साक्षात्कार / भाजपा झारखंड के विधानसभा चुनाव सह प्रभारी ने कहा-समन्वय बैठाने में संबंधों का मुझे लाभ मिलेगा



झारखंड के विधानसभा चुनाव सह प्रभारी नंदकिशोर यादव। (फाइल) झारखंड के विधानसभा चुनाव सह प्रभारी नंदकिशोर यादव। (फाइल)
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झारखंड के विधानसभा चुनाव सह प्रभारी नंदकिशोर यादव। (फाइल)झारखंड के विधानसभा चुनाव सह प्रभारी नंदकिशोर यादव। (फाइल)

  • नंदकिशोर बोले, हम तो चुनाव की रणनीति तय करेंगे पैमाना तय करने और टिकट बांटने का काम पार्टी का

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2019, 10:44 AM IST

रांची(विनय चतुर्वेदी).  संयुक्त बिहार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे नंदकिशोर यादव के कार्यकाल में ही झारखंड का गठन हुआ। 1983 से 2000 तक सांगठनिक कार्यों को लेकर वे झारखंड में लगातार सक्रिय रहे। इस अवधि में नंदकिशोर यादव प्रदेश भाजयुमो के महामंत्री, उपाध्यक्ष, अध्यक्ष और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे। वे कहते हैं, स्वाभाविक रूप से 1983 से लेकर 2000 तक झारखंड के विभिन्न जिलाें और मंडलों में लगातार जाने का अवसर मिला। अनेक कार्यकर्ताओं से मेरे संबंध रहे हैं। जैसे ही झारखंड के विधानसभा चुनाव सह प्रभारी के रूप में मेरे नाम की घोषणा हुई, कार्यकर्ताओं ने मुझसे बात भी है।

 

कार्यकर्ताओं का समन्वय बिठाने में मुझे इन संबंधों का लाभ मिलेगा। दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में जब उनसे विधायकों का परफॉरमेंस मापने का पैमाना पूछा गया तो उन्होंने कहा, हम तो झारखंड में चुनाव की रणनीति तय करेंगे, पैमाना तय करने और टिकट बांटने का काम तो पार्टी का है।

 

सवाल : ... तो फिर आपका क्या काम होगा?
जवाब : हमारा काम चुनाव की रणनीति तय करना और उसे एग्जिक्यूट कराना है। जो मित्र भाजपा का टिकट लेकर आएगा, कमल का फूल जिसके हाथ में होगा, वह कैसे जीते, यह हमारा काम है।

 

65 प्लस का लक्ष्य पाने की क्या रणनीति होगी?
हमारे पास कार्यकर्ताओं की शक्ति है। उस शक्ति को समेट कर राज्य और केंद्र सरकार की उपलब्धि दोनों का समन्वय बनाकर चुनाव में बेहतर परिणाम लाना है। झारखंड में भाजपा की ताकत बहुत बढ़ी है। हर बूथों पर कार्यकर्ताओं की फौज है। बड़े पैमाने पर नए सदस्य बने हैं। यह जो बढ़ी हुई ताकत है, उसको एक दिशा में ले चलना है। यही हमारा उद्देश्य है और इसे ही हमें एग्जिक्यूट भी कराना है।

 

75 वर्ष से अधिक वाले विधायकों को टिकट मिलेगा या नहीं?
यह सब पॉलिसी की बात है, जिसे पार्टी का सेंट्रल पार्लियामेंट बोर्ड तय करेगा। इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता।

 

जदयू के साथ झारखंड में भी गठबंधन की योजना है?
गठबंधन किससे करना है, नहीं करना है, यह तो प्रदेश संगठन और केंद्रीय संसदीय बोर्ड ही तय करेगा। पर, सामान्य रूप में जदयू के साथ हमारा गठबंधन बिहार में है। बिहार के विकास के लिए हम इकट्ठे हुए हैं।

 

झारखंड के यादव भी राजद के परंपरागत वोटर रहे हैं। क्या आपके आने से विधानसभा चुनाव में यादव वोट भाजपा को मिलेंगे?
राजद नाम की कोई चीज अब झारखंड में बची नहीं है। वह तो खुद टुकड़ों में बंट गया। समाज का अब हर तबका चाहे वह किसी भी वर्ग और जाति विशेष का हो, सब के सब लोग अब भाजपा को चाहते हैं। जातियों की सीमा लोकसभा चुनाव में टूटी है। यह परिपाटी विधानसभा चुनाव में भी बरकरार रहने वाली है।

 

झारखंड में भाजपा की जीत का बड़ा कारण क्या बनेगा?
केंद्र और राज्य सरकार ने जो काम किया है, उस उपलब्धियों को आम लोगों तक पहुंचाने का वाहक हमारा कार्यकर्ता बनेगा। यह हमारे जीतने का बड़ा कारण बनेगा।

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