे खेलेगी। भाजपा में झाविमो के विलय को चुनाव आयोग ने भी सही ठहराया है। अब गेंद स्पीकर के पाले में है। इसके बाद भाजपा के सभी विधायक वेल में आ गये और न्याय दें, का नारा लगाने लगे। इसी बीच बाबूलाल मरांडी ने कहा,अपनी बात रखी जिसकी वजह से प्रतिपक्ष के नेता की मान्यता को लेकर बजट सत्र में लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया अाैर इस बजट सत्र मे पहली बार सदन दाेनाें पाली में चला। डीवीसी का मामला उठाए जाने के बाद संसदीय मंत्री अालमगीर अालम ने कहा कि सरकार ने इसे संज्ञान में ले लिया है। इस पर जल्द कार्रवाई हाेगी ताकि लाेगाें काे बिजली मिल सके।
ई-पॉश मशीनें एक साल मे हो जाएंगी फ्री, नहीं खत्म कर सकते एग्रीमेंट : खाद्य अापूर्ति मंत्री
खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉक्टर रामेश्वर उरांव ने कहा कि राशन दुकानों में लगायी गई ई-पॉश मशीनें एक साल में फ्री हो जाएंगी। इसलिए कंपनी के साथ किया गया एग्रीमेंट अभी खत्म नहीं किया जा सकता है। वर्तमान में सरकार प्रत्येक ई पॉश मशीन पर प्रति माह 1593 रुपए किराया पर खर्च करती है। जनवरी 2019 से दिसंबर 2019 तक विभाग ने कुल 48.90 लाख रुपए भुगतान किया है। अगस्त 2021 तक मशीन का किराया भुगतान किया जाना है। इसके बाद मशीन विभाग को मिल जाएगा। एक साल बाद मात्र 22 करोड़ देना होगा और मशीन अगले तीन साल और काम करेगी। डॉक्टर उरांव ने कहा कि इस तीन साल में सिर्फ रख-रखाव खर्च ही कंपनी को देना होगा। अगर तत्काल ई-पॉश मशीनों काे खरीदा गया तो 71 करोड़ रुपए के साथ आॅपरेशनल खर्च भी सरकार काे देना होगा। इसलिए सरकार अभी मशीन नहीं खरीदेगी।
गुरुवार काे विधायक प्रदीप यादव ने अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से सदन में इस मामले को उठाया था। उन्होंने कहा कि सरकार ई-पॉश मशीनों के इस्तेमाल के लिए सिर्फ किराये के रूप में हर साल 50 करोड़ का भुगतान करती है जबकि यह मशीन 5000 हजार रुपए में उपलब्ध है। इस मशीन के माध्यम से ही खाद्यान्न वितरण किया जाना है। इस पर आठ साल में करीब 400 करोड़ रुपए किराये में ही खर्च हो जाएगा। इससे बेहतर है कि सरकार खुद मशीन खरीदे और कंपनी को सिर्फ रखरखाव की जिम्मेदारी दें। इससे जनता का करोड़ों रुपए बचेगा।




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