झारखंड / भाजपा में जाने के बाद दल-बदल कानून बढ़ा सकता है बाबूलाल की मुश्किलें

बाबूलाल मरांडी (फाइल फोटो)। बाबूलाल मरांडी (फाइल फोटो)।
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बाबूलाल मरांडी (फाइल फोटो)।बाबूलाल मरांडी (फाइल फोटो)।

  • लाेकसभा के पूर्व महासचिव जेसी मल्होत्रा ने कहा- तीन में से दाे विधायकाें के निष्कासन के बावजूद एक विधायक दूसरी पार्टी में नहीं जा सकता है
  • तीन विधायकाें वाली इस पार्टी के दाे विधायक ही एक साथ पार्टी छाेड़ सकते हैं, अगर काेई एक विधायक पार्टी छाेड़ता है ताे वह दल-बदल कानून के तहत आएगा

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 07:19 AM IST

रांची. झाविमो का भाजपा में विलय के बाद बतौर विधायक या भाजपा विधायक दल के नेता बनने को लेकर बाबूलाल मरांडी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अकेले विधायक के साथ पार्टी की पूरी कार्यकारिणी के साथ विलय करने पर भी वे दल-बदल कानून के दायरे में अा सकते हैं। लाेकसभा के पूर्व महासचिव जेसी मल्होत्रा का इस संबंध में कहना है कि तीन में से दाे विधायकाें के निष्कासन के बावजूद एक विधायक दूसरी पार्टी में नहीं जा सकता है। तीन विधायकाें वाली इस पार्टी के दाे विधायक ही एक साथ पार्टी छाेड़ सकते हैं। अगर काेई एक विधायक पार्टी छाेड़ता है ताे वह दल-बदल कानून के तहत अा सकता है। क्याेंकि यह अांकड़ा दाे तिहाई बहुमत का हाेना चाहिए। संविधान विशेषज्ञ मल्होत्रा का कहना है कि अगर तीन विधायकाें वाली पार्टी के दाे विधायक एक साथ पार्टी छाेड़कर एक ही जगह कहीं जाते हैं ताे उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं हाे सकता। 

झाविमो ने दोनों विधायकों के निष्कासन की सूचना स्पीकर को दे दी है 

बाबूलाल मरांडी की पार्टी झाविमाे के तीन विधायक हैं, इनमें बाबूलाल मरांडी के अलावा बंधु तिर्की, प्रदीप यादव शामिल हैं। प्रदीप और बंधु को झाविमाे ने पार्टी से निकाल दिया। इसके बाद झाविमाे ने इसकी सूचना स्पीकर काे दी। इसके बावजूद पार्टी में जब तक दाेनाें निष्कासित विधायक दूसरी पार्टी में नहीं जाते हैं तब तक वे निष्कासन के बावजूद उसी पार्टी के विधायक माने जाएंगे। एेसी स्थिति में दाेनों के निष्कासन के बाद पार्टी में बचे एक मात्र विधायक के दूसरे दल में जाने का मामला दल-बदल कानून के दायरे में अा सकता है। 

प्रदीप यादव-बंधु तिर्की दूसरी पार्टी में जाएं तभी बनेगी बात 

झाविमाे से निष्कासित दाेनाें विधायक अगर बाबूलाल मरांडी के विलय के पूर्व दूसरी पार्टी में शामिल हाे जाते हैं, तब बाबूलाल के लिए रास्ता अासान हाे सकता है। एेसे में वे पार्टी में बचे एक मात्र विधायक हाेंगे अाैर एक विधायक वाली पार्टी का विलय हाे सकता है। यह दल-बदल कानून के दायरे में नहीं अाएगा। झाविमाे का विलय 17 फरवरी काे हाेना है। एेसे में 17 के पूर्व दाेनाें विधायकाें का दूसरी पार्टी में जाने का लाभ बाबूलाल काे मिल सकता है। 

बाबूलाल पर दल-बदल कानून लागू होने का खतरा
संविधान विशेषज्ञ व पूर्व महासचिव लोस जीसी मल्हाेत्रा ने कहा कि बाबूलाल मरांडी की झाविमाे प्रजातांत्रिक पार्टी में तीन विधायक हैं। इनमें से दाे विधायकाें काे निष्कासित कर दिया गया है। बाबूलाल मरांडी अकेले उस पार्टी में बचे हुए हैं। इसके बावजूद दूसरी पार्टी में विलय से दल बदल- कानून उन पर लागू हाे सकता है। 
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