अरेस्ट / पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की हत्या का आरोपी भजो हरि सिंह मुंडा को एनआईए ने अड़की से पकड़ा



भजो हरि सिंह मुंडा। भजो हरि सिंह मुंडा।
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भजो हरि सिंह मुंडा।भजो हरि सिंह मुंडा।

  • 5 करोड़ में हुई थी पूर्व मंत्री की हत्या की डील, राजा पीटर ने कुंदन पाहन को 3 करोड़ एडवांस दिए थे
  • 15 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल, 9 जुलाई 2008 को हुई थी हत्या

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 05:27 AM IST

रांची. पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड में शनिवार को एनआईए ने लंबे समय से फरार आरोपी भजाे हरि सिंह मुंडा को अड़की थाना क्षेत्र के जोजोहातू गांव से गिरफ्तार कर लिया। 48 वर्षीय भजो हरि सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी है। वह नक्सली कुंदन पाहन का सहयोगी था व अड़की के गुरुबेड़ा का रहने वाला है।

 

भजो के खिलाफ एनआईए ने 31 मार्च 2018 को आरोप पत्र भी दाखिल किया था। एनआईए जांच में यह बात सामने आई थी कि हत्या के लिए 8 जुलाई 2008 को राजा पीटर ने कुंदन पाहन को तीन करोड़ रु. एडवांस दिए थे। कुंदन ने इसमें से 2.78 करोड़ रु. भजो हरि सिंह मुंडा को दिए थे। ये पैसे झारखंड में नक्सल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दिए गए थे। रमेश की हत्या के लिए 5 करोड़ की डील हुई थी। शेष दो करोड़ 11 जुलाई 2008 को बलराम साहू को राजा पीटर के एक कर्मचारी के जरिए दिए थे।

 

15 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल

एनआईए ने राजा पीटर सहित 15 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसमें राजा पीटर को हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था। उसी ने पूर्व मंत्री की हत्या की साजिश रची थी।

{शेषनाथ सिंह खरवार (7.10.17 को गिरफ्तार) {राजा पीटर (9.10.17 को गिरफ्तार) {प्रफुल्ल महतो (15.1.18 को गिरफ्तार) {जय गणेश (15.1.18 को गिरफ्तार) {अमुश मुंडू (15.1.18 को गिरफ्तार) {बलराम साहू (14.9.09 को गिरफ्तार) {कुंदन पाहन (27.5.17 को आत्मसमर्पण) {राधे श्याम बड़ाईक (17.7.17 को गिरफ्तार) {भजो हरी सिंह मुंडा (12.1.19 को गिरफ्तार) {कृषि दांगिल (गिरफ्तार) {गुरुआ मुंडा (फरार) {विवेक जी (फरार) {पतिराम मांझी (फरार) {राजेश दा (गिरफ्तार) {मनीष दा उर्फ प्रशांत बोस उर्फ किसन दा (फरार)।

 

9 जुलाई 2008 को हुई थी हत्या

रमेश सिंह मुंडा की हत्या बुंडू के एसएस हाईस्कूल में एक समारोह के दौरान 9 जुलाई 2008 को हुई थी। फिर कुछ दिनों तक मामले की जांच रांची पुलिस ने की। इसके बाद मामले की जांच सीआईडी ने की। जब नतीजा नहीं निकला तब एनआईए ने 28 जून 2017 को मामले को टेकओवर किया। केस दर्ज कर जांच शुरू की।

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